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पादरी पुत्र के अपहर्ताओं को दस साल का कारावास
पादरी पुत्र के अपहर्ताओं को दस साल का कारावास
Updated Thu, 24 Nov 2016 11:42 PM IST
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अपर जिला जज भूपेंद्र राय ने 14 साल पुराने पादरी आइजिक मन के बेटे आशीष मन के अपहरण कांड में दो अपहर्ताओं को दोषी पाते हुए 10-10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही 34 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। जुर्माना नहीं भरने पर दस माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
23 मई 2002 को थाना हरीपर्वत में तत्कालीन एसएसपी विजय कुमार मौर्य ने रिपोर्ट दर्ज कराई कि पादरी आइजिक मन ने उनके गोपनीय कार्यालय में आकर सूचना दी कि उनके बेटे आशीष का अपहरण कर लिया गया है और सात लाख रुपये की फिरौती मांग रहे हैं। फिरौती की रकम गोकुलम पार्क सिकंदरा में देने की बात बताई। इस पर एसएसपी ने अपहृत को बरामद करने के लिए दो पुलिस पार्टियों का गठन किया। पहली पार्टी में एसएसपी और दूसरी में सीओ हरीपर्वत जगदीश शर्मा थे। कई थानों की फोर्स के साथ पादरी को लेकर वह गोकुलम वाटर पार्क पहुंचे मगर अपहर्ता तीन घंटे के इंतजार के बाद भी नहीं आए। उन्होंने फोन करके पादरी को ट्रांसपोर्ट नगर के मोड़ पर शाम सात बजे बुलाया।
दूसरे स्थान पर भी पुलिस ने घेराबंदी कर ली। तभी मारुति कार में आए बदमाशों ने बैग लिए खड़े पादरी को भी कार में डाल लिया। पुलिस ने उन्हें घेरा तो उन्होंने फायरिंग कर दी। इसमें एसओ बीएस त्यागी समेत कई पुलिसकर्मियों को छर्रे व गोली लगीं। पुलिस ने तीन अपहर्ताओं को दबोच लिया। इनमें फीरोजाबाद के नगला अंचल निवासी शेर सिंह और कौरारा बुजुर्ग जसराना के आशू उर्फ अनामी और दिनेश निवासी मैनपुरी शामिल थे। अपहर्ताओं की निशानदेही पर आशीष को कालिंदी विहार के मकान से मुक्त करा लिया। दिनेश की मुकदमे के विचारण के दौरान मृत्यु हो गई। शेर सिंह और अनामी को दोषी पाते हुए सजा सुनाई गई। अभियोजन की पैरवी एडीजीसी राजकुमार गौरव ने की।
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पुलिस को नहीं मिला बहादुरी का सम्मान
आगरा। आशीष मन को अपहर्ताओं के साथ मुठभेड़ में छुड़ाया गया था। दोनों ओर से गोली चली थी। पुलिसवाले घायल भी हुए थे। इसके बावजूद शासन ने पुलिस टीम को ईनाम नहीं दिया था। मुठभेड़ में तत्कालीन एसएसपी बीके मौर्य, सीओ जगदीश शर्मा, एसएचओ हरीपर्वत थाना बीएस त्यागी शामिल रहे थे। बीएस त्यागी इस समय छत्ता में सीओ हैं। उन्हें आज भी पूरा घटनाक्रम याद है। पूछे जाने पर उन्होंने बताया कि बदमाशों ने ऐन वक्त पर प्लान बदल दिया था। इस पर पुलिस को काफी मशक्कत करनी पड़ी थी।
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23 मई 2002 को थाना हरीपर्वत में तत्कालीन एसएसपी विजय कुमार मौर्य ने रिपोर्ट दर्ज कराई कि पादरी आइजिक मन ने उनके गोपनीय कार्यालय में आकर सूचना दी कि उनके बेटे आशीष का अपहरण कर लिया गया है और सात लाख रुपये की फिरौती मांग रहे हैं। फिरौती की रकम गोकुलम पार्क सिकंदरा में देने की बात बताई। इस पर एसएसपी ने अपहृत को बरामद करने के लिए दो पुलिस पार्टियों का गठन किया। पहली पार्टी में एसएसपी और दूसरी में सीओ हरीपर्वत जगदीश शर्मा थे। कई थानों की फोर्स के साथ पादरी को लेकर वह गोकुलम वाटर पार्क पहुंचे मगर अपहर्ता तीन घंटे के इंतजार के बाद भी नहीं आए। उन्होंने फोन करके पादरी को ट्रांसपोर्ट नगर के मोड़ पर शाम सात बजे बुलाया।
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दूसरे स्थान पर भी पुलिस ने घेराबंदी कर ली। तभी मारुति कार में आए बदमाशों ने बैग लिए खड़े पादरी को भी कार में डाल लिया। पुलिस ने उन्हें घेरा तो उन्होंने फायरिंग कर दी। इसमें एसओ बीएस त्यागी समेत कई पुलिसकर्मियों को छर्रे व गोली लगीं। पुलिस ने तीन अपहर्ताओं को दबोच लिया। इनमें फीरोजाबाद के नगला अंचल निवासी शेर सिंह और कौरारा बुजुर्ग जसराना के आशू उर्फ अनामी और दिनेश निवासी मैनपुरी शामिल थे। अपहर्ताओं की निशानदेही पर आशीष को कालिंदी विहार के मकान से मुक्त करा लिया। दिनेश की मुकदमे के विचारण के दौरान मृत्यु हो गई। शेर सिंह और अनामी को दोषी पाते हुए सजा सुनाई गई। अभियोजन की पैरवी एडीजीसी राजकुमार गौरव ने की।
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पुलिस को नहीं मिला बहादुरी का सम्मान
आगरा। आशीष मन को अपहर्ताओं के साथ मुठभेड़ में छुड़ाया गया था। दोनों ओर से गोली चली थी। पुलिसवाले घायल भी हुए थे। इसके बावजूद शासन ने पुलिस टीम को ईनाम नहीं दिया था। मुठभेड़ में तत्कालीन एसएसपी बीके मौर्य, सीओ जगदीश शर्मा, एसएचओ हरीपर्वत थाना बीएस त्यागी शामिल रहे थे। बीएस त्यागी इस समय छत्ता में सीओ हैं। उन्हें आज भी पूरा घटनाक्रम याद है। पूछे जाने पर उन्होंने बताया कि बदमाशों ने ऐन वक्त पर प्लान बदल दिया था। इस पर पुलिस को काफी मशक्कत करनी पड़ी थी।