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शिनाख्त पर सवाल, अब घरवाले कर रहे इनकार
Updated Wed, 02 Aug 2017 11:21 PM IST
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मृतक गुड्डू का बीमार पिता
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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मैनपुरी। बुझिया पुल पर मिला शव गुड्डू का है या फिर किसी और का? इस पर भी सवाल उठने लगे हैं। शव की शिनाख्त गुड्डू के चाचा ने की थी लेकिन वह भी उसके पैर की उंगलियां देखकर। वहीं पिता समेत किसी अन्य परिजन ने शव देखा तक नहीं था। गुड्डू के पिता भी अब कह रहे हैं जो शव मिला वो उनके बेटे का नहीं है पुलिस को आरोपी से फिर से पूछताछ करनी चाहिए।
गुड्डू की हत्या के गिरफ्तार आरोपी पिंटू के मुताबिक जिस दिन गुड्डू गायब हुआ था उसी दिन उसने उसकी हत्या करके शव को गांगसी नहर में फेंक दिया था। हत्या के बाद भी उसका गांव से नहीं भागना भी सवाल पैदा करता है। वहीं गिरफ्तारी के बाद पूछताछ में आसानी से मामला खुल जाना खुलासे पर संदेह को बढ़ा रहा है। दूसरी खास बात यह कि 19 जुलाई से सोमवार तक जिले में जितने भी अज्ञात शव मिले सभी का 72 घंटे बाद पोस्टमार्टम कर ईशन नदी पुल के समीप अंतिम संस्कार किया गया। वहां शव को बहाने का कोई औचित्य नहीं दिखता क्योंकि ईशन नदी व करहल के बुझिया पुल का दूर दूर तक कोई मिलान नहीं होता। इस संबंध मेें एसपी राजेश एस का कहना है कि यह शव कहीं से बहकर आया है। पोस्टमार्टम के बाद शव क्यों बहाया गया इसका जवाब पूरे पुलिस महकमे के पास नहीं है।
गांव नगला आशा निवासी मृतक गुड्डू के पिता का कहना है कि जिस स्थान पर शव मिला है वहां से बुझिया पुल पर शव का मिलना संभव नहीं है। उनका आरोप है कि आरोपी की दो बहनें एक शाहजहांपुर व दूसरी घिरोर में है। संभवत: गुड्डू की हत्या वहीं की गई है। जो शव करहल थाना क्षेत्र से बरामद हुआ है वह उनके बेटे गुड्डू का नहीं है। आरोपी झूठ बोल रहा है पुलिस को दोबारा उससे पूछताछ करनी चाहिए।
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मैंने तो शव तक नहीं देखा: ध्रुवचंद्र
गुड्डू के पिता ध्रुवचंद्र का कहना है कि उसने अभी तक शव को देखा तक नहीं है। न तो शव मिला था तब मैं वहां गया और न पोस्टमार्टम पर ही पहुंचा। मेरी तबियत काफी खराब है। गांव वाले ही जबरन खटिया सहित उठाकर ले गए थे। उन्होंने ही थाने के सामने रखकर जाम लगा दिया। इसके बाद बलवा शुरू हो गया। पंचनामा के समय गुड्डू का चाचा ही गया था। ऐसे में मुझे पता ही नहीं है कि शव किसका है। न ही मैंने शव को देखा है। लोगों ने जो हुलिया बताया है वह मेरे बेटे से मेल नहीं खाता है। ऐसे में वह शव मेरे बेटे का नहीं है।
यह भी कहना है कि वे पुलिस की जांच से संतुष्ट नहीं है। पुलिस ने आनन-फानन में गिरफ्तार कर आरोपी पिंटू को जेल भेज दिया। लेकिन उसके बाद उसे रिमांड पर लेकर सही प्रकार पूछताछ नहीं की। यही नहीं पुलिस ने नहर से निकाली बाइक के जो कागजात सौंपे वह बिल्कुल सूखे थे। जबकि नहर से निकालने जाने के कारण वह गीले होने चाहिए थे। वहीं जिस स्थान पर पिंटू ने शव को फेंका जाना बताया है वह सही नहीं है। इसकी भी जांच होनी चाहिए।
पैर की उंगलियों से की पहचान
