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फर्जी तरीके से दुकान का किरायानामा कराया अपने नाम
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कासगंज। नगर पालिका सोरों में एक युवक ने अपने भाइयों के फर्जी शपथ लगाकर दुकान का किरायानामा अपने नाम करा लिया। कोर्ट ने मामले में कोतवाली पुलिस से सात जून तक मामले की रिपोर्ट कोर्ट में प्रस्तुत करने के आदेश जारी किए हैं।
नगर पालिका सोरों की कछला गेट पर दुकानें हैं। इन दुकानों में से दुकान संख्या 66 पर राम रक्षपाल साहू निवासी मोहल्ला कटरा सोरों किराएदार काबिज था। उनका बेटा दयाशंकर साहू भी उनके साथ बैठता था। 29 दिसंबर को रामरक्षपाल की मृत्यु हो गई। इसके बाद भी दयाशंकर दुकान पर लगातर बैठते रहे। उनके भाई राजीव ने 22 जुलाई 2014 को दुकान का आवंटन अपने नाम कराने के लिए अधिशासी अधिकारी सोंरों को शपथ पत्र दिया। इस शपथ पत्र के साथ ही राजीव ने अपने भाई जय प्रकाश साहू और संजीव कुमार साहू के फर्जी हस्ताक्षर के साथ फोटो युक्त अनापत्ति प्रमाणपत्र लगा दिए। दयाशंकर ने 12 मार्च 2018 तक दुकान का लगातार किराया जमा करता चला आ रहा था, लेकिन नगर पालिका ने 17 मार्च 2018 को बिना तथ्यों की जांच के किरायानामा बदल दिया। दयाशंकर मार्च 2019 में किराया जमा करने पहुंचा तो उसको इस बारे में जानकारी हुई। इसके बाद उसने फर्जीवाड़े की शिकायत कोतवाली पुलिस से की, लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की।
मामले में एसपी को भी शिकायत की लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। पीड़ित ने अधिवक्ता केशव मिश्रा के माध्यम से मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के न्यायालय में अपने भाई राजीव और अधिशासी अधिकारी संतकुमार सरोज के नाम से वाद दायर कर दिया। कोर्ट ने कोतवाली पुलिस को मामले की जांच कर सात जून तक कोर्ट में रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही 14 जून को बहस की तिथि निर्धारित की गई है।
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नगर पालिका सोरों की कछला गेट पर दुकानें हैं। इन दुकानों में से दुकान संख्या 66 पर राम रक्षपाल साहू निवासी मोहल्ला कटरा सोरों किराएदार काबिज था। उनका बेटा दयाशंकर साहू भी उनके साथ बैठता था। 29 दिसंबर को रामरक्षपाल की मृत्यु हो गई। इसके बाद भी दयाशंकर दुकान पर लगातर बैठते रहे। उनके भाई राजीव ने 22 जुलाई 2014 को दुकान का आवंटन अपने नाम कराने के लिए अधिशासी अधिकारी सोंरों को शपथ पत्र दिया। इस शपथ पत्र के साथ ही राजीव ने अपने भाई जय प्रकाश साहू और संजीव कुमार साहू के फर्जी हस्ताक्षर के साथ फोटो युक्त अनापत्ति प्रमाणपत्र लगा दिए। दयाशंकर ने 12 मार्च 2018 तक दुकान का लगातार किराया जमा करता चला आ रहा था, लेकिन नगर पालिका ने 17 मार्च 2018 को बिना तथ्यों की जांच के किरायानामा बदल दिया। दयाशंकर मार्च 2019 में किराया जमा करने पहुंचा तो उसको इस बारे में जानकारी हुई। इसके बाद उसने फर्जीवाड़े की शिकायत कोतवाली पुलिस से की, लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की।
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मामले में एसपी को भी शिकायत की लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। पीड़ित ने अधिवक्ता केशव मिश्रा के माध्यम से मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के न्यायालय में अपने भाई राजीव और अधिशासी अधिकारी संतकुमार सरोज के नाम से वाद दायर कर दिया। कोर्ट ने कोतवाली पुलिस को मामले की जांच कर सात जून तक कोर्ट में रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही 14 जून को बहस की तिथि निर्धारित की गई है।
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