फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Agra News ›   child marriage and poverty is causing malnutrition in agra

एक्सक्लूसिव: कम उम्र में शादी और गरीबी बन रही कुपोषण की वजह, बेटियां ज्यादा कुपोषित

Mon, 18 Jan 2021 10:21 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: मुकेश कुमार Updated Mon, 18 Jan 2021 10:21 AM IST
सार

आगरा में कुपोषण की चपेट में बचपन, बेटियों की संख्या ज्यादा
जिले में कुल 57,536 कुपोषित और 5373 अतिकुपोषित बच्चे हैं

विज्ञापन
child marriage and poverty is causing malnutrition in agra
सूखा रोग की मरीज सोना और पास में बैठी उसकी मां - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आगरा के टेढ़ी बगिया क्षेत्र की रहने वाली 25 साल की रूबी के चार बच्चे हैं। पति ऑटो चलाकर बमुश्किल 200 रुपये बचा पाता है। इसमें से चार बच्चों के लिए पाव भर दूध लेते हैं। गरीबी के कारण परिवार चलाना भी मुश्किल है। रूबी और उसके चारों बच्चे कुपोषित हैं।
विज्ञापन

 
रूबी ने बताया कि प्रसव कराने से पहले दो बार रक्त चढ़वाना पड़ता है। बच्चे को पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती करके इलाज करा रही हैं। रुबी का मामला ही नहीं, जिले में ऐसे और भी बच्चे व महिलाएं हैं, जिनमें गरीबी और कम उम्र में शादी कुपोषण की वजह बनी। जिला कार्यक्रम अधिकारी के यहां उपलब्ध डाटा के अनुसार इस समय जिले में 57,536 कुपोषित और 5373 अतिकुपोषित बच्चे हैं।
विज्ञापन


कुपोषण से हालत हुई खराब, बच्चे को चढ़ाना पड़ा रक्त
जिला अस्पताल में सुभाष नगर निवासी सोना का दो साल का बच्चा पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) में भर्ती है। उन्होंने बताया कि पति जूता फैक्टरी में काम करते हैं, महीने में चार हजार रुपये ही मिलते हैं। दो बच्चे हैं, परिवार के लिए खाने-पीने के भी लाले हैं, पौष्टिक भोजन कहां से खिलाएं। बच्चे को रक्त चढ़ाना पड़ा है।
विज्ञापन
विज्ञापन

बेटियों की सेहत ज्यादा खराब: ललितेश
एनआरसी की डायटीशियन ललितेश शर्मा ने बताया कि एनआरसी में आने वाले शिशुओं में बेटियों की संख्या अधिक है। अभिभावक बेटियों की सेहत के प्रति लापरवाह मिले। बीते साल एनआरसी में 50 बालक और 61 बालिकाएं भर्ती हुईं। कोरोना वायरस का भी असर रहा। जनवरी से मार्च तक 55, अप्रैल से जून तक 05, जुलाई से सितंबर तक 38 और अक्तूबर से दिसंबर तक 13 शिशु भर्ती हुए। 

उन्होंने बताया कि परिजन बेटा-बेटी के खानपान में अंतर करते हैं। बेटे को दूध दे देते हैं, लेकिन बेटी को कभी-कभार ही देते हैं। यहां तक कि यदि पहला बच्चा बेटा है और दूसरी बच्ची है, तो माताएं बच्ची को स्तनपान कराने के बजाय, बेटे को ही प्राथमिकता देती हैं।

परिजनों की काउंसिलिंग से कुपोषण में आएगी कमी: डॉ. नीता
एनआरसी प्रभारी डॉ. नीता चिवटे ने बताया कि महिलाएं कुपोषण के बारे में नहीं जानती हैं। यहां तक कि गर्भावस्था में क्या-क्या खाएं, छह माह के शिशु और इसके बाद क्या खिलाएं। इसकी जानकारी भी नहीं है। इनको जागरूक किया जाए तो कुपोषण से जंग में मदद मिलेगी।
 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed