फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Agra News ›   Chaos: Stretchers pulling attendants, patients lifting in lap

अव्यवस्था: तीमारदार खींच रहे स्ट्रेचर, गोद में उठा रहे मरीज

Mon, 19 Jul 2021 11:03 PM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Mon, 19 Jul 2021 11:03 PM IST
विज्ञापन
Chaos: Stretchers pulling attendants, patients lifting in lap
े19एमएनपी-20-जिला अस्पताल में स्ट्रेचर न मिलने पर पीठ पर मरीज को लादकर ले जाते परिजन - फोटो : MAINPURI
मैनपुरी। जिला अस्पताल में बेहतर इलाज और सुविधाओं का दावा किया जाता है। हालांकि चिकित्सकों की कमी से बेहतर इलाज लोगों को नसीब नहीं हो रहा है। इसके साथ ही मूलभूत सुविधाओं की भी दरकार है। अस्पताल में मरीजों के तीमारदारों को खुद स्ट्रेचर खींचना पड़ता है। कभी-कभी तो स्ट्रेचर न मिलने पर तीमारदार मरीजों को गोद में लेकर घूमते नजर आते हैं। तीमारदारों की दशा पर न तो अस्पताल प्रशासन ध्यान दे रहा है और न ही वार्ड ब्वॉय। सोमवार को भी जिला अस्पताल में इसी तरह का नजारा नजर आया।
विज्ञापन

----
पिता ने खींचा स्ट्रेचर
शहर के मोहल्ला नगरिया निवासी जानकी देवी को पेट दर्द होने पर जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। चिकित्सक ने अल्ट्रासाउंड कराने की सलाह दी। सोमवार को पिता सर्वेश खुद बेटी को स्ट्रेचर पर बिठाकर महिला अस्पताल स्थित अल्ट्रासाउंड कक्ष तक ले गया। उनकी मदद के लिए न तो वार्ड ब्वॉय आगे आए और न ही अन्य किसी कर्मचारी ने मदद की।
विज्ञापन

----
मां को पीठ पर लेकर आया बेटा
गांव देवामई निवासी सुनीता देवी के पैर में चोट लग गई थी। सोमवार को बेटा विनोद कुमार उन्हें इलाज के लिए अस्पताल लेकर आया। यहां स्ट्रेचर नहीं मिला। इधर उधर स्ट्रेचर की तलाश करके जब वह थक गया तो उसने अपनी मां को पीठ पर बिठा लिया और चिकित्सक के कक्ष तक पहुंचा। विनोद का कहना था कि क्या वार्ड ब्वॉय को वेतन बैठने का दिया जाता है। अफसरों को उनके कार्य की निगरानी करनी चाहिए।
विज्ञापन
विज्ञापन

----
इमरजेंसी में नहीं मिला स्ट्रेचर
गांव जगतपुर निवासी चंद्रशेखर खपरैल से गिरकर घायल हो गया। परिजन सोमवार को इमरजेंसी में लेकर पहुंचे। यहां उसे प्राथमिक उपचार दे दिया गया। इसके बाद ओपीडी में इलाज लेने की सलाह दी गई। 60 वर्षीय चंद्रशेखर को यहां स्ट्रेचर नहीं मिला। बेटा दिनेश कुमार अन्य परिजनों की मदद से हाथ पकड़कर उन्हें ओपीडी के दस नंबर कक्ष तक ले गया।
----
मरीजों को इमरजेंसी से वार्ड में शिफ्ट करने की जिम्मेदारी वार्ड ब्वॉय की है। यदि ब्वॉय के स्तर से लापरवाही की जा रही है तो उनके खिलाफ कार्रवाई होगी।
डॉ. अरविंद कुमार गर्ग, सीएमएस
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed