{"_id":"5f4a969b8ebc3e0bfd499a1f","slug":"crime-capital-mainpuri-small-industries-in-mainpuri-small-industries-mainpuri-news-agr45684092","type":"story","status":"publish","title_hn":"उद्योगों को सरकार से मदद का इंतजार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
उद्योगों को सरकार से मदद का इंतजार
विज्ञापन
मैनपुरी। एक ओर जहां सरकारें रोजगार दिलाने के लिए उद्योगों केे बढ़ावा देने की बात करती हैं, वहीं दूसरी ओर जिले में उद्योग समाप्त होने के कगार पर हैं। पहले ही बड़ी संख्या में उद्योग बंद हो चुके हैं। अब कई पर ताला लगने की कगार पर हैं। अब उन्हें सरकार से संजीवनी रूपी मदद का इंतजार है।
प्रदेश में सरकारें तो बदलती रहीं, लेकिन उद्योगों का हाल बेहाल ही रहा। न तो सरकार ऐसा कोई उद्योग स्थापित करा पाई, जिससे जिले के युवाओं को रोजगार मिलता और न ही संचालित उद्योगों की मदद की गई। ऐसे में ये उद्योग भी अब आखिरी सांसें गिन रहे हैं। जिले में वर्ष 2005 में 84 धान मिल संचालित थीं। इनमें से पांच वर्ष में ही यानी 2010 तक 40 मिलें बंद हो गईं। इनमें काम करने वाले सैकड़ों कामगार बेरोजगार हो गए।
वर्ष 2010 से लेकर अब तक 35 मिलों में और ताला पड़ गया। वर्तमान में सिर्फ नौ धान मिलें ही संचालित हो रही हैं। कोरोना संक्रमण काल के चलते इनमें भी संकट के बादल मंडरा रहे हैं। जिले की फ्लोर मिलों का हाल भी ऐसा ही है। जिले में बीते पांच वर्षों में जिले में संचालित 19 फ्लोर मिल में से पांच बंद हो गई हैं।
विज्ञापन
बैंकें भी नहीं दे रहीं साथ
सरकार ने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री रोजगार सृजन योजना के तहत लघु उद्योग की स्थापना कराने की शुरुआत की है, लेकिन इनमें बैंक रोड़ा अटका रही हैं। पहले तो आवेदन समिति द्वारा ही स्वीकृत नहीं किए जाते हैं, अगर स्वीकृति मिल भी जाए तो बैंक इस पर ऋण नहीं देती हैं।
संचालित उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए कोई भी योजना नहीं है। वहीं मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री रोजगार सृजन योजना के तहत स्वीकृत पत्रावाली बैंक को भेजी जा रही हैं। बैंक सहयोग करें तो इसमें सुधार हो सकता है।
मोहम्मद सऊद, महाप्रबंधक जिला उद्योग केंद्र।
विज्ञापन
प्रदेश में सरकारें तो बदलती रहीं, लेकिन उद्योगों का हाल बेहाल ही रहा। न तो सरकार ऐसा कोई उद्योग स्थापित करा पाई, जिससे जिले के युवाओं को रोजगार मिलता और न ही संचालित उद्योगों की मदद की गई। ऐसे में ये उद्योग भी अब आखिरी सांसें गिन रहे हैं। जिले में वर्ष 2005 में 84 धान मिल संचालित थीं। इनमें से पांच वर्ष में ही यानी 2010 तक 40 मिलें बंद हो गईं। इनमें काम करने वाले सैकड़ों कामगार बेरोजगार हो गए।
विज्ञापन
वर्ष 2010 से लेकर अब तक 35 मिलों में और ताला पड़ गया। वर्तमान में सिर्फ नौ धान मिलें ही संचालित हो रही हैं। कोरोना संक्रमण काल के चलते इनमें भी संकट के बादल मंडरा रहे हैं। जिले की फ्लोर मिलों का हाल भी ऐसा ही है। जिले में बीते पांच वर्षों में जिले में संचालित 19 फ्लोर मिल में से पांच बंद हो गई हैं।
विज्ञापन
बैंकें भी नहीं दे रहीं साथ
सरकार ने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री रोजगार सृजन योजना के तहत लघु उद्योग की स्थापना कराने की शुरुआत की है, लेकिन इनमें बैंक रोड़ा अटका रही हैं। पहले तो आवेदन समिति द्वारा ही स्वीकृत नहीं किए जाते हैं, अगर स्वीकृति मिल भी जाए तो बैंक इस पर ऋण नहीं देती हैं।
संचालित उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए कोई भी योजना नहीं है। वहीं मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री रोजगार सृजन योजना के तहत स्वीकृत पत्रावाली बैंक को भेजी जा रही हैं। बैंक सहयोग करें तो इसमें सुधार हो सकता है।
मोहम्मद सऊद, महाप्रबंधक जिला उद्योग केंद्र।