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इस अस्पताल में मरीजों को दवाओं के स्थान पर मिल रही दुआएं

Mon, 25 Dec 2017 08:07 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला मैनपुरी
ब्यूरो/अमर उजाला मैनपुरी Updated Mon, 25 Dec 2017 08:07 PM IST
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chaos in kishani community health centre in mainpuri
सीएचसी किशनी - फोटो : अमर उजाला
मैनपुरी के किशनी क्षेत्र के बीस हजार लोगों के लिए बने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को खुद इलाज की जरूरत है। यहां डॉक्टर के नाम पर मात्र एक प्रभारी चिकित्साधिकारी हैं। प्रतिदिन 200 से 300 मरीज पहुंच रहे हैं। जिन्हें मात्र एक डॉक्टर उचित उपचार कैसे दे। मजबूरी में लोग निजी डॉक्टरों के यहां उपचार करा रहे हैं। 
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कस्बा में पहले पीएचसी थी जिससे लोगो को पूरा इलाज नही मिल पाता था। पूर्व की सरकार में पीएचसी को सीएचसी में बदल दिया गया। भवन का तो निर्माण हो गया लेकिन डॉक्टर के नाम पर नतीजा वही रहा। यहां डॉक्टरों के नौ पद स्वीकृत हैं। लेकिन अकेले प्रभारी चिकितसाधिकारी अस्पताल, कोर्ट बैठकें कर रहे हैं। उनकी  गैर मौजूदगी में संविदा पर तैनात चिकित्सक ही मरीजों को देखकर उपचार दे रहे हैं। 
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यहां न तो कोई सर्जन और न ही विशेषज्ञ चिकित्सक। गंभीर मरीज या तो प्राइवेट चिकित्सक से या सैफई जाकर इलाज कराते हैं। मारपीट तथा सामान्यता मरीजों को इलाज देने के बाद एक्सरे के लिए मैनपुरी भेजा जाता है और मशीन खराब होने पर वह फिरोजाबाद भेजे जाते है। क्षेत्र के आबादी लगभग 20 हजार है। 
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मुख्य केंद्र पर संविदा पर डॉक्टर रश्मी जौहरी तथा एक अन्य डॉक्टर के अलावा कोई भी चिकित्सक नहीं है। स्थानीय लोगो कई बार अधिकारियों से लेकर मुख्यमंत्री तक बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की मांग कर चुके हैं लेकिन नतीजा शून्य रहा। अस्पताल में आने वाले मरीजों को दवा की जगह दुआ का सहारा है। उपचार देने वाले डॉक्टर ही पर्याप्त नहीं है तो स्टोर में रखीं दवाएं औचित्य विहीन है।

टेक्नीशियन करते हैं खून की जांच

chaos in kishani community health centre in mainpuri
रक्त की जांच - फोटो : demo pic
सीएचसी में पैथोलोजिस्ट की तैनाती नही है। पैथोलोजिस्ट के न होने पर टेक्नीशियन ही खून की जांच करते हैं। जांच करने के बाद टेक्नीशियन ही जांच रिपोर्ट मरीज को देते है। वहीं, हड्डी रोग विशेषयज्ञ न होने से मरीजों को खासी परेशानी उठानी पड़ रही है। हाथ या पैर टूटने पर प्लास्टर होना भी संभव नही है।
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