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ट्रांसपोर्टर की माैत की गहरी साजिश: पशु चिकित्सा अधिकारी के भाई के नाम पर थी हत्या में इस्तेमाल कार, जांच तेज

Sun, 17 May 2026 08:59 AM IST
Arun Parashar संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा Published by: Arun Parashar Updated Sun, 17 May 2026 08:59 AM IST
सार

घटना में प्रयुक्त कार जालौन निवासी प्रेम नारायण के नाम थी। वह आगरा में ही एक गोशाला में काम करता है। साथ ही पुलिस को रवि यादव की घटनास्थल के आसपास लोकेशन मिली। तथ्यों के आधार पर पुलिस ने रवि को नामजद करते हुए मामले को हत्या की धारा में बदल दिया।

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car used in transporter murder was registered in name of a veterinary officer brother in agra
ट्रांसपोर्टर का फाइल फोटो। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

आगरा के शाहगंज क्षेत्र में 4 अप्रैल की सुबह ट्रांसपोर्टर असगर अली की कार से टक्कर मारकर हत्या के मामले में पुलिस ने घटना में प्रयुक्त कार बरामद कर ली है। मौजूदा समय में कार शहर की एक गोशाला में काम करने वाले जालौन के मूल निवासी युवक के नाम है। हालांकि पुलिस की जांच में खुलासा हुआ है कि उस युवक से पहले कार नगर निगम के पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. अजय सिंह यादव के भाई के नाम दर्ज थी।
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घटना से कुछ दिन पहले ही अजय के भाई ने कार युवक के नाम ट्रांसफर की थी। इस तथ्य के सामने आने के बाद अब पुलिस अजय और उनके भाई से पूछताछ की तैयारी कर रही है। शाहगंज के मेवाती गली निवासी ट्रांसपोर्टर असगर अली का शव मल्ल का चबूतरा क्षेत्र में मिला था। शुरू में पुलिस इसे हादसा मान रही थी लेकिन परिजन ने दावा किया कि असगर ने महिला अधिकारी के खिलाफ शासन में शिकायत की थी जबकि अधिकारी ने असगर पर रंगदारी मांगने का आरोप लगाकर प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इसी से उनमें विवाद था।
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मौत से पहले ही ट्रांसपोर्टर ने अजय के करीबी यमुनापार निवासी रवि यादव व मंटोला निवासी कामरान वारसी के खिलाफ प्रेस वार्ता कर 4 अप्रैल को पुलिस से शिकायत करने का एलान किया था। हालांकि इससे पहले तड़के ही असगर की मौत हो गई। परिजन ने जीएसटी अधिकारी, उनके पति डॉ. अजय यादव, यमुनापार निवासी रवि यादव व मंटोला निवासी कामरान वारसी पर साजिश कर हत्या का आरोप लगाया था। जांच में पुलिस को एक सीसीटीवी फुटेज मिली, जिसमें पैदल जा रहे असगर को एक कार पीछे से जोरदार टक्कर मारकर जाती दिखी।

पुलिस ने असगर अली के बेटे सजमन अली की तहरीर पर प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की। पता चला कि घटना में प्रयुक्त कार जालौन निवासी प्रेम नारायण के नाम थी। वह आगरा में ही एक गोशाला में काम करता है। साथ ही पुलिस को रवि यादव की घटनास्थल के आसपास लोकेशन मिली। चूंकि मामले में डॉ. अजय यादव और उनकी पत्नी के सीधे घटना से तार जुड़ते नहीं दिखे, इसलिए तथ्यों के आधार पर पुलिस ने रवि को नामजद करते हुए मामले को हत्या की धारा में बदल दिया।

 
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इस बीच रवि और कामरान भूमिगत हो गए। दो दिन पहले डॉ. अजय और रवि यादव का एक ऑडियो वायरल हुआ। बातचीत में दोनों की भूमिका सवालों में आ गई। डॉ. अजय ने बदनाम करने की साजिश और एआई से ऑडियो बनने की बात कहकर आरोप सिरे से खारिज कर दिए। हालांकि अब कार पूर्व में डॉ. अजय के भाई के नाम रहने की बात सामने आने पर उनकी मुश्किलें बढ़ना तय है।

वहीं निगरानी के नाम पर डॉ. अजय का सीधे तौर पर गोशालाओं से जुड़ाव रहता है। ऐसे में इस इत्तफाक से परतें हटाने के लिए पुलिस अब डॉ. अजय यादव और उनके भाई से पूछताछ के लिए सवालों की सूची तैयार करने में जुट गई है। इस बीच अब पुलिस ने भी मामले का जल्द खुलासा करने की बात कही है।

 
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सभी कड़ियों को जोड़कर हो रही जांच
हत्याकांड की जांच में कई अहम जानकारी सामने आई हैं। सभी कड़ियों को जोड़कर जांच को आगे बढ़ाया जा रहा है। सीसीटीवी कैमरों की फुटेज व अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को जांच में शामिल किया गया है। जल्द ही मामले का खुलासा किया जाएगा। - सय्यद अली अब्बास, डीसीपी सिटी

 

कामरान को भी बनाया आरोपी
पुलिस ने शुरू में सिर्फ रवि काे आरोपी बनाया था। चूंकि वह भूमिगत था, ऐसे में पूछताछ कर उसके बारे में जानकारी जुटाने के लिए पुलिस ने कामरान को तलाशना शुरू किया। कामरान के 2 ठिकानों पर दबिश दी गई पर वह नहीं मिला था। उसकी तलाश चल ही रही थी कि इस बीच वह गिरफ्तारी से बचने के लिए पुलिस के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंच गया। इसी के बाद पुलिस ने अब उसे हत्या की साजिश का आरोपी बनाया है। पुलिस का कहना है कि जब कामरान की मामले में भूमिका नहीं थी तो वह पुलिस के सामने क्यों नहीं आया।

इनाम घोषित करने की तैयारी
रवि और कामरान को आरोपी बनाने के साथ ही अब पुलिस ने दोनों की तलाश तेज कर दी है। पुलिस सूत्रों के अनुसार दोनों के कई परिचितों से पूछताछ कर जानकारी जुटाई जा रही है। इसके साथ ही दोनों को फरार और उनपर इनाम घोषित करने के लिए भी कार्रवाई की जा रही है।

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