कोरोना की तीसरी लहर से निपटने की तैयारी: आगरा में बच्चों के लिए बनेंगे अलग कोविड वार्ड
पहली लहर में 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोग बीमार हुए थे। दूसरी लहर में युवाओं में संक्रमण बढ़ा। तीसरी लहर में बच्चों पर खतरा मंडरा रहा है। इससे निपटने के लिए प्रशासन ने तैयारियां शुरू कर दी हैं।
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आगरा में कोरोना संक्रमण की तीसरी लहर में बच्चों में संक्रमण की रोकथाम व उपचार के लिए जिला प्रशासन नई रणनीति बना रहा है। जिलाधिकारी प्रभु एन सिंह ने बताया है कि बच्चों के लिए अलग कोविड वार्ड बनाए जाएंगे। ऑक्सीजन का इंतजाम किया जाएगा। ट्रीटमेंट प्रोटोकॉल यही रहेगा या इसमें बदलाव होगा इसके लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जल्द जारी किए जा सकते हैं। शहर के बाल रोग विशेषज्ञों व बच्चों के अस्पतालों को चिह्नित किया जा रहा है।
पहली लहर में 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोग बीमार हुए थे। दूसरी लहर में युवाओं में संक्रमण बढ़ा। तीसरी लहर में बच्चों पर खतरा मंडरा रहा है। ऐसे में जिला प्रशासन बच्चों के उपचार के लिए रणनीति बना रहा है। तय किया गया है कि बच्चों के लिए अलग कोविड वार्ड बनेंगे। बच्चों के लिए मशीनें, वेंटीलेटर व ऑक्सीजन की उपलब्धता बढ़ाने पर विचार चल रहा है।
जिलाधिकारी ने बताया कि बच्चों के लिए बाल रोग विशेषज्ञों की मदद से बेहतर उपचार प्रबंधन पर जल्द स्थिति स्पष्ट करेंगे। ऑक्सीजन की सबसे ज्यादा जरूरत पड़ेगी। ऐसे में कहां-कहां से ऑक्सीजन आ सकती है इस पर विचार चल रहा है। उन्होंने बताया कि बच्चों के लिए संभवत: वही दवाइयां इस्तेमाल की जाएंगी जो अन्य मरीजों पर इस्तेमाल हो रही हैं। यह हल्की क्षमता की होंगी। गर्भवतियों के लिए पहले से प्रोटोकॉल तय है।
बच्चों को न जाने दें घर से बाहर
आईएमए आगरा के निर्वतमान अध्यक्ष एवं बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. ओपी यादव ने कहा कि बच्चों के लिए विशेष सतर्कता बरतना जरूरी है। उन्हें बाहर नहीं जाने दें। युवा व घर के अन्य सदस्य भी सीधे बच्चों के संपर्क में न आएं। इस बात का ध्यान रखेंगे तो बच्चों को संक्रमित होने से बचाया जा सकता है। नवजात बच्चों के लिए विशेष उपचार के इंतजाम विकसित करने की जरूरत है।
कोरोना संक्रमण की चपेट में आ चुके हैं लगभग 400 बच्चे
कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर में दस वर्ष से कम उम्र के बच्चे भी लगातार चपेट में आ रहे हैं। अब तक करीब 400 बच्चे संक्रमित हो चुके हैं। एक वर्ष और उससे भी छोटी उम्र के बच्चों में जिले में कोरोना संक्रमण की पुष्टि हुई है। मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. आरसी पांडेय ने बताया कि अप्रैल के पहले हफ्ते में संक्रमित बच्चों की संख्या (दस वर्ष से कम उम्र के) 219 थी।
एक माह में रोजाना पांच या उससे अधिक बच्चे संक्रमण की चपेट में आए हैं। बच्चों से लेकर बड़ों को कोरोना से बचाव के संबंध में जारी दिशा-निर्देशों का पालन करना होगा। घर से बाहर बहुत जरूरी होने पर ही वह भी बचाव के उपायों के साथ निकलें। कोरोना की चेन तोड़कर ही इसकी रफ्तार को रोका जा सकता है।