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'योगीराज' में गायों की ऐसी हालत, कूड़े के ढेर में निवाला तलाश रहे गोवंश, पेट से निकलती है पॉलिथिन
Wed, 11 Sep 2019 12:12 AM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Wed, 11 Sep 2019 12:12 AM IST
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बंगाली घाट स्थित ढेर में कचरा खाती गाय
- फोटो : अमर उजाला
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कान्हा की नगरी में गाय भूखी-प्यासी हैं। कूड़े के ढेर में भोजन तलाशते-तलाशते पॉलिथीन भी उनके पेट में जा रहा। अभी तक कई गायों का ऑपरेशन करके उनके पेट से पॉलिथीन निकाली भी जा चुकी है।
किसी गाय के पेट से दस किलो पालिथीन निकाली गई थी तो किसी के पेट से पांच किलो। यहां गोशालाएं तो खुल गईं लेकिन वहां चारे का बंदोबस्त नहीं है। झुलसा देने वाली गर्मी में भी गाय खुले आसमान के नीचे बंधी रहती हैं। अब गो भक्त मोदी जी से मांग कर रहे हैं कि गायों के लिए कुछ इंतजाम किया जाए।
मथुरा जिले में अगर गोवंश की बात की जाए तो 2 लाख 45 हजार है। जबकि पंजीकृत गोशालाओं की संख्या 31 है और अपंजीकृत गोशालाएं भी 100 से ज्यादा होंगी। शासन स्तर से पंजीकृत गोशालाओं को 30 रुपये प्रतिगाय के हिसाब से दिया जा रहा है, जबकि एक वक्त का चारा ही 150 रुपये से भी ज्यादा बैठ रहा।
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किसी गाय के पेट से दस किलो पालिथीन निकाली गई थी तो किसी के पेट से पांच किलो। यहां गोशालाएं तो खुल गईं लेकिन वहां चारे का बंदोबस्त नहीं है। झुलसा देने वाली गर्मी में भी गाय खुले आसमान के नीचे बंधी रहती हैं। अब गो भक्त मोदी जी से मांग कर रहे हैं कि गायों के लिए कुछ इंतजाम किया जाए।
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मथुरा जिले में अगर गोवंश की बात की जाए तो 2 लाख 45 हजार है। जबकि पंजीकृत गोशालाओं की संख्या 31 है और अपंजीकृत गोशालाएं भी 100 से ज्यादा होंगी। शासन स्तर से पंजीकृत गोशालाओं को 30 रुपये प्रतिगाय के हिसाब से दिया जा रहा है, जबकि एक वक्त का चारा ही 150 रुपये से भी ज्यादा बैठ रहा।
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पिछले दिनों जब खुले घूम रहे गोवंश खेतों की तरफ बढ़ा तो सरकार में गांवों में अस्थायी गो आश्रय स्थल खोल दिए। इनका संचालन पंचायतों के माध्यम से किया जा रहा है। लेकिन यहां भी हालात कुछ अच्छे नहीं हैं। तमाम जगह बीमार होने से गायों की मौत हो रही है।
पिछले एक साल के भीतर 500 से भी ज्यादा गायों की मौत हो चुकी है। मांट के गांव ऊधर में स्थिति गोशाला में एक महीने के भीतर करीब 24 गायों की मौत हो गई है।
गोशाला के संचालक मुकेश कुमार ने बताया कि गायें बीमार हो रही हैं। गोवर्धन में स्थित गोशाला में भी कई गायों की मौत बीमारी के कारण हो गई थी। अधिकांश गोशालाओं की स्थिति यही है। लेकिन सरकार का ध्यान इन गायों की दुर्दशा की तरफ नहीं जा रहा है। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डा. भूदेव सिंह ने बताया कि जहां भी बीमार गायों के बारे में जानकारी मिल रही है वहां टीम भेजी जा रही है।
पिछले एक साल के भीतर 500 से भी ज्यादा गायों की मौत हो चुकी है। मांट के गांव ऊधर में स्थिति गोशाला में एक महीने के भीतर करीब 24 गायों की मौत हो गई है।
गोशाला के संचालक मुकेश कुमार ने बताया कि गायें बीमार हो रही हैं। गोवर्धन में स्थित गोशाला में भी कई गायों की मौत बीमारी के कारण हो गई थी। अधिकांश गोशालाओं की स्थिति यही है। लेकिन सरकार का ध्यान इन गायों की दुर्दशा की तरफ नहीं जा रहा है। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डा. भूदेव सिंह ने बताया कि जहां भी बीमार गायों के बारे में जानकारी मिल रही है वहां टीम भेजी जा रही है।