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मंडलायुक्त ने जल संस्थान से मांगा जवाब, सचिव बोले- गंदे पानी की ही होगी सप्लाई
Tue, 11 Jun 2019 03:00 PM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Tue, 11 Jun 2019 03:00 PM IST
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मंडलायुक्त अनिल कुमार (दायें), जल संस्थान के सचिव अनवर ख्वाजा (बायें)
- फोटो : अमर उजाला
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आगरा के कई क्षेत्रों में गंदे, कीड़ायुक्त और बदबूदार पानी की सप्लाई होने पर मंडलायुक्त अनिल कुमार ने जलकल विभाग के अधिकारियों से जवाब-तलब किया है। अमर उजाला की खबर का संज्ञान लेकर उन्होंने पीओ डूडा से भी स्पष्टीकरण मांगा है। साथ ही स्वच्छ जल की आपूर्ति की हिदायत दी है।
कमिश्नरी सभागार में सोमवार को अनुश्रवण समिति की बैठक हुई। इसकी शुरुआत में ही मंडलायुक्त ने अमर उजाला माई सिटी के प्रथम पृष्ठ पर प्रकाशित खबर का संज्ञान लेते हुए जलकल अधिकारियों को फटकार लगाई। लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ करने पर विभागीय अधिकारियों पर नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि यह बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
स्पष्टीकरण के बाद संतोषजनक जवाब न मिलने पर कार्रवाई की चेतावनी दी है।इसके अलावा उन्होंने गंगाजल आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए जीवनी मंडी वाटर वर्क्स को जोड़ने के लिए 160 मीटर का कार्य तेजी के साथ पूरा करने की हिदायत दी। भले ही इसके लिए 3-3 शिफ्टों में काम क्यों न करना पड़े।
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कमिश्नरी सभागार में सोमवार को अनुश्रवण समिति की बैठक हुई। इसकी शुरुआत में ही मंडलायुक्त ने अमर उजाला माई सिटी के प्रथम पृष्ठ पर प्रकाशित खबर का संज्ञान लेते हुए जलकल अधिकारियों को फटकार लगाई। लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ करने पर विभागीय अधिकारियों पर नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि यह बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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स्पष्टीकरण के बाद संतोषजनक जवाब न मिलने पर कार्रवाई की चेतावनी दी है।इसके अलावा उन्होंने गंगाजल आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए जीवनी मंडी वाटर वर्क्स को जोड़ने के लिए 160 मीटर का कार्य तेजी के साथ पूरा करने की हिदायत दी। भले ही इसके लिए 3-3 शिफ्टों में काम क्यों न करना पड़े।
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सचिव का जवाब : हमारे पास व्यवस्था नहीं
पानी में अंडा, कीड़े और गंदगी
- फोटो : अमर उजाला
कीड़े वाले पानी की सप्लाई पर जल संस्थान के सचिव अनवर ख्वाजा का जवाब है, 'हमारे पास दूसरी कोई व्यवस्था नहीं है। या तो पानी की सप्लाई बंद कर दी जाए या फिर इसी पानी की सप्लाई सुचारु रखी जाए।
सचिव ने यह भी कहा कि पानी पीने योग्य नहीं है, लेकिन इस पानी से दूसरे अन्य कार्य (कपड़े धोने जैसे) किए जा सकते हैं। इसके लिए सप्लाई किया जा रहा है। इतना ही नहीं। साफ पानी के जलाशय के बारे में जवाब है, 20 दिन पहले मैंने नौलक्खा और रकाबगंज को देखा था।
