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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Agra News ›   Case of possession of valuable land there is not a single name of employee who prepared fake documents

बेशकीमती जमीन पर कब्जे का मामला: चार्जशीट में अपनों को बचा गए अफसर, 15 में से एक भी कर्मचारी का नाम नहीं

Wed, 15 May 2024 10:20 AM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा Published by: धीरेन्द्र सिंह Updated Wed, 15 May 2024 10:20 AM IST
सार

जगदीशपुरा में बोदला मार्ग पर जिस बेशकीमती जमीन पर कब्जे के लिए निर्दोश परिवार को जेल भेजा गया था, उस मामले में चल रही कार्रवाई में अभी भी ढ़िलाई बरती जा रही है। जानें पूरा मामला...

 

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Case of possession of valuable land there is not a single name of employee who prepared fake documents
जगदीशपुरा थाना - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आगरा के बोदला जमीन प्रकरण में 15 के खिलाफ चार्जशीट लगाई गई। आठ आरोपियों को डकैती और कब्जे में आरोपी बनाया गया। तत्कालीन एसओ को साजिश में शामिल बताया गया। जमीन की कथित मालिक बनकर आई उमा देवी सहित 6 फर्जी दस्तावेज तैयार करने के आरोपी हैं। मगर, मृत्यु और वारिसान प्रमाण पत्र बनाने वाले अधिकारी और कर्मचारियों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। सिर्फ थाना हरीपर्वत में मुकदमा दर्ज कराकर खानापूर्ति कर दी गई।
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जगदीशपुरा में बोदला मार्ग पर बैनारा फैक्ट्री के पास 10 हजार वर्ग गज जमीन पर कब्जा किया गया था। इसके लिए दो फर्जी मुकदमे दर्ज कर केयरटेकर रवि कुशवाहा सहित उसके परिवार के 5 को जेल भेजा गया था। जमानत पर बाहर आने के बाद केयरटेकर ने लखनऊ तक शिकायत की थी। इसके बाद मामले की जांच हुई। जमीन की कथित मालकिन बनकर आईं उमा देवी ने डकैती, कब्जे सहित अन्य धारा में मुकदमा दर्ज कराया। इसमें पुलिस ने पिछले दिनों चार्जशीट लगा दी। इसमें 15 को आरोपी बनाया गया है।
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बिल्डर कमल चौधरी, उसके बेटे आर्यन उर्फ धीरू, पुरुषोत्तम पहलवान, भूपेंद्र पहलवान, किशोर बघेल, अमित अग्रवाल, आनंद जुरैल, नेम कुमार जैन को डकैती, कब्जे सहित अन्य धारा में आरोपी बनाया गया। वहीं तत्कालीन एसओ जितेंद्र सिंह को आपराधिक साजिश का आरोपी माना गया। वहीं उमा देवी, धर्मेंद्र, रवि कुशवाहा, शंकरिया, मोहित उर्फ किशन कुमार, राजू को धोखाधड़ी और फर्जी दस्तावेज तैयार करने में आरोपी माना गया। उनके खिलाफ साक्ष्य भी हैं।
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पुलिस का कहना है कि नगर निगम से टहल सिंह और जसवीर को मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाया गया। तहसील से वारिसान प्रमाण पत्र बनाया गया। जांच में दस्तावेज फर्जी निकले। यह दस्तावेज फर्जी बनाने में जिन कर्मचारियों की भूमिका रही, उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई। केस में आरोपी नहीं बनाया गया। उन पर अफसर मेहरबानी दिखा रहे हैं।

थाना जगदीशपुरा के प्रभारी निरीक्षक आनंदवीर सिंह ने बताया कि जमीन मामले में विवेचना प्रचलित है। नगर निगम से मृत्यु प्रमाण पत्र जारी होने के मामले में थाना हरीपर्वत में मुकदमा दर्ज कराया गया है। इसकी भी विवेचना की जा रही है। अभी केस में जितने भी आरोपी है, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।


गांजा और शराब कहां से आए, नहीं चला पता
पुलिस ने दो फर्जी मुकदमे गांजा और शराब बरामद कर लिखे थे। इस कारण 5 लोगों को जेल में रहना पड़ा था। इस मामले में आबकारी निरीक्षक पर कार्रवाई हुई थी। गांजा बरामद करने के लिए एक वीडियो को आधार माना गया था। मगर, यह वीडियो कहां से, किसने और क्यों बनाया? यह आज तक पुलिस पता नहीं कर सकी है। यह भी पता नहीं चल सका कि गांजा और शराब कहां से लाई गई थी?
 
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