संकट के सिपाही: चचेरे भाई की मौत, लेकिन ड्यूटी पर तैनात रहे सेनेटरी इंस्पेक्टर
सेनेटरी इंस्पेक्टर संक्रमण से खुद और परिवार के ठीक होने के बाद हर दिन 400 से ज्यादा संक्रमितों के घर पर सैनिटाइजेशन का जिम्मा उठा रहे हैं।
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आगरा में कोरोना संक्रमितों के घर पर हर दिन सैनिटाइजेशन और संक्रमितों का कचरा अलग से लेने की व्यवस्था में नगर निगम के कोरोना योद्धा लगे हुए हैं। इनमें से एक हैं नगर निगम के सेनेटरी इंस्पेक्टर संजीव यादव, जो खुद कोरोना संक्रमित होने के बाद ठीक होकर फिर से सैनिटाइजेशन की जिम्मेदारी निभाने के लिए जुट गए। उनके संक्रमित होने के बाद पूरा परिवार मां-पिता, दो बच्चे और पत्नी के संक्रमित होने के बाद भी उनका हौसला कम नहीं हुआ।
सेनेटरी इंस्पेक्टर संक्रमण से खुद और परिवार के ठीक होने के बाद हर दिन 400 से ज्यादा संक्रमितों के घर पर सैनिटाइजेशन का जिम्मा उठा रहे हैं। महज 15 दिन पहले आगरा के यमुनापार स्थित अस्पताल में भर्ती कोरोना संक्रमित उनके चचेरे भाई की मृत्यु हो गई, लेकिन वह ड्यूटी पर तैनात रहे। उन्होंने बताया कि बच्चों से घर पर भी दूरी बना रखी है। खुद को सैनिटाइज करने और नहाने के बाद ही परिवार के सदस्यों से मिलता हूं।
पीपीई किट पहनकर 42 डिग्री में सैनिटाइज कर रहे दामोदर
नगर निगम के सफाई कर्मचारी दामोदर पर भी सैनिटाइजेशन की जिम्मेदारी है। कोरोना संक्रमित लोगों के घरों में सैनिटाइजेशन के लिए पहुंचते हैं। उन्होंने बताया कि सबसे ज्यादा मुश्किल पीपीई किट पहनकर 42 डिग्री तापमान में काम करने की है। पीपीई किट पहनकर लगातार 5 से 6 घंटे तक काम करते हैं।
संक्रमण को फैलने से रोकना जरूरी है। सुबह ड्यूटी पर आते वक्त केवल यही ख्याल रहता है कि कोरोना किसी और के घर न पहुंचे। घर परिवार के सदस्य भी संक्रमितों से दूरी बनाकर रखते हैं, पर हम अपनी जिम्मेदारियों को समझकर काम पर लगे हैं ताकि कोई और इस बीमारी की चपेट में न आए।
परिवार को छोड़ संक्रमण पर काबू करने में लगे एहसान
आवास विकास कॉलोनी में तैनात नगर निगम कर्मचारी एहसान पर भी कोरोना संक्रमितों के घर पर सैनिटाइजेशन की जिम्मेदारी है। एहसान ने अपने परिवार से दूरी बना ली है। सुबह वह परिवार के लोगों के जागने से पहले ही सैनिटाइजेशन के लिए ऑफिस आ जाते हैं।
शाम को घर पहुंचने पर भी परिवार के सदस्यों से दूरी बनाए रखते हैं। दिन में दो बार नहाने की एहतियात बरत रहे हैं। एहसान ने बताया कि वह जिन घरों में जाते हैं, नकारात्मक बातों की जगह सभी को बताते हैं कि कितने लोग स्वस्थ हो गए और अब उनको कितने कम घरों में जाना पड़ता है।