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नवीन गुप्ता के हत्यारे को आजीवन कारावास
Updated Thu, 24 Aug 2017 12:38 AM IST
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फिरोजाबाद। साढ़े चार वर्ष पूर्व हुई नवीन गुप्ता की हत्या के मामले में न्यायालय ने आरोपी शानू उर्फ विवेक उपाध्याय को आजीवन कारावास की सजा और बीस हजार के अर्थदंड से दंडित किया है। अर्थदंड जमा नहीं करने पर एक वर्ष के अतिरिक्त सजा काटनी होगी।
थाना उत्तर क्षेत्र के अंतर्गत एसआरके कॉलेज के सामने 15 दिसंबर 2012 को बाइक टकराने को लेकर शानू उर्फ विवेक उपाध्याय व थाना नारखी के शाहपुर निवासी कर्मवीर पुत्र राधेश्याम के बीच विवाद हो गया था। इस दौरान शानू की ओर से फायरिंग हुई थी।
इसमें एक गोली कर्मवीर सिंह व वहां से पत्नी नीतू गुप्ता के साथ बाइक से जा रहे नवीन गुप्ता को गोली लग गई थी। गोली लगने से नवी गंभीर रूप से घायल हो गए थे। जिला अस्पताल में चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया था। साढ़े चार वर्ष पूर्व हुए हत्या के ही मामले की सुनवाई जिला जज पीके सिंह के न्यायालय में ही चल रही थी।
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न्यायाधीश पीके सिंह ने गवाहों आदि के बयान दर्ज किए। सरकार की ओर से पैरवी करते हुए जिला शासकीय अधिवक्ता नीरज यादव एडवोकेट ने सभी तर्कों को रखा। जिला जज पीके सिंह ने सभी पक्षों को सुनने के बाद शानू उर्फ विवेक उपाध्याय को नवीन की हत्या में दोषी मानते हुए आजीवन कारावास एवं बीस हजार से अर्थदंड से दंडित करने के आदेश दिया है, जबकि 307 के मामले में दोषमुक्त कर दिया है।
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थाना उत्तर क्षेत्र के अंतर्गत एसआरके कॉलेज के सामने 15 दिसंबर 2012 को बाइक टकराने को लेकर शानू उर्फ विवेक उपाध्याय व थाना नारखी के शाहपुर निवासी कर्मवीर पुत्र राधेश्याम के बीच विवाद हो गया था। इस दौरान शानू की ओर से फायरिंग हुई थी।
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इसमें एक गोली कर्मवीर सिंह व वहां से पत्नी नीतू गुप्ता के साथ बाइक से जा रहे नवीन गुप्ता को गोली लग गई थी। गोली लगने से नवी गंभीर रूप से घायल हो गए थे। जिला अस्पताल में चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया था। साढ़े चार वर्ष पूर्व हुए हत्या के ही मामले की सुनवाई जिला जज पीके सिंह के न्यायालय में ही चल रही थी।
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न्यायाधीश पीके सिंह ने गवाहों आदि के बयान दर्ज किए। सरकार की ओर से पैरवी करते हुए जिला शासकीय अधिवक्ता नीरज यादव एडवोकेट ने सभी तर्कों को रखा। जिला जज पीके सिंह ने सभी पक्षों को सुनने के बाद शानू उर्फ विवेक उपाध्याय को नवीन की हत्या में दोषी मानते हुए आजीवन कारावास एवं बीस हजार से अर्थदंड से दंडित करने के आदेश दिया है, जबकि 307 के मामले में दोषमुक्त कर दिया है।