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प्रेमी युगल के शवों का पुलिस ने कराया अंतिम संस्कार
Updated Sat, 15 Jul 2017 11:59 PM IST
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फिरोजाबाद। पांच दिन पूर्व बनकट रेलवे क्रॉसिंग के समीप ट्रेन से कटकर आत्महत्या करने वाले प्रेमी युगल के शवों का पुलिस ने शनिवार को अंतिम संस्कार करा दिया। जलेसर रोड स्थित श्मशान घाट पर प्रेमी युगल की चिताओं को श्मशान घाट पर रहने वाले शिवराम ने मुखाग्नि दी।
प्रेमी युगल के परिवारीजनों ने सब कुछ जानकारी होने के बाद भी शिनाख्त नहीं की और अंतिम बार चेहरे देखने के लिए भी अस्पताल में नहीं पहुंचे। यहां कई घंटे तक उनके इंतजार में शव रखे रहे।
बनकट रेलवे क्रासिंग के समीप 11 जुलाई की शाम को प्रेमी युगल ने ट्रेन के आगे कूदकर अपनी जान दे दी थी। युवक के हाथ पर लिखे नाम के आधार पर पुलिस ने प्रेमी युगल की शिनाख्त आसपास के ग्रामीणों के माध्यम से तो कर ली।
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जब पुलिस प्रेमी युगल की मौत की खबर उनके घर देने पहुंची तो युवक और युवती के परिवारीजनों ने मृतकों से कोई वास्ता न होने की बात कहते हुए शवों की शिनाख्त करने से मना कर दिया। पुलिस ने शवों का पोस्टमार्टम कराया।
उम्मीद जताई जा रही थी कि अंतिम वक्त शायद परिवारीजनों के दिल में ममता जागे और वह आ सकते हैं। इसलिए पुलिस ने दोपहर में ही शवों का पोस्टमार्टम कराकर अस्पताल में रखवा दिए। लेकिन कई घंटों बाद भी परिवारीजन नहीं आए तो रेहड़ी चालक मुन्नालाल से शवों को श्मशान घाट तक पहुंचवाकर वहां रहने वाले शिवराम से उनकी चिताओं को मुखाग्नि दिलवा दी।
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प्रेमी युगल के परिवारीजनों ने सब कुछ जानकारी होने के बाद भी शिनाख्त नहीं की और अंतिम बार चेहरे देखने के लिए भी अस्पताल में नहीं पहुंचे। यहां कई घंटे तक उनके इंतजार में शव रखे रहे।
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बनकट रेलवे क्रासिंग के समीप 11 जुलाई की शाम को प्रेमी युगल ने ट्रेन के आगे कूदकर अपनी जान दे दी थी। युवक के हाथ पर लिखे नाम के आधार पर पुलिस ने प्रेमी युगल की शिनाख्त आसपास के ग्रामीणों के माध्यम से तो कर ली।
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जब पुलिस प्रेमी युगल की मौत की खबर उनके घर देने पहुंची तो युवक और युवती के परिवारीजनों ने मृतकों से कोई वास्ता न होने की बात कहते हुए शवों की शिनाख्त करने से मना कर दिया। पुलिस ने शवों का पोस्टमार्टम कराया।
उम्मीद जताई जा रही थी कि अंतिम वक्त शायद परिवारीजनों के दिल में ममता जागे और वह आ सकते हैं। इसलिए पुलिस ने दोपहर में ही शवों का पोस्टमार्टम कराकर अस्पताल में रखवा दिए। लेकिन कई घंटों बाद भी परिवारीजन नहीं आए तो रेहड़ी चालक मुन्नालाल से शवों को श्मशान घाट तक पहुंचवाकर वहां रहने वाले शिवराम से उनकी चिताओं को मुखाग्नि दिलवा दी।