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आगरा: एफआईआर होने पर पार्षदों ने किया नगर निगम सदन में हंगामा, स्थगित

Fri, 18 Oct 2019 08:17 PM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: मुकेश कुमार Updated Fri, 18 Oct 2019 08:17 PM IST
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Councilors created ruckus in the Municipal Corporation House in agra
नगर निगम सदन में मेयर और पार्षद - फोटो : अमर उजाला
आगरा में शुक्रवार को नगर निगम सदन के 12 वें अधिवेशन में जमकर हंगामा हुआ। ठेकेदार फर्म को ब्लैक लिस्ट करने की मांग पर अड़े पार्षदों ने सदन में एत्माद्दौला पुलिस के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित कराया। सदन में पुलिस और ठेकेदार के खिलाफ मुर्दाबाद के नारे गूंजे। मेयर ने पार्किंग ठेकेदार को नोटिस जारी करने के बाद कार्रवाई के लिए कहा, लेकिन पार्षदों ने हंगामे के बाद सदन स्थगित करा दिया।
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शुक्रवार दोपहर 3 बजे जब नगर निगम सदन का 12 वां अधिवेशन शुरू हुआ तो पार्षद रवि बिहारी माथुर ने दो अक्तूबर से शुरू हुए स्वच्छता अभियान में पार्षदों को जिम्मेदारी देने पर मेयर नवीन जैन का अभिनंदन किया। सदन की कार्रवाई जैसे ही शुरू की गई, सीता नगर के पार्षद जितेंद्र सिंह खड़े हो गए। उन्होंने रामबाग के पार्किंग ठेकेदार द्वारा उनके खिलाफ कराई गई क्रास एफआईआर का मुद्दा उठा दिया। 
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11 पार्षदों ने जितेंद्र सिंह के खिलाफ एफआईआर पर आपत्ति जताते हुए निंदा प्रस्ताव पेश किया। इसके बाद ही सभी पार्षद एकजुट हो गए और पुलिस के खिलाफ नारेबाजी शुरू हो गई। एक मत से एत्माद्दौला पुलिस के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित कर दिया गया। हंगामे और नारेबाजी के बीच मेयर ने सदन स्थगित कर दिया। 
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'पुलिस पहले जांच करें, फिर कार्रवाई'

पार्षद चुने हुए जनप्रतिनिधि हैं। उनके खिलाफ किसी भी शिकायत पर पुलिस पहले जांच करे, तब कार्रवाई करे। नगर निगम सदन प्रस्ताव पास कर पुलिस को भेज चुका है, फिर भी ऐसी कार्रवाई समझ से परे है। ठेकेदार को नोटिस जारी किया है। गुंडई तो सहन नहीं होगी, जवाब मिलने पर निगम अपनी कार्रवाई करेगा- नवीन जैन, महापौर 


पार्षद जितेंद्र सिंह ने कहा कि जनता के उत्पीड़न पर जब पार्षद ठेकेदारों के खिलाफ बोल रहे हैं तो मुकदमे दर्ज हो रहे हैं। सदन में पारित प्रस्ताव का फिर क्या मतलब है। ठेकेदार को ब्लैक लिस्ट किया जाए और उसका लाइसेंस निरस्त किया जाए। 

पार्षद विवेक तोमर बोले कि ये सदन तब चलेगा, जब ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई होगी। ठेकेदार को नोटिस नहीं, सीधे ब्लैक लिस्ट करना चाहिए। ये सदन का अपमान है। एक नहीं, चार पार्षदों पर बिना जांच के एफआईआर की गई है। 

पार्षद रवि शर्मा ने कहा कि निर्माण कार्य हो या प्रकाश विभाग का, हमारे अफसरों का ठेकेदार को वरदहस्त मिला हुआ है, जिससे उनके हौंसले बढ़े हैं। पार्षद के खिलाफ मुकदमा लिखवाने वाले ठेकेदार का लाइसेंस निरस्त हो और ब्लैक लिस्ट किया जाए। 
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