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Thalassemia: बच्चे की रहती है त्वचा और आंखें पीली? नजरअंदाज न करें, हो सकते हैं गंभीर थैलेसीमिया के संकेत
Fri, 08 May 2026 12:58 PM IST
Dhirendra Singh
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Fri, 08 May 2026 12:58 PM IST
सार
World Thalassemia Day 2026: डॉक्टरों के अनुसार बच्चों का मिट्टी, पेंट या प्लास्टर खाना और त्वचा-आंखों का पीला होना थैलेसीमिया के संकेत हो सकते हैं। गंभीर स्थिति में बार-बार रक्त चढ़ाने की जरूरत पड़ती है, जबकि एसएन मेडिकल कॉलेज में मरीजों के लिए निशुल्क इलाज और रक्त की सुविधा उपलब्ध है।
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थैलेसीमिया
- फोटो : Adobe Stock
विस्तार
बच्चा मिट्टी, दीवार पर पेंट की पपड़ी-प्लास्टर खा रहा है। त्वचा-आंखें पीली हो रही हैं और कमजोरी है तो इसे नजरअंदाज न करें। ये थैलेसीमिया के लक्षण हैं। ऐसे में तत्काल जांच कराते हुए बच्चे का इलाज कराएं। इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स (आईएपी) के चिकित्सकों का कहना है कि कई बार अभिभावक इसे कैल्शियम की सामान्य कमी मानकर नजरअंदाज करते हैं।
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आईएपी के अध्यक्ष डॉ. संजीव अग्रवाल ने बताया कि ये बीमारी माता-पिता के जरिये बच्चों में आती है। ये जेनेटिक रक्त विकार है। इसमें लाल रक्त कोशिकाएं जल्दी नष्ट होने से शरीर में हीमोग्लोबिन नहीं बन पाता। ऐसे में मरीज में खून की कमी होती है। खून न चढ़ाने पर जान का खतरा रहता है।
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इसमें बच्चे गमले से मिट्टी, पेंट की पपड़ी, सीमेंट का टुकड़ा खाने लगते हैं। रक्त की कमी से पीलिया होने के साथ कमजोरी बढ़ने लगती है। गंभीर स्थिति में चेहरे की हड्डियों में भी विकार आने लगते हैं। इससे बचने के लिए खून के रिश्ते में शादी करने से बचें और शादी से पहले जेनेटिक काउंसलिंग जरूर कराएं। माता-पिता वाहक हैं तो भ्रूण में रोग की जांच कराएं।
गंभीर थैलेसीमिया में एक साल की उम्र से रक्त की जरूरत
एसएन के बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ. पंकज कुमार ने बताया कि गंभीर थैलेसीमिया में एक साल की उम्र से ही रक्त चढ़ाने की जरूरत पड़ती है। बार-बार रक्त चढ़ाने से मरीज में आयरन की मात्रा अधिक होती है, इसको नियंत्रित करने के लिए भी इलाज चलता है। एसएन की थैलेसीमिया यूनिट प्रभारी डॉ. मधु सिंह ने बताया कि यहां 66 बच्चे पंजीकृत हैं। इनके निशुल्क इलाज और रक्त की व्यवस्था है।
एसएन के बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ. पंकज कुमार ने बताया कि गंभीर थैलेसीमिया में एक साल की उम्र से ही रक्त चढ़ाने की जरूरत पड़ती है। बार-बार रक्त चढ़ाने से मरीज में आयरन की मात्रा अधिक होती है, इसको नियंत्रित करने के लिए भी इलाज चलता है। एसएन की थैलेसीमिया यूनिट प्रभारी डॉ. मधु सिंह ने बताया कि यहां 66 बच्चे पंजीकृत हैं। इनके निशुल्क इलाज और रक्त की व्यवस्था है।
थैलेसीमिया मरीजाें के लिए निशुल्क रक्त उपलब्ध
लोकहितम ब्लड बैंक के महासचिव अखिलेश अग्रवाल ने बताया कि ब्लड बैंक में 70 बच्चे पंजीकृत हैं। इनके लिए हर महीने करीब 80-100 यूनिट रक्त की जरूरत पड़ती है। इन्हें निशुल्क रक्त उपलब्ध कराया जाता है। पीड़ित यहां पंजीकरण करा सकते हैं।
लोकहितम ब्लड बैंक के महासचिव अखिलेश अग्रवाल ने बताया कि ब्लड बैंक में 70 बच्चे पंजीकृत हैं। इनके लिए हर महीने करीब 80-100 यूनिट रक्त की जरूरत पड़ती है। इन्हें निशुल्क रक्त उपलब्ध कराया जाता है। पीड़ित यहां पंजीकरण करा सकते हैं।