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वृंदावनः चंद्रोदय मंदिर में चैतन्य महाप्रभु की पादुका का पुष्पाभिषेक
Tue, 22 Oct 2019 04:35 PM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Tue, 22 Oct 2019 04:35 PM IST
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चैतन्य महाप्रभु की पादुका का पुष्पाभिषेक
- फोटो : अमर उजाला
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वृंदावन के चंद्रोदय मंदिर में चैतन्य महाप्रभु की चरण पादुकाएं पहुंच गई हैं। चरण पादुकाओं को पश्चिम बंगाल के नवद्वीप से सोमवार को वृंदावन लाया गया। यहां चरण पादुका का भव्य स्वागत कर उन्हें मंदिर प्रांगण में स्थापित कर महाभिषेक किया गया।
भागवान श्री चैतन्य महाप्रभु की दिव्य चरण पादुका के दर्शन के लिए चंद्रोदय मंदिर प्रांगण में प्रातः काल से ही भक्तों का तांता लगा रहा। इस पादुकोत्सव के लिए देश के विभिन्न राज्यों आए भक्तों ने चरण पादुका के अष्टयाम सेवा के दर्शन किये।
इस अवसर पर भक्त लोचन दास ठाकुर जी द्वारा लिखित गीत परमकर्ण एवं सर्वभूमा भट्टाचार्य द्वारा लिखित श्री पवित्रसुताष्टकम् का गायन किया गया। इसके बाद चैतन्य महाप्रभु के 108 नामों का उच्चारण करते हुए पुष्प अर्चन एवं स्वर्ण अर्चन सेवा को सम्पन्न किया गया।
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भागवान श्री चैतन्य महाप्रभु की दिव्य चरण पादुका के दर्शन के लिए चंद्रोदय मंदिर प्रांगण में प्रातः काल से ही भक्तों का तांता लगा रहा। इस पादुकोत्सव के लिए देश के विभिन्न राज्यों आए भक्तों ने चरण पादुका के अष्टयाम सेवा के दर्शन किये।
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इस अवसर पर भक्त लोचन दास ठाकुर जी द्वारा लिखित गीत परमकर्ण एवं सर्वभूमा भट्टाचार्य द्वारा लिखित श्री पवित्रसुताष्टकम् का गायन किया गया। इसके बाद चैतन्य महाप्रभु के 108 नामों का उच्चारण करते हुए पुष्प अर्चन एवं स्वर्ण अर्चन सेवा को सम्पन्न किया गया।
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संस्था प्रमुख मधु पंडित दास ने बताया कि चैतन्य महाप्रभु की पादुकाएं नवद्वीप स्थित धामेश्वर मंदिर में विराजमान रहती हैं। ये पादुकाएं संन्यास ग्रहण करने से पूर्व चैतन्य महाप्रभु ने अपनी पत्नी देवी विष्णुप्रिया को भेंट की थीं।
देवी विष्णुप्रिया ने जीवन भर इन पादुकाओं की सेवा की थी। चैतन्य महाप्रभु 504 वर्ष पहले वृंदावन आए थे। अब बांकेबिहारी की नगरी में उनकी पादुकाएं पहुंची हैं। चैतन्य महाप्रभु की चरण पादुकाएं 25 अक्टूबर की शाम को नवद्वीप पश्चिम बंगाल वापस लौट जाएंगी।
देवी विष्णुप्रिया ने जीवन भर इन पादुकाओं की सेवा की थी। चैतन्य महाप्रभु 504 वर्ष पहले वृंदावन आए थे। अब बांकेबिहारी की नगरी में उनकी पादुकाएं पहुंची हैं। चैतन्य महाप्रभु की चरण पादुकाएं 25 अक्टूबर की शाम को नवद्वीप पश्चिम बंगाल वापस लौट जाएंगी।