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बंदियों ने हवालात में किया हंगामा, पेशी पर जाने से कर रहे थे इंकार
Updated Wed, 11 Oct 2017 11:36 PM IST
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हवालात
- फोटो : amar ujala
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मैनपुरी। कचहरी स्थित हवालात में बुधवार को बंदियों ने पेशी पर जाने से इंकार करते हुए जमकर नारेबाजी की। हवालात में शौचालय और पेयजल आदि की व्यवस्था नहीं होने पर विरोध दर्ज कराया। इस दौरान उन्होंने पानी का मटका भी तोड़ दिया। मौके पर पहुंचे एसडीएम के आश्वासन बंदी पेशी पर जाने को राजी हुए।
जेल से बंदियों को अदालत में पेशी पर लाया जाता है। वहां हवालात में बंदियों की क्षमता से अधिक दो बैरकों में रखा जाता है। बुधवार को जब बंदी पेशी पर लाए गए थे। जब उन्हें पेशी पर ले जाने के लिए पुलिसकर्मियों ने बाहर निकालना चाहा तो उन्होंने विरोध कर नारेबाजी शुरू कर दी। बैरक के बाहर रखे पानी के मटके को तोड़ दिए।
उनका कहना था कि उन्हें बैरकों में ठूस ठूस कर भरा जाता है। न तो पानी और न ही शौचालय की व्यवस्था है। पंखा न होने से उन्हें गर्मी में कई घंटे बिताने पड़ते हैं। कचहरी हवालात में हंगामे की सूचना मिलने के बाद एसडीएम अमित सिंह, कोतवाली पुलिस, क्यूआरटी, यूपी 100 और कोबरा के पुलिसकर्मी पहुंच गए।
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काफी देर तक बंदियों को पेशी पर जाने के लिए समझाया गया। बाद में एसडीएम ने समस्याओं को उच्चाधिकारियों के समक्ष रख जल्द समाधान का आश्वासन दिया। इसके बाद बंदी पेशी पर जाने को तैयार हुए।
बता दें कि जेल से पेशी पर आने वाली महिला बंदियों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। गर्मी हो या सर्दी उन्हें बंदी वाहन में घंटों बैठना पड़ता है। वहां न पीने के पानी की व्यवस्था है। न ही गर्मी से राहत की कोेई व्यवस्था है। बैरक न होने के चलते महिला बंदियों को असुविधा का सामना करना पड़ता है।
जेल से बंदियों को अदालत में पेशी पर लाया जाता है। वहां हवालात में बंदियों की क्षमता से अधिक दो बैरकों में रखा जाता है। बुधवार को जब बंदी पेशी पर लाए गए थे। जब उन्हें पेशी पर ले जाने के लिए पुलिसकर्मियों ने बाहर निकालना चाहा तो उन्होंने विरोध कर नारेबाजी शुरू कर दी। बैरक के बाहर रखे पानी के मटके को तोड़ दिए।
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उनका कहना था कि उन्हें बैरकों में ठूस ठूस कर भरा जाता है। न तो पानी और न ही शौचालय की व्यवस्था है। पंखा न होने से उन्हें गर्मी में कई घंटे बिताने पड़ते हैं। कचहरी हवालात में हंगामे की सूचना मिलने के बाद एसडीएम अमित सिंह, कोतवाली पुलिस, क्यूआरटी, यूपी 100 और कोबरा के पुलिसकर्मी पहुंच गए।
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काफी देर तक बंदियों को पेशी पर जाने के लिए समझाया गया। बाद में एसडीएम ने समस्याओं को उच्चाधिकारियों के समक्ष रख जल्द समाधान का आश्वासन दिया। इसके बाद बंदी पेशी पर जाने को तैयार हुए।
बता दें कि जेल से पेशी पर आने वाली महिला बंदियों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। गर्मी हो या सर्दी उन्हें बंदी वाहन में घंटों बैठना पड़ता है। वहां न पीने के पानी की व्यवस्था है। न ही गर्मी से राहत की कोेई व्यवस्था है। बैरक न होने के चलते महिला बंदियों को असुविधा का सामना करना पड़ता है।