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कोआपरेटिव बैंक की एफडीआर पर दिया 780 करोड़ का ठेका
Updated Fri, 14 Jul 2017 12:29 AM IST
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- फोटो : demo
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मथुरा। लोक निर्माण विभाग ने सपा के शासनकाल में आरपी इंफ्रालि. को नियम विरुद्ध 780 करोड़ रुपये के सड़क निर्माण का ठेका दे दिया। राष्ट्रीयकृत बैंक का ही एफडीआर मान्य होने के बाद भी विभाग ने कोआपरेटिव बैंक केे एफडीआर सर्टिफिकेट पर ही सरकार की चहेती फर्म को वर्क आर्डर जारी कर दिए। भाजपा सरकार ने एक शिकायत के बाद मामले में जांच बैठा दी है।
2015 में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने मथुरा आगमन पर आधा दर्जन से अधिक सड़कों के चौड़ीकरण और गोवर्धन बाईपास निर्माण की घोषणा की थी। पीडब्ल्यूडी, प्रांतीय खंड ने 505 करोड़ से 86 किलोमीटर लंबे मथुरा-डीग मार्ग, नंदगांव - बरसाना - गोेवर्धन -मथुरा -राया इंटरचेंज एक्सप्रेस-वे तक मार्ग, 138 करोड़ से 25 किलोमीटर लंबा मथुरा-डीग मार्ग, 136 करोड़ के बजट से 11.95 किलोमीटर लंबे गोवर्धन बाईपास निर्माण का प्रस्ताव शासन को भेजा था।
बजट जारी हुआ और इन तीन सड़कों के निर्माण का टेंडर आरपी इंफ्रालि. को मिल गया। आरपी इंफ्रालि. को क्षमता से अधिक कार्य देने पर अधिकारियों की शिकायत भी की गई, खूब हल्ला मचा लेकिन सब दबा दिया गया।
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भाजपा की सरकार आते ही मामला फिर उछल गया है। लखनऊ तक शिकायत पहुंची तो शासन ने जांच के लिए एक कमेटी का गठन कर दिया। पड़ताल में पता चला है कि आरपी इंफ्रालि. ने टेंडर प्रक्रिया के दौरान कोआपरेटिव बैंक की एफडीआर दाखिल की थी। लोकनिर्माण विभाग के अफसर इस फर्म पर इतने मेहरबान थे कि इस एफडीआर को न केवल स्वीकार किया बल्कि फर्म को 125 करोड़ से ज्यादा राशि जारी भी कर दी।
मामला संज्ञान में आया है। अब इसकी जांच की जा रही है। फर्म की एफडीआर का फिर से सत्यापन भी कराया जा रहा है। इसमें जिला सहकारी बैंक की एफडीआर के संदर्भ में विधिक राय ली जा रही है।
एसके वर्मा, एक्सईएन, पीडब्ल्यूडी, प्रांतीय खंड मथुरा
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2015 में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने मथुरा आगमन पर आधा दर्जन से अधिक सड़कों के चौड़ीकरण और गोवर्धन बाईपास निर्माण की घोषणा की थी। पीडब्ल्यूडी, प्रांतीय खंड ने 505 करोड़ से 86 किलोमीटर लंबे मथुरा-डीग मार्ग, नंदगांव - बरसाना - गोेवर्धन -मथुरा -राया इंटरचेंज एक्सप्रेस-वे तक मार्ग, 138 करोड़ से 25 किलोमीटर लंबा मथुरा-डीग मार्ग, 136 करोड़ के बजट से 11.95 किलोमीटर लंबे गोवर्धन बाईपास निर्माण का प्रस्ताव शासन को भेजा था।
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बजट जारी हुआ और इन तीन सड़कों के निर्माण का टेंडर आरपी इंफ्रालि. को मिल गया। आरपी इंफ्रालि. को क्षमता से अधिक कार्य देने पर अधिकारियों की शिकायत भी की गई, खूब हल्ला मचा लेकिन सब दबा दिया गया।
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भाजपा की सरकार आते ही मामला फिर उछल गया है। लखनऊ तक शिकायत पहुंची तो शासन ने जांच के लिए एक कमेटी का गठन कर दिया। पड़ताल में पता चला है कि आरपी इंफ्रालि. ने टेंडर प्रक्रिया के दौरान कोआपरेटिव बैंक की एफडीआर दाखिल की थी। लोकनिर्माण विभाग के अफसर इस फर्म पर इतने मेहरबान थे कि इस एफडीआर को न केवल स्वीकार किया बल्कि फर्म को 125 करोड़ से ज्यादा राशि जारी भी कर दी।
मामला संज्ञान में आया है। अब इसकी जांच की जा रही है। फर्म की एफडीआर का फिर से सत्यापन भी कराया जा रहा है। इसमें जिला सहकारी बैंक की एफडीआर के संदर्भ में विधिक राय ली जा रही है।
एसके वर्मा, एक्सईएन, पीडब्ल्यूडी, प्रांतीय खंड मथुरा