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Agra: 10 से ज्यादा स्कूलों को नोटिस, फिर भी आरटीई में नहीं मिले बच्चों को दाखिले; अब अभिभावकों ने की ये मांग
Sat, 18 Jul 2026 11:24 AM IST
Arun Parashar
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
Published by: Arun Parashar
Updated Sat, 18 Jul 2026 11:24 AM IST
सार
शिक्षा का अधिकार के तहत बच्चों को स्कूल में प्रवेश नहीं मिल पा रहा है। अब तक 10 से अधिक निजी स्कूल संचालकों को नोटिस जारी किए जा चुके हैं। बावजूद इसके अभिभावक स्कूल और शिक्षा विभाग के कार्यालय के चक्कर लगाने को मजबूर हैं।
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School Admission
- फोटो : freepik
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विस्तार
आगरा में शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम के तहत चयनित बच्चों के दाखिले पर निजी स्कूलों की मनमानी जारी है। बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) डॉ. राकेश सिंह की ओर से कार्रवाई करते हुए अब तक 10 से अधिक निजी स्कूल संचालकों को नोटिस जारी किए जा चुके हैं। इसके बावजूद कई स्कूलों में चयनित बच्चों का प्रवेश नहीं हो सका है।
अभिभावक राहुल बताते है कि बच्चों का नाम लॉटरी में आने के बाद भी स्कूल कभी सीट न होने, कभी दस्तावेजों की कमी तो कभी अन्य कारण बताकर दाखिला टाल रहे हैं। कई अभिभावक रोजाना स्कूलों और बेसिक शिक्षा विभाग के चक्कर काटने को मजबूर हैं। जुलाई का आधा महीना बीतने के बाद भी बच्चों की पढ़ाई शुरू नहीं हो पाई है।
बीएसए डॉ. राकेश सिंह ने आरटीई के तहत चयनित बच्चों का तत्काल प्रवेश सुनिश्चित कराने के लिए संबंधित स्कूलों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। साथ ही स्पष्ट किया गया है कि आदेशों की अवहेलना करने वाले विद्यालयों के खिलाफ आरटीई अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी। वहीं अभिभावकों का कहना है कि नोटिस के बजाय बच्चों को तत्काल प्रवेश दिलाया जाए, ताकि उनका शैक्षणिक सत्र प्रभावित न हो।
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अभिभावक राहुल बताते है कि बच्चों का नाम लॉटरी में आने के बाद भी स्कूल कभी सीट न होने, कभी दस्तावेजों की कमी तो कभी अन्य कारण बताकर दाखिला टाल रहे हैं। कई अभिभावक रोजाना स्कूलों और बेसिक शिक्षा विभाग के चक्कर काटने को मजबूर हैं। जुलाई का आधा महीना बीतने के बाद भी बच्चों की पढ़ाई शुरू नहीं हो पाई है।
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बीएसए डॉ. राकेश सिंह ने आरटीई के तहत चयनित बच्चों का तत्काल प्रवेश सुनिश्चित कराने के लिए संबंधित स्कूलों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। साथ ही स्पष्ट किया गया है कि आदेशों की अवहेलना करने वाले विद्यालयों के खिलाफ आरटीई अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी। वहीं अभिभावकों का कहना है कि नोटिस के बजाय बच्चों को तत्काल प्रवेश दिलाया जाए, ताकि उनका शैक्षणिक सत्र प्रभावित न हो।
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