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पूरे गांव ने कहा, धर्मांतरण नहीं
ब्यूरो, अमर उजाला
Updated Tue, 23 Dec 2014 02:31 AM IST
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गांव गढ़ी संपत में 20 हिंदू परिवारों को ईसाई बनाए जाने के हल्ले के कारण
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सोमवार को गांव पुलिस छावनी सा बन गया था। मीडिया और हिंदूवादी नेताओं के
जमावड़ा भी था। इसी बीच पूरे गांव ने एक सुर से साफ किया मामला धर्मांतरण
का नहीं है। ‘ईसाई सत्संग’ में जाने से बीमारियां ठीक होने के प्रचार पर
महिलाएं जरूर वहां जाती थीं लेकिन उनकी उपनी पूजा पद्धति आज भी वैसी ही है।
रामवती ने लालच देने के आरोप से पल्ला झाड़ते हुए इसका ठीकरा हिंदूवादी
नेताओं के सिर फोड़ दिया। पुलिस भी अब इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं करने
जा रही।
सोमवार को गढ़ी संपत में हर ओर अजब से संशय का कोहरा था। पुलिस की गाड़ियों, मीडियाकर्मियों और हिंदूवादी कार्यकर्ताओं की आमदरफ्त चढ़ते दिन के साथ बढ़ती रही। ग्रामीण सबको बता रहे थे, गांव परिहार के एक युवक को पथरी की शिकायत थी। कहा गया कि ‘ईसाई सत्संग’ (प्रार्थना, प्रवचन या दुआ के लिए होने वाली सभा) में जाने के बाद उसकी बीमारी दूर हो गई। एक अन्य महिला का पैरों से कमजोर बच्चा भी खड़ा होकर चलने लगा। इस ‘चमत्कार’ को खूब प्रचार मिला। कुछ ही महीनों में आसपास गांव की सैकड़ों महिलाएं सत्संग में जाने लगीं। उन्हें अपने लिए भी भले की आस थी। गढ़ी संपत समेत आसपास के ज्यादातर गांवों में ईसाई मिशनरी द्वारा सत्संग और कुछ परिवारों को बाइबिल देने की बात ग्रामीणों ने मानी। लेकिन उनका कहना था कि यह वैसा ही है जैसेदूसरे धर्म का होते हुए भी कोई किसी दरगाह पर मन्नत का धागा बांधे या गुरुद्वारे में मत्था टेके। उनका सवाल था कि इस श्रद्धा को धर्मपरिवर्तन तो कहा जा सकता है? उन्होंने बताया कि किसी भी परिवार ने अपने मूल धर्म व परंपराओं से नाता नहीं तोड़ा, न ही नाम बदला। लालच दिए जाने की बात पर भी उनकी ना ही थी।
पुलिस के मुताबिक रविवार रात जब थाने में दी गई तहरीर रामवती को पढ़कर सुनाई गई तो उन्होंने धर्मपरिवर्तन के लिए लालच देने जैसे आरोपों से इनकार कर दिया। यही बात उन्होंने ‘अमर उजाला’ से भी कही। उन्होंने साफ किया अब न तो सत्संग जाएंगी न ही वह कोई कार्रवाई करने के लिए पुलिस से कहने वाली हैं।
उधर, हिंदूवादी नेताओं के गांव पहुंचकर शुद्धिकरण हवन आदि करने की आशंका पर रामवती के घर पर पुलिस का कड़ा पहरा रहा। सख्ती इतनी थी कि दोपहर एक बजे तक पुलिस ने गांव में चार लोगों को भी सार्वजनिक रूप से गुट बनाकर बात नहीं करने दी। पूर्व सांसद और भाजपा नेता एसपी सिंह बघेल, बजरंग दल के गौरक्षा प्रांत प्रमुख सुनील पाराशर, बजरंग दल के महानगर सह संयोजक दिग्विजय तिवारी, विश्व हिंदू परिषद के प्रांत मीडिया प्रभारी प्रमेंद्र जैन देर तक गांव में डेरा डाले रहे। वे गांव की महिलाओं को मिशनरी सत्संग तक ले जाने की आरोपी रामवती बघेल के घर भी गए। हिंदूवादी नेताओं ने पुलिस पर निष्पक्ष कार्रवाई न करने और रामवती को घर से गायब करने का आरोप भी पुलिस पर लगाया।
सोमवार को गढ़ी संपत में हर ओर अजब से संशय का कोहरा था। पुलिस की गाड़ियों, मीडियाकर्मियों और हिंदूवादी कार्यकर्ताओं की आमदरफ्त चढ़ते दिन के साथ बढ़ती रही। ग्रामीण सबको बता रहे थे, गांव परिहार के एक युवक को पथरी की शिकायत थी। कहा गया कि ‘ईसाई सत्संग’ (प्रार्थना, प्रवचन या दुआ के लिए होने वाली सभा) में जाने के बाद उसकी बीमारी दूर हो गई। एक अन्य महिला का पैरों से कमजोर बच्चा भी खड़ा होकर चलने लगा। इस ‘चमत्कार’ को खूब प्रचार मिला। कुछ ही महीनों में आसपास गांव की सैकड़ों महिलाएं सत्संग में जाने लगीं। उन्हें अपने लिए भी भले की आस थी। गढ़ी संपत समेत आसपास के ज्यादातर गांवों में ईसाई मिशनरी द्वारा सत्संग और कुछ परिवारों को बाइबिल देने की बात ग्रामीणों ने मानी। लेकिन उनका कहना था कि यह वैसा ही है जैसेदूसरे धर्म का होते हुए भी कोई किसी दरगाह पर मन्नत का धागा बांधे या गुरुद्वारे में मत्था टेके। उनका सवाल था कि इस श्रद्धा को धर्मपरिवर्तन तो कहा जा सकता है? उन्होंने बताया कि किसी भी परिवार ने अपने मूल धर्म व परंपराओं से नाता नहीं तोड़ा, न ही नाम बदला। लालच दिए जाने की बात पर भी उनकी ना ही थी।
पुलिस के मुताबिक रविवार रात जब थाने में दी गई तहरीर रामवती को पढ़कर सुनाई गई तो उन्होंने धर्मपरिवर्तन के लिए लालच देने जैसे आरोपों से इनकार कर दिया। यही बात उन्होंने ‘अमर उजाला’ से भी कही। उन्होंने साफ किया अब न तो सत्संग जाएंगी न ही वह कोई कार्रवाई करने के लिए पुलिस से कहने वाली हैं।
उधर, हिंदूवादी नेताओं के गांव पहुंचकर शुद्धिकरण हवन आदि करने की आशंका पर रामवती के घर पर पुलिस का कड़ा पहरा रहा। सख्ती इतनी थी कि दोपहर एक बजे तक पुलिस ने गांव में चार लोगों को भी सार्वजनिक रूप से गुट बनाकर बात नहीं करने दी। पूर्व सांसद और भाजपा नेता एसपी सिंह बघेल, बजरंग दल के गौरक्षा प्रांत प्रमुख सुनील पाराशर, बजरंग दल के महानगर सह संयोजक दिग्विजय तिवारी, विश्व हिंदू परिषद के प्रांत मीडिया प्रभारी प्रमेंद्र जैन देर तक गांव में डेरा डाले रहे। वे गांव की महिलाओं को मिशनरी सत्संग तक ले जाने की आरोपी रामवती बघेल के घर भी गए। हिंदूवादी नेताओं ने पुलिस पर निष्पक्ष कार्रवाई न करने और रामवती को घर से गायब करने का आरोप भी पुलिस पर लगाया।