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UP: वसूली का नोटिस, रुपये जमा करने का दबाव...बैंक को इसलिए लगाई आयोग ने फटकार
Tue, 23 Dec 2025 09:07 AM IST
धीरेन्द्र सिंह
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Tue, 23 Dec 2025 09:07 AM IST
सार
बैंक ने ऋण तो दिया, लेकिन उपभोक्ता को उसके खाते का विवरण देने से मना कर दिया। इसके बाद रुपये जमा करने का दबाव बनाया।
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कर्ज
- फोटो : अमर उजाला प्रिंट / एजेंसी
विस्तार
बैंक ने ऋण संबंधित खाते का पीड़ित को खाता विवरण (लेखा-जोखा) देने से मना कर दिया। रुपये जमा करने का दबाव बनाया। पीड़ित ने जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग प्रथम में वाद दायर किया। आयोग के अध्यक्ष सर्वेश कुमार और सदस्य राजीव कुमार ने यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की सदर शाखा को 45 दिन के अंदर खाते का विवरण देने के आदेश दे दिए। तय समय में नहीं दिया तो वाद व्यय के 10 हजार रुपये भी अदा करने होंगे।
थाना सदर बाजार क्षेत्र के नौलक्खा निवासी प्रमोद कुमार खनूजा ने आयोग में वाद दायर किया था। आरोप लगाया था कि उन्होंने 25 सितंबर 2014 को प्रधानमंत्री जनधन योजना के तहत यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की सदर शाखा में जीरो बैलेंस खाता खुलवाया था। 22 फरवरी 2016 को मयूरी ई-रिक्शा खरीदने के लिए बैंक से 77 हजार रुपये का ऋण लिया।
ऋण की अदायगी के लिए 1704 रुपए महीने की किस्त बनी, जो 5 साल तक के लिए निर्धारित की गई। उन्होंने 2 साल 8 महीने तक किस्त अदा की। इसके बाद बैंक ने 8200 रुपये का ओवरड्यू नोटिस गलत तरीके से भेज दिया। उन्होंने अपने अधिवक्ता के माध्यम से बैंक को जवाब दिया। तब बैंक ने तहसील सदर आगरा को 53 हजार रुपये के साथ 5 हजार रुपये अमीन खर्चा की आरसी निकलवा दी। उन्होंने आरसी के विरुद्ध 5 दिसंबर को 25 हजार और 5 हजार अमीन को दिए। इसके बाद भी 8500 रुपये जमा करने के लिए नाजायज दबाव डाला गया। ऋण से संबंधित खाता विवरण (लेखा-जोखा) मांगा तो देने से इंकार कर दिया।
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थाना सदर बाजार क्षेत्र के नौलक्खा निवासी प्रमोद कुमार खनूजा ने आयोग में वाद दायर किया था। आरोप लगाया था कि उन्होंने 25 सितंबर 2014 को प्रधानमंत्री जनधन योजना के तहत यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की सदर शाखा में जीरो बैलेंस खाता खुलवाया था। 22 फरवरी 2016 को मयूरी ई-रिक्शा खरीदने के लिए बैंक से 77 हजार रुपये का ऋण लिया।
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ऋण की अदायगी के लिए 1704 रुपए महीने की किस्त बनी, जो 5 साल तक के लिए निर्धारित की गई। उन्होंने 2 साल 8 महीने तक किस्त अदा की। इसके बाद बैंक ने 8200 रुपये का ओवरड्यू नोटिस गलत तरीके से भेज दिया। उन्होंने अपने अधिवक्ता के माध्यम से बैंक को जवाब दिया। तब बैंक ने तहसील सदर आगरा को 53 हजार रुपये के साथ 5 हजार रुपये अमीन खर्चा की आरसी निकलवा दी। उन्होंने आरसी के विरुद्ध 5 दिसंबर को 25 हजार और 5 हजार अमीन को दिए। इसके बाद भी 8500 रुपये जमा करने के लिए नाजायज दबाव डाला गया। ऋण से संबंधित खाता विवरण (लेखा-जोखा) मांगा तो देने से इंकार कर दिया।
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