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जमीन के 327 मुकदमों की लटकी सुनवाई
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मैनपुरी। अंतिम नोटिस के बाद भी अदालत में गवाही नहीं होने पर जमीन के 327 मुकदमों की सुनवाई लंबित है। इन मुकदमों में लंबे समय से गवाही नहीं होने के कारण गवाहों को अंतिम नोटिस जारी किए गए थे।
जमीन पर स्वामित्व और कब्जे के विवाद को लेकर दीवानी अदालत में दायर किए जाने वाले मुकदमों में स्वमित्व और कब्जा गवाही के आधार पर ही तय किया जाता है। अदालतों में लंबित चल रहे मुकदमों में 327 मुकदमों में लंबे समय से गवाही नहीं हो पा रही है। चिह्नित किए गए मुकदमों में अंतिम नोटिस के बाद भी तय तारीख पर गवाहों ने गवाही नहीं दी। इसके चलते मुकदमों को निस्तारित करने के लिए गवाही की प्रक्रिया को समाप्त करने की प्रक्रिया शुरू की गई है। प्रक्रिया समाप्त होने से स्वामित्व और कब्जे का मालिकाना हक भी तय नहीं हो पाएगा।
केस-एक
तहसील करहल के बरनाहल निवासी सोबरन सिंह ने जमीन के स्वामित्व को लेकर वर्ष 2014 में सिविल अदालत में मुकदमा दायर किया। दूसरा पक्ष तय तारीखों पर दो साल से अपने पक्ष की गवाही नहीं दे रहा है। गवाही के लिए दिए गए अंतिम नोटिस के बाद गवाही नहीं होने पर गवाही की प्रक्रिया रोकने की कार्रवाई शुरू की गई है।
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केस-दो
तहसील भोगांव के नवीगंज निवासी रामेश्वर दयाल ने जमीन पर कब्जा रोकने के लिए वर्ष 2016 में सिविल अदालत में मुकदमा दायर किया। दूसरा पक्ष लगातार तय तारीख पर हाजिर हो रहा है। दो साल से रामेश्वर दयाल अपने पक्ष की गवाही नहीं दे रहे हैं। अंतिम नोटिस के बाद भी गवाही नहीं देने पर कनकी गवाही की प्रक्रिया रोक दी गई है।
जमीन के मुकदमों को लंबित करने के लिए दोनों ही पक्ष गवाही देने के लिए मुकदमे को लटकाते हैं। मुकदमे का निस्तारण नहीं होने से दूसरे पक्ष की धन और समय की बरबादी होती है। तय तारीख पर गवाही नहीं देने वाले गवाहों पर कार्रवाई होनी चाहिए। गवाही की प्रक्रिया समाप्त होने से मुकदमे का शीघ्र निस्तारण हो सकेगा। - उस्मान अली, पूर्व डीजीसी सिविल
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जमीन पर स्वामित्व और कब्जे के विवाद को लेकर दीवानी अदालत में दायर किए जाने वाले मुकदमों में स्वमित्व और कब्जा गवाही के आधार पर ही तय किया जाता है। अदालतों में लंबित चल रहे मुकदमों में 327 मुकदमों में लंबे समय से गवाही नहीं हो पा रही है। चिह्नित किए गए मुकदमों में अंतिम नोटिस के बाद भी तय तारीख पर गवाहों ने गवाही नहीं दी। इसके चलते मुकदमों को निस्तारित करने के लिए गवाही की प्रक्रिया को समाप्त करने की प्रक्रिया शुरू की गई है। प्रक्रिया समाप्त होने से स्वामित्व और कब्जे का मालिकाना हक भी तय नहीं हो पाएगा।
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केस-एक
तहसील करहल के बरनाहल निवासी सोबरन सिंह ने जमीन के स्वामित्व को लेकर वर्ष 2014 में सिविल अदालत में मुकदमा दायर किया। दूसरा पक्ष तय तारीखों पर दो साल से अपने पक्ष की गवाही नहीं दे रहा है। गवाही के लिए दिए गए अंतिम नोटिस के बाद गवाही नहीं होने पर गवाही की प्रक्रिया रोकने की कार्रवाई शुरू की गई है।
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केस-दो
तहसील भोगांव के नवीगंज निवासी रामेश्वर दयाल ने जमीन पर कब्जा रोकने के लिए वर्ष 2016 में सिविल अदालत में मुकदमा दायर किया। दूसरा पक्ष लगातार तय तारीख पर हाजिर हो रहा है। दो साल से रामेश्वर दयाल अपने पक्ष की गवाही नहीं दे रहे हैं। अंतिम नोटिस के बाद भी गवाही नहीं देने पर कनकी गवाही की प्रक्रिया रोक दी गई है।
जमीन के मुकदमों को लंबित करने के लिए दोनों ही पक्ष गवाही देने के लिए मुकदमे को लटकाते हैं। मुकदमे का निस्तारण नहीं होने से दूसरे पक्ष की धन और समय की बरबादी होती है। तय तारीख पर गवाही नहीं देने वाले गवाहों पर कार्रवाई होनी चाहिए। गवाही की प्रक्रिया समाप्त होने से मुकदमे का शीघ्र निस्तारण हो सकेगा। - उस्मान अली, पूर्व डीजीसी सिविल