गुड्डू के चाचा अलवर सिंह का कहना है कि उसने शव की पहचान पैर की उंगलियों से की थी। उसके भतीजे के पैर की उंगलियां काफी छोटी-छोटी थीं। वहीं एक हाथ पर ओम गुदा हुआ था। उक्त हाथ शव का कटा हुआ था। वहीं दांत भी नहीं थे। इसके चलते उनसे पहचान नहीं हो सकी। वहीं शव पानी में पड़ा होने के कारण काफी फूल चुका था। इसके चलते शक्ल भी पहचान नहीं आ रही थी।
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गुड्डू की हत्या के गिरफ्तार आरोपी पिंटू के मुताबिक जिस दिन गुड्डू गायब हुआ था उसी दिन उसने उसकी हत्या करके शव को गांगसी नहर में फेंक दिया था। हत्या के बाद भी उसका गांव से नहीं भागना भी सवाल पैदा करता है। वहीं गिरफ्तारी के बाद पूछताछ में आसानी से मामला खुल जाना खुलासे पर संदेह को बढ़ा रहा है। दूसरी खास बात यह कि 19 जुलाई से सोमवार तक जिले में जितने भी अज्ञात शव मिले सभी का 72 घंटे बाद पोस्टमार्टम कर ईशन नदी पुल के समीप अंतिम संस्कार किया गया। वहां शव को बहाने का कोई औचित्य नहीं दिखता क्योंकि ईशन नदी व करहल के बुझिया पुल का दूर दूर तक कोई मिलान नहीं होता। इस संबंध मेें एसपी राजेश एस का कहना है कि यह शव कहीं से बहकर आया है। पोस्टमार्टम के बाद शव क्यों बहाया गया इसका जवाब पूरे पुलिस महकमे के पास नहीं है।
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गांव नगला आशा निवासी मृतक गुड्डू के पिता का कहना है कि जिस स्थान पर शव मिला है वहां से बुझिया पुल पर शव का मिलना संभव नहीं है। उनका आरोप है कि आरोपी की दो बहनें एक शाहजहांपुर व दूसरी घिरोर में है। संभवत: गुड्डू की हत्या वहीं की गई है। जो शव करहल थाना क्षेत्र से बरामद हुआ है वह उनके बेटे गुड्डू का नहीं है। आरोपी झूठ बोल रहा है पुलिस को दोबारा उससे पूछताछ करनी चाहिए।
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मैंने तो शव तक नहीं देखा: ध्रुवचंद्र
गुड्डू के पिता ध्रुवचंद्र का कहना है कि उसने अभी तक शव को देखा तक नहीं है। न तो शव मिला था तब मैं वहां गया और न पोस्टमार्टम पर ही पहुंचा। मेरी तबियत काफी खराब है। गांव वाले ही जबरन खटिया सहित उठाकर ले गए थे। उन्होंने ही थाने के सामने रखकर जाम लगा दिया। इसके बाद बलवा शुरू हो गया। पंचनामा के समय गुड्डू का चाचा ही गया था। ऐसे में मुझे पता ही नहीं है कि शव किसका है। न ही मैंने शव को देखा है। लोगों ने जो हुलिया बताया है वह मेरे बेटे से मेल नहीं खाता है। ऐसे में वह शव मेरे बेटे का नहीं है।
यह भी कहना है कि वे पुलिस की जांच से संतुष्ट नहीं है। पुलिस ने आनन-फानन में गिरफ्तार कर आरोपी पिंटू को जेल भेज दिया। लेकिन उसके बाद उसे रिमांड पर लेकर सही प्रकार पूछताछ नहीं की। यही नहीं पुलिस ने नहर से निकाली बाइक के जो कागजात सौंपे वह बिल्कुल सूखे थे। जबकि नहर से निकालने जाने के कारण वह गीले होने चाहिए थे। वहीं जिस स्थान पर पिंटू ने शव को फेंका जाना बताया है वह सही नहीं है। इसकी भी जांच होनी चाहिए।
पैर की उंगलियों से की पहचान
गुड्डू के चाचा अलवर सिंह का कहना है कि उसने शव की पहचान पैर की उंगलियों से की थी। उसके भतीजे के पैर की उंगलियां काफी छोटी-छोटी थीं। वहीं एक हाथ पर ओम गुदा हुआ था। उक्त हाथ शव का कटा हुआ था। वहीं दांत भी नहीं थे। इसके चलते उनसे पहचान नहीं हो सकी। वहीं शव पानी में पड़ा होने के कारण काफी फूल चुका था। इसके चलते शक्ल भी पहचान नहीं आ रही थी।