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जेल से भागे तीन बंदियों का नहीं लगा सुराग
Updated Mon, 17 Jul 2017 11:17 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Amar Ujala
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मैनपुरी। होली के त्योहार पर जिला कारागार से भागे चार शातिर बदमाशों में से तीन का पांच माह बीतने के बाद भी पुलिस कोई सुराग नहीं लगा सकी है। पूर्व में एक बंदी फिरोजाबाद में समर्पण कर चुका है। बता दें कि उक्त घटनाक्रम में तत्कालीन जेलर व जेल अधीक्षक भी निलंबित हो चुके हैं।
विदित है कि 13 मार्च को जिला कारागार से आजीवन कारावास का सजायाफ्ता डॉ. राजेंद्र निवासी अल्मोड़ा उत्तराखंड, नकली नोट के मामले में सुनील कुमार गांव अटरिया थाना आटा जालौन, शामली का शूटर मुंसाफ और रेप के मामले में बंदी योगेश जेल की दीवार फांदकर भाग गए थे। जेल से बंदियो के भागने की जानकारी होने के जिला प्रशासन में हड़कंप मच गया था। तलाश के लिए पुलिस की टीमें दौड़ा दी गई थीं। मगर किसी के बारे में कोई जानकारी नहीं लग सकी थी। इस बीच करीब दो माह बाद फिरोजाबाद निवासी भागे बंदी योगेश कुमार ने न्यायालय में समर्पण कर दिया था। जिसे बाद में जिला कारागार लाकर पूछताछ की गई थी। इस दौरान शासन की जांच में तत्कालीन जेल अधीक्षक बीके सिंह व जेलर सुरेश मिश्रा को हटा दिया गया था।
इसके बाद एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप का दौर भी चला। जिसमें जिला कारागार में चल रहीं मनमानी के भी खुलासे हुए थे। घटना को करीब पांच माह का समय बीतने को है। मगर पुलिस अभी तक तीन शातिर बंदियों का कोई पता नहीं लगा सकी है।
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विदित है कि 13 मार्च को जिला कारागार से आजीवन कारावास का सजायाफ्ता डॉ. राजेंद्र निवासी अल्मोड़ा उत्तराखंड, नकली नोट के मामले में सुनील कुमार गांव अटरिया थाना आटा जालौन, शामली का शूटर मुंसाफ और रेप के मामले में बंदी योगेश जेल की दीवार फांदकर भाग गए थे। जेल से बंदियो के भागने की जानकारी होने के जिला प्रशासन में हड़कंप मच गया था। तलाश के लिए पुलिस की टीमें दौड़ा दी गई थीं। मगर किसी के बारे में कोई जानकारी नहीं लग सकी थी। इस बीच करीब दो माह बाद फिरोजाबाद निवासी भागे बंदी योगेश कुमार ने न्यायालय में समर्पण कर दिया था। जिसे बाद में जिला कारागार लाकर पूछताछ की गई थी। इस दौरान शासन की जांच में तत्कालीन जेल अधीक्षक बीके सिंह व जेलर सुरेश मिश्रा को हटा दिया गया था।
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इसके बाद एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप का दौर भी चला। जिसमें जिला कारागार में चल रहीं मनमानी के भी खुलासे हुए थे। घटना को करीब पांच माह का समय बीतने को है। मगर पुलिस अभी तक तीन शातिर बंदियों का कोई पता नहीं लगा सकी है।
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