#LadengeCoronaSe: आगरा के 258 मासूमों ने हंसते-खेलते दी कोरोना महामारी को मात
कोरोना संक्रमित होने के बाद भी बच्चों की धमाचौकड़ी में कोई कमी नहीं आई। वे न कोरोना से डरें और न ही किसी को डराया। आखिर बच्चों ने हौसले से बीमारी को हरा दिया।
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आगरा में कोरोना वायरस की दूसरी लहर में अप्रैल और मई में 262 बच्चे संक्रमित हुए। 258 मासूमों ने हंसते-खेलते महामारी को मात दे दी। इनमें सामान्य लक्षण ही मिले। संक्रमित होने पर भी इनकी धमाचौकड़ी में कोई कमी नहीं आई। समय से दवा लेने को अपने खेल में शामिल कर लिया। मम्मी-पापा को भी याद दिलाया कि कब भाप लेनी है और कब दवा। कुछ ही समय में बीमारी हार मान गई।
‘कोई बात नहीं पापा, सब ठीक हो जाएंगे’
जयपुर हाउस निवासी अमरीश अग्रवाल ने बताया कि एक मई को पूरा परिवार संक्रमित हो गया था। रिपोर्ट पॉजिटिव आने के दो-तीन दिन तक तो बच्चों को संक्रमित होने की जानकारी नहीं दी, लेकिन बड़ी बेटी अयाति (11) को जुकाम-खराश होने पर दवा दी तो उसने पूछा, क्या पापा हमें भी कोरोना हो गया है।
तब बड़ी बेटी और और छोटी बेटी गौरी (6) को उनके संक्रमित होने के बारे में बताया। लेकिन वह घबराई नहीं, बोलीं सब ठीक हो जाएगा पापा। इतना कहते ही खेल में मगन हो गईं। संक्रमण के समय में दोनों बच्चे सामान्य दिनों की तरह डांस करना, पियानो बजाना, लूड़ो खेलते रहते थे।
कोरोना को कैसे हराया के सवाल पर अयाति का कहना था कि मम्मी-पापा ने जो कहा, वह किया। वैसे हम तो खेलते रहे। डरना नहीं चाहिए, खेलने और खुश रहने से कोरोना भाग जाता है। उन्होंने बताया कि पहले वह फास्ट फूड ज्यादा पसंद करती थी, जब संक्रमित हुईं तो डॉक्टरों ने बेहतर इम्युनिटी के लिए फल, हरी सब्जी और पौष्टिक भोजन के बारे में बताया। तब से फास्ट फूड की आदत छोड़ दी है।
खुद दवा-भाप लेकर हमें भी याद दिलाता
पंचवटी पार्श्वनाथ में रहने वाले बैंककर्मी सौरभ शर्मा ने बताया कि नौ साल का बेटा अग्रिम, 15 साल की बेटी समेत पूरा परिवार संक्रमित हो गया था। बेटे को बुखार और खराश हुई थी। रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद जब उसे जानकारी हुई, तो थोड़ा सहमा, लेकिन कुछ देर बाद सामान्य हो गया।
नियमित भाप और दवाएं लेता और हमें भी याद दिलाता। खेलकूद, टीवी देखने के साथ सामान्य दिनों की तरह ही रहा। कोरोना से ठीक होने के बाद भी मास्क, हाथों की साफ-सफाई के प्रति सजग है।
डॉक्टर की बात मानें, सफाई का ध्यान रखें: अग्रिम
अग्रिम बोले कि उन्होंने तो मम्मी-पापा की भी देखभाल की। दवाएं लीं, भाप ली और खाना खाया। बड़े लोग भूल जाते तो उनको भी मैं ही याद दिलाता था। डॉक्टर की बात मानने से बीमारी ठीक हो गई।
उन्होंने बताया कि पहले वह खेलकूद या फिर स्कूल से आने के बाद हाथों की साफ-सफाई पर ज्यादा जोर नहीं रहता था। कोरोना के बाद इसकी आदत बन गई है और महत्व भी समझने लगा हूं।