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भगवान कृष्ण के बारे में मांगी गईं ऐसी जानकारियां, हैरत में मथुरा प्रशासन, नहीं सूझ रहा जवाब
न्यूज डेस्क, अमर उजाला मथुरा
Updated Tue, 02 Oct 2018 12:03 PM IST
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भगवान श्रीकृष्ण
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छत्तीसगढ़ के जिला बिलासपुर के एक व्यक्ति ने आरटीआई (जनसूचना अधिनियम) के तहत भगवान श्रीकृष्ण का जन्म प्रमाण पत्र मांगा है। इतना ही नहीं कृष्ण के भगवान होने की प्रमाणिकता भी उपलब्ध कराने को कहा है।
इस आरटीआई से जिला प्रशासन हैरत में है। अफसर यह समझ नहीं पा रहे हैं कि आरटीआई दाखिल करने वाले को जवाब क्या दिया जाए। चूंकि मामला आस्था से जुड़ा हुआ है। इसलिए आरटीआई को पेंडिंग में डाल दिया गया है।
जिला बिलासपुर के गांव गुमा निवासी जैनेंद्र कुमार गेंदले ने मथुरा प्रशासन को 10 रुपये का पोस्टल आर्डर भेजा है। इसमें उन्होंने लिखा है कि तीन सितंबर को जन्माष्टमी का अवकाश घोषित किया गया था। देशभर में जन्माष्टमी मनाई गई।
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इस आरटीआई से जिला प्रशासन हैरत में है। अफसर यह समझ नहीं पा रहे हैं कि आरटीआई दाखिल करने वाले को जवाब क्या दिया जाए। चूंकि मामला आस्था से जुड़ा हुआ है। इसलिए आरटीआई को पेंडिंग में डाल दिया गया है।
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जिला बिलासपुर के गांव गुमा निवासी जैनेंद्र कुमार गेंदले ने मथुरा प्रशासन को 10 रुपये का पोस्टल आर्डर भेजा है। इसमें उन्होंने लिखा है कि तीन सितंबर को जन्माष्टमी का अवकाश घोषित किया गया था। देशभर में जन्माष्टमी मनाई गई।
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ये जानकारी मांगी
गेंदले ने कहा है कि जन्माष्टमी पर अवकाश था। लिहाजा उसे भगवान श्रीकृष्ण के जन्म प्रमाणपत्र की प्रमाणिक कापी उपलब्ध कराई जाए। जनसूचना अधिनियम के तहत मांगी जानकारी में कृष्ण के भगवान होने का कोई प्रमाण उपलब्ध कराने को भी कहा है।
उसने लिखा कि भगवान कृष्ण का गांव कौन सा था। कहां-कहां उन्होंने लीलाएं कीं, इस बारे में भी पूछा गया है। इस तरह के अजीबोगरीब सवाल का जवाब देने में अधिकारी भी परेशान हैं। आखिर क्या जवाब दिया जाए।
फिलहाल उसके सवाल को पेंडिंग में डाल दिया गया है। बताया जाता है कि जनसूचना अधिनियम के तहत पहले भी इस प्रकार के सवाल पूछे गए हैं। एडीएम कानून व्यवस्था रमेशचंद ने कहा कि इस तरह के सवाल का क्या जवाब दिया जाए।
उसने लिखा कि भगवान कृष्ण का गांव कौन सा था। कहां-कहां उन्होंने लीलाएं कीं, इस बारे में भी पूछा गया है। इस तरह के अजीबोगरीब सवाल का जवाब देने में अधिकारी भी परेशान हैं। आखिर क्या जवाब दिया जाए।
फिलहाल उसके सवाल को पेंडिंग में डाल दिया गया है। बताया जाता है कि जनसूचना अधिनियम के तहत पहले भी इस प्रकार के सवाल पूछे गए हैं। एडीएम कानून व्यवस्था रमेशचंद ने कहा कि इस तरह के सवाल का क्या जवाब दिया जाए।