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UP: आगरा विवि के चार कर्मचारियों पर दलित उत्पीड़न का मुकदमा, पूर्व संविदा कर्मचारी ने लगाए गंभीर आरोप
Wed, 29 Oct 2025 09:32 AM IST
धीरेन्द्र सिंह
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Wed, 29 Oct 2025 09:32 AM IST
सार
आगरा विश्वविद्यालय के चार कर्मचारियों के खिलाफ दलित उत्पीड़न और अन्य आरोपों में परिवाद दर्ज हुआ है। मामले में वादी के बयान 30 अक्तूबर को दर्ज किए जाएंगे।
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आगरा विश्वविद्यालय।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
आगरा के डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के पूर्व संविदा कर्मचारी ने दलित उत्पीड़न सहित अन्य आरोपों के मामले में 4 कर्मचारियों के खिलाफ परिवाद दर्ज कराया है। विशेष न्यायाधीश एससी/एसटी एक्ट पुष्कर उपाध्याय ने परिवाद दर्ज करने के आदेश दिए हैं। मामले में वादी के बयान 30 अक्तूबर को दर्ज किए जाएंगे।
थाना सिकंदरा क्षेत्र के राधिका विहार निवासी डॉ. अनिल कुमार ने अदालत में प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया था। उनका कहना है कि वे पूर्व में डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के पर्यावरण अध्ययन विभाग में संविदा पर कार्यरत थे। उन्होंने अपनी संविदा अवधि बढ़ाने और स्थायीकरण के लिए कुलाधिपति को प्रार्थना पत्र दिया था। इस संबंध में निस्तारण के लिए एक समिति का गठन किया गया था।
एक जुलाई 2024 को जब वे आवासीय इकाई के ऑफिस सुपरिटेंडेंट मधु सूदन कृष्ण से मिलने पहुंचे तो उन्होंने जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करते हुए अभद्रता की। विरोध करने पर ऑफिस कर्मचारियों सौरभ दुबे और शिवम सिंह सहित अन्य ने मारपीट कर उन्हें ऑफिस से बाहर निकाल दिया। इसके अलावा दोबारा आने पर जान से मारने की धमकी दी। इस पर डॉ. अनिल ने मुख्यमंत्री पोर्टल और पुलिस आयुक्त से शिकायत की। अदालत ने मामले पर विश्वविद्यालय प्रशासन और पुलिस से आख्या तलब की है।
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थाना सिकंदरा क्षेत्र के राधिका विहार निवासी डॉ. अनिल कुमार ने अदालत में प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया था। उनका कहना है कि वे पूर्व में डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के पर्यावरण अध्ययन विभाग में संविदा पर कार्यरत थे। उन्होंने अपनी संविदा अवधि बढ़ाने और स्थायीकरण के लिए कुलाधिपति को प्रार्थना पत्र दिया था। इस संबंध में निस्तारण के लिए एक समिति का गठन किया गया था।
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एक जुलाई 2024 को जब वे आवासीय इकाई के ऑफिस सुपरिटेंडेंट मधु सूदन कृष्ण से मिलने पहुंचे तो उन्होंने जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करते हुए अभद्रता की। विरोध करने पर ऑफिस कर्मचारियों सौरभ दुबे और शिवम सिंह सहित अन्य ने मारपीट कर उन्हें ऑफिस से बाहर निकाल दिया। इसके अलावा दोबारा आने पर जान से मारने की धमकी दी। इस पर डॉ. अनिल ने मुख्यमंत्री पोर्टल और पुलिस आयुक्त से शिकायत की। अदालत ने मामले पर विश्वविद्यालय प्रशासन और पुलिस से आख्या तलब की है।
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