कोरोना: तीसरी लहर के लिए नाकाफी इंतजाम, दवाएं और सुविधाएं छोड़िए बच्चों के लिए आईसीयू एंबुलेंस भी नहीं
बाल रोग विभाग एसोसिएट प्रोफेसर नीरज यादव ने बताया कि बच्चों के उपचार के लिए 60 नर्सिंग स्टाफ और 60 टेक्नीशियन व अन्य कार्मिकों की जरूरत है।
विस्तार
तीसरी लहर में बच्चों को बचाने के लिए दवाएं व सुविधाएं छोड़िए शहर में आईसीयू एंबुलेंस तक नहीं। आकस्मिक स्थिति में नवजात शिशुओं को हायर सेंटर रेफर करने के लिए वेंटिलेटर युक्त एंबुलेंस भी दिल्ली से मंगानी पड़ती है। इन हालातों में अगर बच्चे संक्रमित हुए तो उनकी जान बचाना सबसे बड़ी चुनौती साबित होगा।
एसएन मेडिकल कॉलेज में फिलहाल दो वेंटिलेटर युक्त पीआईसीयू बेड हैं। निजी अस्पतालों में करीब 15 पीआईसीयू हैं। बाल रोग विभाग एसोसिएट प्रोफेसर नीरज यादव ने बताया कि बच्चों के उपचार के लिए 60 नर्सिंग स्टाफ और 60 टेक्नीशियन व अन्य कार्मिकों की जरूरत है। दवाएं, नए वेंटिलेटर और अन्य उपकरणों की खरीद की प्रक्रिया चल रही है। तीसरी लहर तक इंतजाम हो जाएंगे।
बाल शिशु अकादमी के सदस्य एवं बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अजय अरोड़ा ने कहा, संक्रमित बच्चों में मल्टी ऑर्गन इन्वाल्वमेंट सिंड्रोम (मिस-सी) स्थिति सबसे खतरनाक होती है। विदेशों में बच्चों में मिस-सी के केस मिले हैं। ऐसे बच्चों के उपचार के लिए वेंटिलेटर के अलावा स्टेरायड्स, एंटी बायोटिक और अन्य पीडियाट्रिक दवाओं की जरूरत पड़ेगी। आगरा फार्मा एसोसिएशन सचिव महेश अग्रवाल ने बताया कि दवाओं की उपलब्धता दवा निर्माता कंपनियों पर निर्भर है। सामान्य दवाएं उपलब्ध हैं, कोविड संक्रमण के कारण बाजार में दवाओं की आपूर्ति प्रभावित है।
संक्रमण में डायरिया हो सकता है घातक
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अरुण जैन ने बताया कि अगर बच्चे संक्रमित होते हैं तो उनमें कोविड के लक्षण सर्दी, खांसी, जुकाम, बुखार से शुरू होंगे। ऐसे में अगर उन्हें डायरिया होता है तो स्थिति चिंताजनक होगी। निमोनिया भी बढ़ सकता है। निमोनिया में बच्चों के लिए भी ऑक्सीजन की जरूरत पड़ेगी।
शहर में बच्चों का अस्पताल नहीं
बच्चों के लिए शहर में कोई डेडिकेटेड अस्पताल नहीं हैं। आईएमए के निर्वाचित अध्यक्ष एवं बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. ओपी यादव ने बताया कि तीसरी लहर में बच्चों के संक्रमित होने की आशंका इसलिए अधिक है क्योकि 18 साल से अधिक उम्र के लोगों का वैक्सीनेशन हो रहा है। बच्चों के लिए कोविड से बचाव को कोई टीका नहीं बना।
दिल्ली से मंगानी पड़ती है एंबुलेंस
बच्चों के लिए वेंटिलेटर युक्त एंबुलेंस शहर में नहीं है। नाक या मुंह से नली डालकर उन्हें शिफ्ट किया जाता है। बच्चों की आईसीयू एंबुलेंस दिल्ली से मंगानी पड़ती है। इसका किराया 15 से 20 हजार रुपये है। - रवि सिसौदिया, अध्यक्ष, यूपी एंबुलेंस एसोसिएशन
20 पीआईसीयू, 30 एनआईसीयू सहित 100 बेड का वार्ड बना रहे हैं। बच्चों की दवा, उपकरण और मानव संसाधन के लिए सरकार को मांग भेजी हैं। प्रारूप तैयार हो गया है। बच्चों के उपचार के लिए हम पूरी तरह तैयार हैं। - डॉ. राजेश्वर दयाल, विभागाध्यक्ष, बाल रोग, एसएन मेडिकल कॉलेज
एक महीने में तैयार होगा वार्ड
- एसएन में 100 व जिला अस्पताल में 20 बेड का बच्चा वार्ड एक महीने में तैयार हो जाएगा। पीडब्ल्यूडी की टीम ने काम शुरू कर दिया है। तीसरी लहर में बच्चों के इलाज की पर्याप्त व्यवस्थाएं होंगी। - प्रभु एन सिंह, जिलाधिकारी, आगरा
ये हैं आंकड़े
- 1.28 लाख बच्चे हैं 12 से 24 महीने के
- 200 बाल रोग विशेषज्ञ हैं शहर में पंजीकृत
- 20 पीआईसीयू में वेंटीलेटर बेड हैं जिले में
- 14 महीने से बच्चों की सरकारी ओपीडी बंद है।
- 08 बच्चे भर्ती हुए एसएन में दूसरी लहर में।
- 30 बच्चे भर्ती हुए थे पिछले साल पहली लहर में।
ये भी पढ़ें: मुख्यमंत्री का किसानों से संवाद: मैनपुरी की ग्राम पंचायत नगला गढ़ू के प्रधान डॉ. दिनेश यादव से होगी विकास योजनाओं पर चर्चा