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दोपहर में पकड़ा, शाम को गिरफ्तारी: पुलिस की कहानी अदालत में ढेर, फर्जी काॅल सेंटर के दो आरोपियों को जमानत
Sat, 31 Oct 2026 06:27 PM IST
Arun Parashar
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
Published by: Arun Parashar
Updated Sat, 31 Oct 2026 06:27 PM IST
सार
पुलिस ने आरोपियों की गिरफ्तारी और जांच का समय शाम 6 बजे से रात 11 बजे तक का दर्शाया है, जबकि दोनों को दोपहर दो बजे ही गिरफ्तार कर लिया गया था। अधिवक्ता ने कॉल सेंटर में लगे सीसीटीवी फुटेज भी अदालत में प्रस्तुत किए गए। इसके बाद कोर्ट ने दोनों आरोपियों को जमानत दे दी।
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कोर्ट
- फोटो : ANI
विस्तार
आरोपियों को दोपहर में पकड़कर शाम को गिरफ्तारी दिखाना पुलिस को भारी पड़ गया। आरोपियों के अधिवक्ता ने सीसीटीवी की रिकॉर्डिंग न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत कर दी। न्यायालय ने फर्जी कॉल सेंटर संचालित करने के दोनों आरोपियों की जमानत याचिका स्वीकार कर ली। सीजेएम शारिब अली ने दोनों को 20-20 हजार के दो जमानत और इतनी ही राशि के व्यक्तिगत बंधपत्र प्रस्तुत करने पर रिहाई के आदेश दिए।
थाना साइबर क्राइम में निरीक्षक श्याम सिंह ने 21 अक्तूबर को प्राथमिकी दर्ज कराई थी। बताया था कि शाम 18:55 पर दरोगा प्रशांत कुमार ने दूरसंचार कार्यालय के अधिकारियों और पुलिस टीम के साथ जगदीशपुरा में आवास विकास कॉलोनी सेक्टर-12 के सत्यम प्लाजा स्थित वीवी इंटर प्राइजेज पर छापा मारा था। कॉल सेंटर में साइबर अपराध और लोगों के निजी डाटा का दुरुपयोग करने के आरोप में मौके से आमिर सैफी और मनीष को गिरफ्तार किया था। कॉल सेंटर से आठ सिम बॉक्स और 281 सिम बरामद की गई थीं। आईटी एक्ट और दूर संचार अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर 22 अक्तूबर को दोनों को अदालत में पेश किया गया था।
कोर्ट ने दोनों आरोपियों को 3 नवंबर तक न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेजने के आदेश दिए थे। मामले में जमानत पर सुनवाई के दौरान आरोपियों के अधिवक्ता ने तर्क दिए कि मौके से अपराध से संबंधित कोई वस्तु बरामद नहीं हुई है। फर्म विधिक रूप से वैध है। उन्होंने अदालत में प्रपत्र भी प्रस्तुत किए। कहा कि आरोपी फर्म में नौकरी करते हैं। पुलिस ने गिरफ्तारी और जांच का समय शाम 6 बजे से रात 11 बजे तक का दर्शाया है, जबकि दोनों को दोपहर दो बजे ही गिरफ्तार कर लिया गया था। अधिवक्ता ने कॉल सेंटर में लगे सीसीटीवी फुटेज भी अदालत में प्रस्तुत किए गए। इसके बाद सीजेएम ने आरोपियों का कोई पूर्व आपराधिक इतिहास नहीं होने और मामला मजिस्ट्रेट ट्रायल का होने के आधार पर जमानत स्वीकृत कर ली।
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थाना साइबर क्राइम में निरीक्षक श्याम सिंह ने 21 अक्तूबर को प्राथमिकी दर्ज कराई थी। बताया था कि शाम 18:55 पर दरोगा प्रशांत कुमार ने दूरसंचार कार्यालय के अधिकारियों और पुलिस टीम के साथ जगदीशपुरा में आवास विकास कॉलोनी सेक्टर-12 के सत्यम प्लाजा स्थित वीवी इंटर प्राइजेज पर छापा मारा था। कॉल सेंटर में साइबर अपराध और लोगों के निजी डाटा का दुरुपयोग करने के आरोप में मौके से आमिर सैफी और मनीष को गिरफ्तार किया था। कॉल सेंटर से आठ सिम बॉक्स और 281 सिम बरामद की गई थीं। आईटी एक्ट और दूर संचार अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर 22 अक्तूबर को दोनों को अदालत में पेश किया गया था।
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कोर्ट ने दोनों आरोपियों को 3 नवंबर तक न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेजने के आदेश दिए थे। मामले में जमानत पर सुनवाई के दौरान आरोपियों के अधिवक्ता ने तर्क दिए कि मौके से अपराध से संबंधित कोई वस्तु बरामद नहीं हुई है। फर्म विधिक रूप से वैध है। उन्होंने अदालत में प्रपत्र भी प्रस्तुत किए। कहा कि आरोपी फर्म में नौकरी करते हैं। पुलिस ने गिरफ्तारी और जांच का समय शाम 6 बजे से रात 11 बजे तक का दर्शाया है, जबकि दोनों को दोपहर दो बजे ही गिरफ्तार कर लिया गया था। अधिवक्ता ने कॉल सेंटर में लगे सीसीटीवी फुटेज भी अदालत में प्रस्तुत किए गए। इसके बाद सीजेएम ने आरोपियों का कोई पूर्व आपराधिक इतिहास नहीं होने और मामला मजिस्ट्रेट ट्रायल का होने के आधार पर जमानत स्वीकृत कर ली।
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