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महीनों चली जांच फिर भी शातिर नहीं आया हाथ
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मैनपुरी। गांव कमलपुर निवासी एक युवक से साइबर ठगी के मामले में 11 महीने चली जांच के बाद भी पुलिस के हाथ शातिर तक नहीं पहुंच सके। आगरा साइबर सैल ने जांच रिपोर्ट जनपद की साइबर सैल को अग्रिम कार्रवाई के लिए भेजी है। जिस पर टीम जांच में जुटी है।
थाना भोगांव क्षेत्र के गांव कमलपुर निवासी रिषभ मिश्रा ने अप्रैल माह में ऑनलाइन एक पेट्रोल पंप के लिए आवेदन किया था। इस दौरान वह साइबर ठगों का शिकार हो गए। शातिरों ने पेट्रोल पंप दिलाने के नाम पर उनसे कई औपचारिकताएं पूरी करने के लिए कहा। उनके सभी दस्तावेज ऑनलाइन लिए गए, इसके साथ ही कई बार में करीब साढ़े नौ लाख रुपये अलग-अलग खातों में डलवा लिए गए। रिषभ इसके बाद भी जब रुपये की मांग की गई तो शक हुआ। जानकारी करने पर पता चला कि जो लोग उसे पेट्रोल पंप दिलाने का दावा कर रहे हैं, उनका कंपनी से कोई लेना देना नहीं है।
ऑनलाइन ठगी के इस मामले को लेकर 25 अप्रैल 2019 को आगरा कमिश्नरी में शिकायत दी। इसके बाद मामले में साइबर सैल ने जांच शुरू की। करीब 11 महीने तक चली इस जांच के नतीजे भी सामने आए। उन खातों के बारे में जानकारी हासिल की गई, जिनमें रुपया ट्रांसफर किया गया था, लेकिन कोई भी शातिर पुलिस की गिरफ्त में नहीं आ सका। जांच की रिपोर्ट अब मैनपुरी साइबर सैल को अग्रिम कार्रवाई के लिए उपलब्ध कराई गई है। टीम अब आगे की जांच पड़ताल जारी रखे हुए है।
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महाराष्ट्र और बिहार से निकाले गए रुपये
आगरा कमिश्नरी में शिकायत के बाद साइबर सेल की जांच में कई अलग-अलग खाते सामने आए। जब इनकी जानकारी ली गई तो अधिकतर खाते महाराष्ट्र व बिहार से संचालित हो रहे थे। जमा किया गया रुपया भी वहीं से निकाला गया, लेकिन रुपया किसने निकाला और वह कहां है, इसके बारे में कोई जानकारी नहीं हो सकी।
साइबर ठगी के मामलों में जांच रिपोर्ट आने के बाद टीमें आगे की कार्रवाई कर रही हैं। शातिरों तक पहुंचने और उन्हें पकडने के प्रयास जारी हैं।
ओमप्रकाश सिंह, एएसपी
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थाना भोगांव क्षेत्र के गांव कमलपुर निवासी रिषभ मिश्रा ने अप्रैल माह में ऑनलाइन एक पेट्रोल पंप के लिए आवेदन किया था। इस दौरान वह साइबर ठगों का शिकार हो गए। शातिरों ने पेट्रोल पंप दिलाने के नाम पर उनसे कई औपचारिकताएं पूरी करने के लिए कहा। उनके सभी दस्तावेज ऑनलाइन लिए गए, इसके साथ ही कई बार में करीब साढ़े नौ लाख रुपये अलग-अलग खातों में डलवा लिए गए। रिषभ इसके बाद भी जब रुपये की मांग की गई तो शक हुआ। जानकारी करने पर पता चला कि जो लोग उसे पेट्रोल पंप दिलाने का दावा कर रहे हैं, उनका कंपनी से कोई लेना देना नहीं है।
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ऑनलाइन ठगी के इस मामले को लेकर 25 अप्रैल 2019 को आगरा कमिश्नरी में शिकायत दी। इसके बाद मामले में साइबर सैल ने जांच शुरू की। करीब 11 महीने तक चली इस जांच के नतीजे भी सामने आए। उन खातों के बारे में जानकारी हासिल की गई, जिनमें रुपया ट्रांसफर किया गया था, लेकिन कोई भी शातिर पुलिस की गिरफ्त में नहीं आ सका। जांच की रिपोर्ट अब मैनपुरी साइबर सैल को अग्रिम कार्रवाई के लिए उपलब्ध कराई गई है। टीम अब आगे की जांच पड़ताल जारी रखे हुए है।
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महाराष्ट्र और बिहार से निकाले गए रुपये
आगरा कमिश्नरी में शिकायत के बाद साइबर सेल की जांच में कई अलग-अलग खाते सामने आए। जब इनकी जानकारी ली गई तो अधिकतर खाते महाराष्ट्र व बिहार से संचालित हो रहे थे। जमा किया गया रुपया भी वहीं से निकाला गया, लेकिन रुपया किसने निकाला और वह कहां है, इसके बारे में कोई जानकारी नहीं हो सकी।
साइबर ठगी के मामलों में जांच रिपोर्ट आने के बाद टीमें आगे की कार्रवाई कर रही हैं। शातिरों तक पहुंचने और उन्हें पकडने के प्रयास जारी हैं।
ओमप्रकाश सिंह, एएसपी