खाकी का गजब हाल: पुलिसकर्मी कर रहे लूट..., विभागीय जांच में खानापूरी; जानें पूरा मामला
आगरा में पुलिस वालों के खिलाफ लगातार वसूली की शिकायत मिल रही हैं। एत्माद्दौला में चांदी कारीगर तो सिकंदरा में चौकी पर लाकर वसूली की शिकायत मिली है। हैरानी की बात तो ये है कि इनके खिलाफ मुकदमा तक दर्ज नहीं हुआ है।
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आगरा के थाना सिकंदरा के बाद बासौनी में पुलिसकर्मियों ने लूट की। शिकायत पर सात को निलंबित कर दिया गया। विभागीय जांच की जा रही है। पुलिसकर्मियों ने पहली बार किसी को नहीं लूटा है। हर बार निलंबन के बाद विभागीय जांच की जाती है। मगर, बाद में पुलिसकर्मी बच निकलते हैं। दूसरे थानों में तैनाती मिल जाती है। मुकदमे तक दर्ज नहीं होते। जबकि इसी तरह के मामलों में पहले पुलिसकर्मियों को जेल भेजा जा चुका है।
जून 2022 में थाना एत्माद्दौला पुलिस ने चांदी कारीगरों से लूट की थी। हाथरस के विसावर निवासी विपिन और धर्मेंद्र चांदी कारोबारियों से लेकर माल तैयार करते थे। फाउंड्री नगर चौकी में ले जाकर एनकाउंटर की धमकी देकर दोनों से 74 हजार रुपये वसूले थे। शिकायत तत्कालीन एसएसपी सुधीर कुमार सिंह से की गई थी। चौकी प्रभारी और दो सिपाहियों का निलंबन हुआ। विभागीय जांच के आदेश किए गए थे। मुकदमा दर्ज नहीं हुआ।
जनवरी में थाना सिकंदरा की पद्म प्राइड चौकी पर वसूली का मामला सामने आया था। दरोगा ने बदमाशों के अंदाज में सौंठ की मंडी निवासी जमील को पकड़ा था। कोर्ट का वारंट बताकर चौकी पर ले गए थे। आरोप था कि दरोगा ने मारपीट की। एक दलाल के माध्यम से 20 हजार रुपये में सौदा तय होने पर छोड़ा था। मामला अधिकारियों के पास पहुंचने के बाद दरोगा को निलंबित किया गया। मगर, मुकदमा दर्ज नहीं हुआ।
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सात का हुआ है निलंबन
हाल ही में बोदला रोड पर तीन दरोगा ने ट्रक को रोका था। नंबर प्लेट में गड़बड़ी बताकर रुपये मांगे थे। आरोप है कि 20 हजार रुपये लेने के बाद छोड़ा था। मामला पुलिस आयुक्त के पास पहुंचा। दो दरोगा और एक सिपाही को निलंबित किया गया। इसके बाद बासौनी का मामला आया। पुलिसकर्मियों ने पशु व्यापारियों से वसूली की थी। पर्यटन मंत्री की शिकायत के बाद कार्रवाई हुई। एक दरोगा और तीन सिपाही निलंबित किए गए।
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दर्ज होना चाहिए मुकदमा
अधिवक्ता नितिन वर्मा ने बताया कि अगर, कोई व्यक्ति किसी व्यक्ति से अवैध तरीके से धन की वसूली करता है तो चौथ मांगने की धारा 384 में मुकदमा दर्ज किया जाना चाहिए। अगर, यही काम कोई पुलिसकर्मी करता है तो भी मुकदमा दर्ज करने का प्रावधान है। गिरफ्तारी और एनकाउंटर का भय दिखाकर धन की वसूली करता है तो धारा 386 के तहत मुकदमा दर्ज किया जाना चाहिए, जो कि गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है। विभागीय जांच भी कराई जानी चाहिए।