अब पुलिस के साथ नहीं होंगे 'चेतन' और 'ज्वाला', 20 साल की शानदार सेवा के बाद हो रहे 'जुदा'
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अब आगरा के भीड़ भरे आयोजनों में घुड़सवार पुलिस तो दिखेगी पर 'चेतन' और 'ज्वाला' नहीं होंगे। 20 साल की शानदार सेवा के बाद ये दोनों घोड़े पुलिस से अलग हो रहे हैं। इस सेवाकाल में इन्होंने गणतंत्र दिवस परेड से लेकर ताजनगरी के बड़े आयोजनों तक में मुस्तैदी से ड्यूटी की।
भीड़भाड़ वाले इलाकों व्यवस्था बनाए रखने में योगदान किया। बता दें, चेतन और ज्वाला घुड़सवार पुलिस दस्ते के वे घोड़े हैं जो पुलिस मानक के हिसाब से अब सवारी योग्य नहीं रहे। निष्प्रयोज्य घोषित इन घोड़ों को नीलाम करने की तैयारी है।
पुलिस लाइन मैदान में घुड़सवार पुलिस का कार्यालय है। यहीं पर घुड़शाला भी है। ज्वाला और चेतन सबसे पुराने हैं। घुड़सवार पुलिस प्रभारी प्रेमबाबू ने बताया कि घोड़ों से 20 साल तक ही सेवा ली जाती है। इसके बाद उन्हें शारीरिक दक्षता और मेडिकल रिपोर्ट के बाद ही सेवा विस्तार दिया जाता है।
जिसे सेवा विस्तार नहीं मिला, मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर निष्प्रयोज्य घोषित कर दिया जाता है। इसके बाद उन्हें नीलाम करने की प्रक्रिया शुरू कराई जाती है। ज्वाला और चेतन की सवारी अब खतरनाक हो सकती है। मेडिकल के बाद इनको निष्प्रयोज्य घोषित कर दिया गया।
चेतन : पांच साल के देशी नस्ल के इस घोड़े को रामपुर से खरीदा गया था। रंग गहरा काला और ऊंचाई करीब पांच फुट है।
ज्वाला : यह भी पांच साल की उम्र में आया। देशी नस्ल के इस घोड़े का भी रंग भी काला और ऊंचाई तकरीबन पांच फुट है।
हर दिन खर्च होते हैं 500 रुपये
चेतन-ज्वाला के न रहने पर पुलिस के पास 15 घोड़े रह जाएंगे। विभाग के एक घोड़े पर हर दिन लगभग 500 रुपये खर्च किए जाते हैं। उन्हें प्रतिदिन एक किलो चना, दो किलो जौ, एक किलो चोकर, 30 ग्राम नमक और 15 से 25 किलो हरी और सूखी घास दी जाती है। घोड़ों की मुरादाबाद में ट्रेनिंग के बाद इन्हें पुलिस लाइन भेजा जाता है। सुबह और शाम पुलिसकर्मी घोड़ों से गश्त करते हैं।
प्रमुख ड्यूटी कर चुके हैं दोनों
ज्वाला और चेतन को अन्य घोड़ों के साथ शहर के बड़े आयोजन रामबरात, कैलाश मेला, डा. भीमराव आंबेडकर शोभायात्रा में ड्यूटी ली जा चुका है। वे गणतंत्र दिवस की परेड में भी हर साल शामिल होते थे।