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03 माह में निपट सकते हैं 80 अपराधियों के मुकदमे
ब्यूरो अमर उजाला, आगरा
Updated Wed, 13 Jan 2016 01:32 AM IST
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प्रांजल, गब्बर, रविंद्र यादव, धारा, रविदत्त जैसे पेशेवर अपराधियों के खिलाफ चल रहे मुकदमे सिर्फ तीन माह में ही निपट सकते हैं। यह उम्मीद जगी है इन संगीन मामलों को सजा दिलाओ अभियान के तहत चिह्नित कर लिए जाने से। 16 अभियोजन अधिकारियों को पांच-पांच केस आवंटित किए गए हैं। यह सूची डीजी अभियोजन डा. सूर्य कुमार को भी भेजी गई है। उनके स्तर से इन मामलों की प्रगति की लगातार समीक्षा की जाएगी। इन मुकदमों के गवाहों को सुरक्षा मुहैय्या कराने से लेकर पेशी की तारीख तेजी से लगवाने का जिम्मा अभियोजन अधिकारियों का होगा।
वैसे जनपद में कुल 146 केस चिह्नित किए गए हैं। 60 मामले ऐसे हैं, जिनमें दोष सिद्ध होने पर 10 वर्ष से कम की सजा का प्रावधान है। इनमें चोरी, धोखाधड़ी, मारपीट जैसे मामले हैं। 80 केस लूट, डकैती, हत्या, अपहरण, बलात्कार, जानलेवा हमले जैसी धाराओं के हैं। इनमें दोष सिद्ध होने की सूरत में दस वर्ष से अधिक की सजा हो सकती है।
यह सूची तैयार करने में तीन बातों का ध्यान रखा गया है। एक तो ऐसे अपराधी लिए गए हैं, जो सक्रिय हैं। दूसरा वे जिनके जुर्म की कुंडली गुनाहों से लंबी है। तीसरा, हाईप्रोफाइल और चर्चित मामलों में शामिल रहे अपराधी। चर्चित मामलों में व्यापारी नेता हेमनदास जैसवानी हत्याकांड शामिल है। प्रांजल, गब्बर, मोनू वर्मा पर हत्या तथा धारा और गुड्डन पर अपहरण के मामले हैं।
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सजा दिलाओ अभियान के तहत केस चिह्नित कर लिए गए हैं। इनमें गवाही जल्द कराने से लेकर साक्ष्य पेश कराने तक की जिम्मेदारी अभियोजन अधिकारियों की होगी। - आरके सक्सेना ( संयुक्त निदेशक, अभियोजन )
बुलेट प्रूफ जैकेट पहनकर दी गवाही
व्यापारी नेता हेमनदास जैसवानी की हत्या के चश्मदीद गवाह उनके बेटे महेश जैसवानी ने मंगलवार को अदालत के सामने गवाही दी। उन्हें बुलेट प्रूफ जैकेट पहनाकर कड़ी सुरक्षा में लाया गया था। वारदात के अन्य गवाह उनके भाई सुशील जैसवानी की पिछले साल हत्या कर दी गई थी। इस कारण महेश की सुरक्षा में एहतियात बरता जा रहा है। गवाही के दौरान हत्यारोपी प्रांजल, चेतन, प्रवीन, सूरज वर्मा और मोनू वर्मा मौजूद रहे। केस से जुड़े सूत्रों ने बताया कि महेश ने अपनी गवाही में कहा, इन लोगों ने मेरे पिताजी की हत्या चौथ वसूली के लिए की, इसके बाद मेरे भाई को भी मार डाला, मेरी जान भी खतरे में है, लेकिन चाहें कुछ भी हो जाए, हम लोग चौथ वसूली नहीं होने देंगे।’ इस केस में अगली सुनवाई के लिए 19 जनवरी मुकर्रर की गई है। बता दें, हेमनदास की हत्या 28 नवंबर 2014 को की गई थी।
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वैसे जनपद में कुल 146 केस चिह्नित किए गए हैं। 60 मामले ऐसे हैं, जिनमें दोष सिद्ध होने पर 10 वर्ष से कम की सजा का प्रावधान है। इनमें चोरी, धोखाधड़ी, मारपीट जैसे मामले हैं। 80 केस लूट, डकैती, हत्या, अपहरण, बलात्कार, जानलेवा हमले जैसी धाराओं के हैं। इनमें दोष सिद्ध होने की सूरत में दस वर्ष से अधिक की सजा हो सकती है।
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यह सूची तैयार करने में तीन बातों का ध्यान रखा गया है। एक तो ऐसे अपराधी लिए गए हैं, जो सक्रिय हैं। दूसरा वे जिनके जुर्म की कुंडली गुनाहों से लंबी है। तीसरा, हाईप्रोफाइल और चर्चित मामलों में शामिल रहे अपराधी। चर्चित मामलों में व्यापारी नेता हेमनदास जैसवानी हत्याकांड शामिल है। प्रांजल, गब्बर, मोनू वर्मा पर हत्या तथा धारा और गुड्डन पर अपहरण के मामले हैं।
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सजा दिलाओ अभियान के तहत केस चिह्नित कर लिए गए हैं। इनमें गवाही जल्द कराने से लेकर साक्ष्य पेश कराने तक की जिम्मेदारी अभियोजन अधिकारियों की होगी। - आरके सक्सेना ( संयुक्त निदेशक, अभियोजन )
बुलेट प्रूफ जैकेट पहनकर दी गवाही
व्यापारी नेता हेमनदास जैसवानी की हत्या के चश्मदीद गवाह उनके बेटे महेश जैसवानी ने मंगलवार को अदालत के सामने गवाही दी। उन्हें बुलेट प्रूफ जैकेट पहनाकर कड़ी सुरक्षा में लाया गया था। वारदात के अन्य गवाह उनके भाई सुशील जैसवानी की पिछले साल हत्या कर दी गई थी। इस कारण महेश की सुरक्षा में एहतियात बरता जा रहा है। गवाही के दौरान हत्यारोपी प्रांजल, चेतन, प्रवीन, सूरज वर्मा और मोनू वर्मा मौजूद रहे। केस से जुड़े सूत्रों ने बताया कि महेश ने अपनी गवाही में कहा, इन लोगों ने मेरे पिताजी की हत्या चौथ वसूली के लिए की, इसके बाद मेरे भाई को भी मार डाला, मेरी जान भी खतरे में है, लेकिन चाहें कुछ भी हो जाए, हम लोग चौथ वसूली नहीं होने देंगे।’ इस केस में अगली सुनवाई के लिए 19 जनवरी मुकर्रर की गई है। बता दें, हेमनदास की हत्या 28 नवंबर 2014 को की गई थी।