दोनों क्षतिग्रस्त है, इसके बारे में मुझे जानकारी है। उनसे पूछा गया कि जब जानकारी है तो मरम्मत क्यों नहीं कराई? इस पर जवाब और अजब है कहा कि हम करीब 65 करोड़ रुपये जलमूल्य के रूप में वसूलते हैं, उससे सिर्फ कर्मचारियों का वेतन ही निकल पाता है।
सचिव ने यह भी कहा कि पानी पीने योग्य नहीं है, लेकिन इस पानी से दूसरे अन्य कार्य (कपड़े धोने जैसे) किए जा सकते हैं। इसके लिए सप्लाई किया जा रहा है। इतना ही नहीं। साफ पानी के जलाशय के बारे में जवाब है, 20 दिन पहले मैंने नौलक्खा और रकाबगंज को देखा था।
दोनों क्षतिग्रस्त है, इसके बारे में मुझे जानकारी है। उनसे पूछा गया कि जब जानकारी है तो मरम्मत क्यों नहीं कराई? इस पर जवाब और अजब है कहा कि हम करीब 65 करोड़ रुपये जलमूल्य के रूप में वसूलते हैं, उससे सिर्फ कर्मचारियों का वेतन ही निकल पाता है।
रकाबगंज में पानी के टैंक की टूटी छत पर पड़ा तिरपाल
- फोटो : अमर उजाला
इसके बावजूद हमने कुछ जगहों पर टीन शेड डलवाने का कार्य किया है। इसके आगे की जिम्मेदारी वो जल निगम की बताते हैं। उनका कहना है कि जल निगम की जिम्मेदारी है कि वह नए सीडब्ल्यूआर बनाने का कार्य करें। हम तो सिर्फ लोगों तक पानी सप्लाई का कार्य करते हैं।
कीड़े वाले पानी के 65 करोड़ वसूल रहा जल निगम
जल संस्थान जो कीड़े वाला पानी शहर में सप्लाई कर रहा है, उससे बदले लोगों से हर साल लगभग 65 करोड़ रुपये वाटर टैक्स के नाम पर वसूले जा रहे हैं। पानी ऐसा है जैसा नाले नालियों में बहता है। जल संस्थान में 711 कर्मचारी और अधिकारी है, बावजूद इसके 12 क्लीयर वाटर रिजर्वायर (सीडब्ल्यूआर) की सफाई नहीं हो पा रही है।
जल त्रासदी से भी सबक नहीं, मरे थे 17 लोग
दूषित पानी से शहर में जल त्रासदी हो चुकी है। घटना 20 मई 1993 को हुई थी। खटीकपाड़ा में दूषित जल पीने से 17 लोगों की मौत हो गई थी। तब बड़ा मुद्दा बना था, आंदोलन चला था, सरकार ने घोषणा की थी शहर में साफ पानी की सप्लाई करने के लिए लेकिन अमल नहीं हुआ। जल त्रासदी की याद में कुछ लोग हर साल 20 मई को धरना देते हैं। इसके बावजूद जल निगम सबक लेने के लिए तैयार नहीं है।
कीड़े वाले पानी के 65 करोड़ वसूल रहा जल निगम
जल संस्थान जो कीड़े वाला पानी शहर में सप्लाई कर रहा है, उससे बदले लोगों से हर साल लगभग 65 करोड़ रुपये वाटर टैक्स के नाम पर वसूले जा रहे हैं। पानी ऐसा है जैसा नाले नालियों में बहता है। जल संस्थान में 711 कर्मचारी और अधिकारी है, बावजूद इसके 12 क्लीयर वाटर रिजर्वायर (सीडब्ल्यूआर) की सफाई नहीं हो पा रही है।
जल त्रासदी से भी सबक नहीं, मरे थे 17 लोग
दूषित पानी से शहर में जल त्रासदी हो चुकी है। घटना 20 मई 1993 को हुई थी। खटीकपाड़ा में दूषित जल पीने से 17 लोगों की मौत हो गई थी। तब बड़ा मुद्दा बना था, आंदोलन चला था, सरकार ने घोषणा की थी शहर में साफ पानी की सप्लाई करने के लिए लेकिन अमल नहीं हुआ। जल त्रासदी की याद में कुछ लोग हर साल 20 मई को धरना देते हैं। इसके बावजूद जल निगम सबक लेने के लिए तैयार नहीं है।