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सरकारी मेडिकल कॉलेज में जमीन पर तड़पता रहा कैंसर पीड़ित पिता, बेटे को दौड़ते रहे 'बेदर्द' डॉक्टर
Sat, 20 Apr 2019 07:48 PM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Sat, 20 Apr 2019 07:48 PM IST
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वार्ड के बाहर फर्श पर लेटा कैंसर मरीज
- फोटो : अमर उजाला
आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों का एक बार फिर अमानवीय चेहरा सामने आया। वार्ड के बाहर कैंसर मरीज दर्द से घंटों तड़पता रहा, लेकिन उसे भर्ती करने की जहमत नहीं उठाई गई। तबियत ज्यादा बिगड़ने लगी, तब कहीं जाकर उसका इलाज शुरू किया।
कछपुरा निवासी 50 वर्षीय भीमसेन कैंसर से पीड़ित हैं, नाक में नली पड़ी हुई है। वो अपने बेटे प्रमोद कुमार के साथ शुक्रवार सुबह 11 बजे कैंसर रोग विभाग पहुंचे। पर्चा बनवाने के बाद डॉक्टर को दिखाया।
मरीज की हालत बिगड़ने लगी तो बेटे ने डॉक्टरों से पिता को जल्द भर्ती कर इलाज करने को कहा। इस पर डाक्टरों ने कहा कि जल्दी मत करो, बाहर बैठो। प्रमोद ने पिता को वार्ड के बाहर जमीन पर लिटा दिया।
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कछपुरा निवासी 50 वर्षीय भीमसेन कैंसर से पीड़ित हैं, नाक में नली पड़ी हुई है। वो अपने बेटे प्रमोद कुमार के साथ शुक्रवार सुबह 11 बजे कैंसर रोग विभाग पहुंचे। पर्चा बनवाने के बाद डॉक्टर को दिखाया।
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मरीज की हालत बिगड़ने लगी तो बेटे ने डॉक्टरों से पिता को जल्द भर्ती कर इलाज करने को कहा। इस पर डाक्टरों ने कहा कि जल्दी मत करो, बाहर बैठो। प्रमोद ने पिता को वार्ड के बाहर जमीन पर लिटा दिया।
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काफी देर होने के बाद भी कोई देखने नहीं आया तो प्रमोद फिर डॉक्टर के पास पहुंचा तो कहा गया कि जाओ पहले फाइल निकलवा लो। फाइल निकालने के लिए कर्मचारी के पास गया तो उसने भी फटकार दिया।
उधर, मरीज की पीड़ा असहनीय हो गई। प्रमोद इधर-उधर भागकर डॉक्टरों से पिता को भर्ती करने की गुहार लगाता रहा। आखिरकार ढाई घंटे बाद मरीज को भर्ती किया गया।
इस संबंध में प्राचार्य डॉ. जीके अनेजा का कहना है कि गंभीर मरीज को तत्काल भर्ती करने के निर्देश हैं। मरीज को पहले भर्ती करने के बाद कागजी कार्रवाई करनी चाहिए। इसकी रिपोर्ट मांगी जाएगी।
उधर, मरीज की पीड़ा असहनीय हो गई। प्रमोद इधर-उधर भागकर डॉक्टरों से पिता को भर्ती करने की गुहार लगाता रहा। आखिरकार ढाई घंटे बाद मरीज को भर्ती किया गया।
इस संबंध में प्राचार्य डॉ. जीके अनेजा का कहना है कि गंभीर मरीज को तत्काल भर्ती करने के निर्देश हैं। मरीज को पहले भर्ती करने के बाद कागजी कार्रवाई करनी चाहिए। इसकी रिपोर्ट मांगी जाएगी।