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डीजीपी को मानवाधिकार आयोग का नोटिस
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 06 Oct 2016 01:07 AM IST
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युवक भूरी सिंह की मौत पर जवाब तलब भी किया गया
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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शमसाबाद के खेड़ा नवादा गांव में 17 सितंबर को युवक भूरी सिंह की पुलिस दबिश के दौरान मौत हो जाने का मामले में मानवाधिकार आयोग ने डीजीपी जावीद अहमद को नोटिस जारी किया है। उनसे चार हफ्ते में जवाब देने के लिए कहा गया है। साथ ही यह भी पूछा गया है कि पुलिस हिरासत में हुई इस मौत की सूचना आयोग को क्यों नहीं दी गई।
बता दें, एक बदमाश की तलाश में पुलिस भूरी सिंह के घर पहुंची थी। भूरी पर कोई केस दर्ज नहीं है। उसके रिश्तेदार पर ट्रैक्टर लूट का मामला दर्ज है। पुलिस को शक था कि वह भूरी सिंह के घर मिल सकता है। इस पर पुलिस ने दबिश दी थी। इसी दौरान भूरी सिंह की मौत हो गई थी। इस पर बवाल भी हुआ था।
पुलिस पर भूरी को तालाब में डुबोकर मार डालने का आरोप लगा। दरोगा और 12 पुलिसकर्मियों के खिलाफ केस दर्ज कराया गया। इस मामले में एडवोकेट भंवर पाल सिंह जादौन ने आयोग में शिकायत की थी। इस पर नोटिस जारी किया गया है।
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उधर, पुलिस ने अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की है। दरोगा को नामजद कराया गया था। उसके अतिरिक्त जो 12 पुलिसकर्मी अज्ञात बताए गए, अभी तक उनका नाम भी नहीं खोला गया है। न ही कोई गिरफ्तारी की गई है। कुल मिलाकर मामले को रफा दफा करने की तैयारी चल रही है। उधर, पीड़ित परिवार को कोई मुआवजा भी नहीं दिया गया। प्रशासन ने इसकी मजिस्ट्रियल जांच भी नहीं कराई है।
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बता दें, एक बदमाश की तलाश में पुलिस भूरी सिंह के घर पहुंची थी। भूरी पर कोई केस दर्ज नहीं है। उसके रिश्तेदार पर ट्रैक्टर लूट का मामला दर्ज है। पुलिस को शक था कि वह भूरी सिंह के घर मिल सकता है। इस पर पुलिस ने दबिश दी थी। इसी दौरान भूरी सिंह की मौत हो गई थी। इस पर बवाल भी हुआ था।
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पुलिस पर भूरी को तालाब में डुबोकर मार डालने का आरोप लगा। दरोगा और 12 पुलिसकर्मियों के खिलाफ केस दर्ज कराया गया। इस मामले में एडवोकेट भंवर पाल सिंह जादौन ने आयोग में शिकायत की थी। इस पर नोटिस जारी किया गया है।
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उधर, पुलिस ने अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की है। दरोगा को नामजद कराया गया था। उसके अतिरिक्त जो 12 पुलिसकर्मी अज्ञात बताए गए, अभी तक उनका नाम भी नहीं खोला गया है। न ही कोई गिरफ्तारी की गई है। कुल मिलाकर मामले को रफा दफा करने की तैयारी चल रही है। उधर, पीड़ित परिवार को कोई मुआवजा भी नहीं दिया गया। प्रशासन ने इसकी मजिस्ट्रियल जांच भी नहीं कराई है।