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धड़ल्ले से बिक रही गैर प्रांत की शराब
Updated Sat, 31 Mar 2018 10:58 PM IST
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शराब की बोतल।
- फोटो : अमर उजाला
मैनपुरी। वित्तीय वर्ष में नवीन ठेका आवंटन के बाद अभी शराब ठेकों पर माल नहीं पहुंचा है। जिसके चलते दुकानों पर माल नहीं है। इसका फायदा गैर प्रांत की शराब की तस्करी करने वाले जमकर मुनाफा कमा रहे हैं। साथ ही गैर प्रांत की शराब की धड़ल्ले से बिक्री हो रही है। आबकारी विभाग द्वारा ठेका आवंटन प्रक्रिया संपन्न हो चुकी है। ठेकों का वितरण भी हो चुका है। मगर अभी तक नए प्रिंट का माल गोदाम मदें नहीं आया है। वहीं वित्तीय वर्ष का अंत है।
जिस वजह से शराब ठेकों पर शराब की मारामारी है। कई दुकानों पर तो स्टाक भी तकरीबन समाप्त हो चुका है। जिसके चलते गैर प्रांत की शराब की तस्करी करने वाले जमकर मुनाफा कमा रहे हैं। हरियाणा, अरुणांचल प्रदेश, गोवा आदि स्थानों से तस्करी कर लाई गई शराब की जमकर बिक्री हो रही है। वहीं मिलावटी शराब की मांग भी अचानक बढ़ गई है। ऐसा नहीं कि इसकी जानकारी से पुलिस को नहीं है। मगर सब कुछ जानते बूझते पुलिस कुछ भी करना नहीं चाहती।
एक पुलिसकर्मी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि वर्ष भर गैर प्रांत की शराब का कारोबार होता है। अच्छी खासी रकम मिलती है जिस वजह से कार्रवाई नहीं करते। जब ज्यादा दबाव बनता है कि कुछेक लोगों को पकड़ने के बाद बरामदगी दिखा दी जाती है। मगर हकीकत में कारोबार बदस्तूर जारी रहता है, उधर अभी तक नए प्रिंट का माल बाजार में नहीं आया जिस वजह से सरकारी ठेकों पर शराब की कमी माफियाओं को जमकर फायदा पहुंचा रही है। कीमत कम और तीव्र नशा होने की वजह से लोग भी गैर प्रांत की शराब खरीद लेते हैं।
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जिस वजह से शराब ठेकों पर शराब की मारामारी है। कई दुकानों पर तो स्टाक भी तकरीबन समाप्त हो चुका है। जिसके चलते गैर प्रांत की शराब की तस्करी करने वाले जमकर मुनाफा कमा रहे हैं। हरियाणा, अरुणांचल प्रदेश, गोवा आदि स्थानों से तस्करी कर लाई गई शराब की जमकर बिक्री हो रही है। वहीं मिलावटी शराब की मांग भी अचानक बढ़ गई है। ऐसा नहीं कि इसकी जानकारी से पुलिस को नहीं है। मगर सब कुछ जानते बूझते पुलिस कुछ भी करना नहीं चाहती।
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एक पुलिसकर्मी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि वर्ष भर गैर प्रांत की शराब का कारोबार होता है। अच्छी खासी रकम मिलती है जिस वजह से कार्रवाई नहीं करते। जब ज्यादा दबाव बनता है कि कुछेक लोगों को पकड़ने के बाद बरामदगी दिखा दी जाती है। मगर हकीकत में कारोबार बदस्तूर जारी रहता है, उधर अभी तक नए प्रिंट का माल बाजार में नहीं आया जिस वजह से सरकारी ठेकों पर शराब की कमी माफियाओं को जमकर फायदा पहुंचा रही है। कीमत कम और तीव्र नशा होने की वजह से लोग भी गैर प्रांत की शराब खरीद लेते हैं।
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