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चीन के लोगों का हिंदी के प्रति बढ़ा रुझान: निर्भय शर्मा
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 03 Nov 2016 12:38 AM IST
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मिजोरम के राज्यपाल ने ‘हिंदी-मिजो अध्येता कोश’ का लोकार्पण किया
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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मिजोरम के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल निर्भय शर्मा ने बुधवार को सूरसदन प्रेक्षागृह में केंद्रीय हिंदी संस्थान के ‘हिंदी-मिजो अध्येता कोश’ का लोकार्पण किया। उन्होंने विश्व पटल पर हिंदी भाषा की महत्ता बताई। साथ ही देश की तरक्की के लिए पूर्वोत्तर राज्यों में हिंदी भाषा के प्रसार पर जोर दिया।
राज्यपाल ने कहा कि मिजोरम सहित अन्य पूर्वोत्तर राज्यों में प्रतिभाएं बहुत हैं। यह निकलकर सामने भी आ रही हैं। यहां हिंदी भाषा के प्रसार की जरूरत है। इसका लाभ न केवल पूर्वोत्तर राज्यों को, बल्कि पूरे देश को मिलेगा। हिंदी विश्व में तीसरी सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषा है। चीन के लोगों ने समय की जरूरत को समझते हुए अंग्रेजी बोलना सीखा। अब बड़ी संख्या में लोग हिंदी भाषा सीख रहे हैं। पूर्वोत्तर राज्यों के लिए उन्होंने सड़क आदि के साथ डिजिटल, सोशल के साथ हिंदी भाषा की कनेक्टिविटी बढ़ाने की जरूरत बताई।
निर्भय शर्मा ने मिजोरम की जलवायु और वहां के लोगों की सराहना की। बताया कि मिजोरम में ‘क्लासलेस और कास्टलेस’ सोसाइटी है। हिंदी भाषा के प्रचार के लिए किए जा रहे केंद्रीय हिंदी संस्थान के प्रयास की उन्होंने सराहना की। बताया कि उनकी कोशिश मिजोरम में हिंदी भाषा के रीजनल सेंटर बनाने की है। ई-लर्निंग पर भी जोर दिया जाएगा। निर्भय शर्मा यूपी के हैं और आगरा उनकी कर्मभूमि रह चुकी है। उन्होंने 40 वर्ष सेना में सेवा दी है।
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केंद्रीय हिंदी संस्थान के निदेशक प्रो. नंदकिशोर पांडेय ने बताया कि अध्येता शब्दकोश से विद्यार्थियों को हिंदी भाषा सीखने में आसानी होगी। संस्थान 40 कोश पर काम कर रहा है। 10 तैयार हो चुके हैं। 20 ऐसी भाषाओं के कोश तैयार कराए जा रहे, जिनको 10 लाख से भी कम लोग बोलते हैं, 10 ऐसी भाषाओं के अध्येता कोश होंगे, जिनको लाख से भी कम लोग बोलते हैं। उन्होंने कहा कि दुनिया से जुड़ने के लिए अंग्रेजी के साथ हिंदी भाषा भी जरूरी है।
अध्यक्षता केंद्रीय हिंदी शिक्षा मंडल, आगरा के उपाध्यक्ष डा. कमल किशोर गोयनका ने की। उन्होंने राज्यपाल के समक्ष मिजोरम में हिंदी की राष्ट्रीय कार्यशाला कराने का प्रस्ताव रखा। कुलसचिव डा. चंद्रकांत त्रिपाठी ने धन्यवाद ज्ञापित किया। संचालन प्रो. बीना शर्मा ने किया। प्रो. रामवीर, प्रो. महेंद्र सिंह राना, प्रो. हरीशंकर, डा. त्योत्सना रघुवंशी आदि की मौजूदगी रही।
भंवरों के गुन-गुन से सीखो....
केंद्रीय हिंदी संस्थान के विद्यार्थियों ने सांस्कृतिक छटा बिखेरी। मिजोरम के छात्रों ने बंबो नृत्य किया। विदेशी छात्राओं ने कथक की सुंदर प्रस्तुति दी। श्रीलंका की छात्राओं ने ‘भंवरों की गुन-गुन से सीखो, गीत खुशी के गाना’ गीत गाया।
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राज्यपाल ने कहा कि मिजोरम सहित अन्य पूर्वोत्तर राज्यों में प्रतिभाएं बहुत हैं। यह निकलकर सामने भी आ रही हैं। यहां हिंदी भाषा के प्रसार की जरूरत है। इसका लाभ न केवल पूर्वोत्तर राज्यों को, बल्कि पूरे देश को मिलेगा। हिंदी विश्व में तीसरी सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषा है। चीन के लोगों ने समय की जरूरत को समझते हुए अंग्रेजी बोलना सीखा। अब बड़ी संख्या में लोग हिंदी भाषा सीख रहे हैं। पूर्वोत्तर राज्यों के लिए उन्होंने सड़क आदि के साथ डिजिटल, सोशल के साथ हिंदी भाषा की कनेक्टिविटी बढ़ाने की जरूरत बताई।
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निर्भय शर्मा ने मिजोरम की जलवायु और वहां के लोगों की सराहना की। बताया कि मिजोरम में ‘क्लासलेस और कास्टलेस’ सोसाइटी है। हिंदी भाषा के प्रचार के लिए किए जा रहे केंद्रीय हिंदी संस्थान के प्रयास की उन्होंने सराहना की। बताया कि उनकी कोशिश मिजोरम में हिंदी भाषा के रीजनल सेंटर बनाने की है। ई-लर्निंग पर भी जोर दिया जाएगा। निर्भय शर्मा यूपी के हैं और आगरा उनकी कर्मभूमि रह चुकी है। उन्होंने 40 वर्ष सेना में सेवा दी है।
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केंद्रीय हिंदी संस्थान के निदेशक प्रो. नंदकिशोर पांडेय ने बताया कि अध्येता शब्दकोश से विद्यार्थियों को हिंदी भाषा सीखने में आसानी होगी। संस्थान 40 कोश पर काम कर रहा है। 10 तैयार हो चुके हैं। 20 ऐसी भाषाओं के कोश तैयार कराए जा रहे, जिनको 10 लाख से भी कम लोग बोलते हैं, 10 ऐसी भाषाओं के अध्येता कोश होंगे, जिनको लाख से भी कम लोग बोलते हैं। उन्होंने कहा कि दुनिया से जुड़ने के लिए अंग्रेजी के साथ हिंदी भाषा भी जरूरी है।
अध्यक्षता केंद्रीय हिंदी शिक्षा मंडल, आगरा के उपाध्यक्ष डा. कमल किशोर गोयनका ने की। उन्होंने राज्यपाल के समक्ष मिजोरम में हिंदी की राष्ट्रीय कार्यशाला कराने का प्रस्ताव रखा। कुलसचिव डा. चंद्रकांत त्रिपाठी ने धन्यवाद ज्ञापित किया। संचालन प्रो. बीना शर्मा ने किया। प्रो. रामवीर, प्रो. महेंद्र सिंह राना, प्रो. हरीशंकर, डा. त्योत्सना रघुवंशी आदि की मौजूदगी रही।
भंवरों के गुन-गुन से सीखो....
केंद्रीय हिंदी संस्थान के विद्यार्थियों ने सांस्कृतिक छटा बिखेरी। मिजोरम के छात्रों ने बंबो नृत्य किया। विदेशी छात्राओं ने कथक की सुंदर प्रस्तुति दी। श्रीलंका की छात्राओं ने ‘भंवरों की गुन-गुन से सीखो, गीत खुशी के गाना’ गीत गाया।