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CoronaVirus: ताजनगरी में पर्यटन उद्योग से जुड़े चार लाख लोगों के लिए अगले साल तक का 'संकट'
Fri, 17 Apr 2020 11:55 AM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Fri, 17 Apr 2020 11:55 AM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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कोरोना वायरस के पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले लेने का सबसे बुरा असर पर्यटन उद्योग पर पड़ रहा है। ताजनगरी के पर्यटन उद्योग में सबसे बड़ी हिस्सेदारी अमेरिका और यूरोपीय देशों की है, जो कोरोना से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। ताजनगरी के चार लाख से ज्यादा लोग प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से पर्यटन उद्योग से जुड़े हैं, जिनके सामने अब अगले एक साल तक के लिए संकट खड़ा हो गया है।
हैंडीक्राफ्ट से जुड़े करीब 45 हजार कारीगर हैं, जो अमेरिकी और यूरोपीय बाजार पर ही निर्भर थे। इन देशों के पर्यटक ही सबसे ज्यादा हैंडीक्राफ्ट की खरीदारी करते थे। संकट की इस घड़ी में पर्यटन उद्योग ने सरकार से राहत पैकेज की मांग की है।
पर्यटन उद्योग को सरकार से आस
होटल एंड रेस्टोरेंट ओनर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष रमेश वाधवा ने केंद्र सरकार और पर्यटन मंत्रालय को पत्र लिखकर 10 बिंदु सुझाए हैं, जिनसे राहत मिल सकती है। उन्होंने पत्र में लिखा है कि सरकार अगले एक साल तक इस पूरे ट्रेड को टैक्स फ्री करे। जो कर्मचारी हैं उनको रोजगार देने के लिए नियोक्ताओं को इंसेंटिव और पीएफ में मदद दे। वाधवा कहते हैं कि सबसे पहले किसी भी संकट में लोग घूमना-फिरना ही बंद करते हैं।
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हैंडीक्राफ्ट से जुड़े करीब 45 हजार कारीगर हैं, जो अमेरिकी और यूरोपीय बाजार पर ही निर्भर थे। इन देशों के पर्यटक ही सबसे ज्यादा हैंडीक्राफ्ट की खरीदारी करते थे। संकट की इस घड़ी में पर्यटन उद्योग ने सरकार से राहत पैकेज की मांग की है।
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पर्यटन उद्योग को सरकार से आस
होटल एंड रेस्टोरेंट ओनर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष रमेश वाधवा ने केंद्र सरकार और पर्यटन मंत्रालय को पत्र लिखकर 10 बिंदु सुझाए हैं, जिनसे राहत मिल सकती है। उन्होंने पत्र में लिखा है कि सरकार अगले एक साल तक इस पूरे ट्रेड को टैक्स फ्री करे। जो कर्मचारी हैं उनको रोजगार देने के लिए नियोक्ताओं को इंसेंटिव और पीएफ में मदद दे। वाधवा कहते हैं कि सबसे पहले किसी भी संकट में लोग घूमना-फिरना ही बंद करते हैं।
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हालात सुधरने में लगेंगे एक साल
पर्यटकों की जुलाई-अगस्त तक की सभी बुकिंग कैंसिल हो चुकी हैं और अक्तूबर-नवंबर में शुरू होने वाला पर्यटक सीजन भी लगता नहीं कि उठ पाएगा। होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश चौहान का भी यही मानना है कि अगले साल तक पर्यटन उद्योग को राहत नहीं मिल पाएगी।
दरअसल अमेरिकी बाजार पूरी तरह से प्रभावित हुआ है। आगरा में सबसे ज्यादा 15 फीसदी पर्यटक अमेरिका से आते थे। इसके बाद 12.50 फीसदी की भागीदारी ब्रिटेन की थी। इसके अलावा ईरान, इटली, फ्रांस, जर्मनी, चीन, जापान यह सब वो देश हैं जहां कोरोना वायरस ने सबसे बुरा असर डाला है।
दरअसल अमेरिकी बाजार पूरी तरह से प्रभावित हुआ है। आगरा में सबसे ज्यादा 15 फीसदी पर्यटक अमेरिका से आते थे। इसके बाद 12.50 फीसदी की भागीदारी ब्रिटेन की थी। इसके अलावा ईरान, इटली, फ्रांस, जर्मनी, चीन, जापान यह सब वो देश हैं जहां कोरोना वायरस ने सबसे बुरा असर डाला है।
टूरिज्म गिल्ड ने भी लिखा पत्र
टूरिज्म गिल्ड ने भी पर्यटन मंत्री और वित्त मंत्री को पत्र लिखकर हालात की भयावहता की बारे में जानकारी दे दी है और उनसे मदद की अपेक्षा की है। गिल्ड के उपाध्यक्ष राजीव सक्सेना के मुताबिक मई तक का तो पूरा सीजन खाली हो चुका है। घरेलू बुकिंग भी नही है।
लॉकडाउन बढ़ने के बाद एयरलाइंस कब शुरू होंगे, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है। पर्यटकों की आइटनरी एक साल पहले ही बन जाती है। ऐसे में अगले एक साल का बिजनेस पूरी तरह से चौपट हो गया है। सरकार ने संकट की घड़ी में पर्यटन उद्योग की मदद न की तो उनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो जाएगा क्योंकि इस उद्योग में रोज कमाने-खाने वाले लोगों की संख्या सबसे ज्यादा है।
लॉकडाउन बढ़ने के बाद एयरलाइंस कब शुरू होंगे, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है। पर्यटकों की आइटनरी एक साल पहले ही बन जाती है। ऐसे में अगले एक साल का बिजनेस पूरी तरह से चौपट हो गया है। सरकार ने संकट की घड़ी में पर्यटन उद्योग की मदद न की तो उनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो जाएगा क्योंकि इस उद्योग में रोज कमाने-खाने वाले लोगों की संख्या सबसे ज्यादा है।