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पुलिस कस्टडी में व्यापारी की मौत: 20 घंटे तक नहीं हुई कार्रवाई, बेटे को घुमाते रहे पुलिसवाले...
Sat, 08 Feb 2025 10:00 AM IST
धीरेन्द्र सिंह
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Sat, 08 Feb 2025 10:00 AM IST
सार
पुलिस हिरासत में चक्की मालिक केदार सिंह की मौत हो गई। अब पुलिस इस मामले में कार्रवाई करने से भी बच रही है। 20 घंटे तक केदार सिंह के बेटे को पुलिसकर्मी इधर-उधर घुमाते रहे। मंत्री बेबीरानी माैर्य से मिले, अपनी पीड़ा बताई। तब पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की गई।
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पुलिस कस्टडी में व्यापारी की मौत
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
आगरा पुलिस हिरासत में केदार सिंह की मौत के मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली से परिजन नाराज हैं। उनका कहना है कि पुलिस ने 18 से 20 घंटे तक कोई कार्रवाई नहीं की। पुलिस वाले बेटे देवेंद्र को इधर-उधर घुमाते रहे। परिजन जब मंत्री बेबीरानी माैर्य से मिले, अपनी पीड़ा बताई। तब पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की गई।
शुक्रवार सुबह 10 बजे तक पुलिस परिजन पर पोस्टमार्टम कराने के लिए बार-बार कह रही थी। इससे वे भड़क गए। उनका कहना था कि पुलिस जल्दबाजी में पंचनामा पर हस्ताक्षर कराना चाहती थी। इसकी जानकारी पर समाज के लोग पोस्टमार्टम हाउस पर आ गए। पंचनामा के लिए इंतजार किया जा रहा था। तभी पुलिसकर्मी केदार सिंह के बेटे देवेंद्र को अपने साथ ले गई। पुलिस उन्हें इधर-उधर घुमाती रही। आरोप लगाया कि छोटा बेटा गजेंद्र इंतजार कर रहा था। मगर, पुलिसकर्मी बड़े बेटे को लेकर नहीं आए। तकरीबन 3 बजे पुलिस देवेंद्र और उनके जीजा को लेकर आई। इस दाैरान एसीपी हरीपर्वत भी पहुंचे। उन्होंने आश्वासन देकर पोस्टमार्टम की कार्रवाई कराई।
ये भी पढ़ें - पुलिस कस्टडी में व्यापारी की मौत: दिलों में गुस्सा, आंखों में आंसू...जुबां पर एक ही सवाल, आखिर क्या बिगाड़ा था
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पंचनामा में बाहरी लोगों के हस्ताक्षर पर भड़के
पंचनामा पर देवेंद्र के हस्ताक्षर के अलावा अन्य के हस्ताक्षर देखकर समाज के लोग भड़क गए। परिजन का कहना था कि पुलिस ने पहले ही पंचनामा के कागज पर 4 लोगों के हस्ताक्षर करा रखे थे। जिन लोगाें के नाम थे, उन्हें वो जानते नहीं थे। उनका कहना था कि जब परिवार में ही लोग हैं तो बाहरी व्यक्तियों के हस्ताक्षर क्यों कराए गए। इसके पीछे पुलिसकर्मियों की साजिश है। इस पर उनकी तकरार होने लगी। बाद में पुत्रवधू के नाम से तहरीर ली गई।
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शुक्रवार सुबह 10 बजे तक पुलिस परिजन पर पोस्टमार्टम कराने के लिए बार-बार कह रही थी। इससे वे भड़क गए। उनका कहना था कि पुलिस जल्दबाजी में पंचनामा पर हस्ताक्षर कराना चाहती थी। इसकी जानकारी पर समाज के लोग पोस्टमार्टम हाउस पर आ गए। पंचनामा के लिए इंतजार किया जा रहा था। तभी पुलिसकर्मी केदार सिंह के बेटे देवेंद्र को अपने साथ ले गई। पुलिस उन्हें इधर-उधर घुमाती रही। आरोप लगाया कि छोटा बेटा गजेंद्र इंतजार कर रहा था। मगर, पुलिसकर्मी बड़े बेटे को लेकर नहीं आए। तकरीबन 3 बजे पुलिस देवेंद्र और उनके जीजा को लेकर आई। इस दाैरान एसीपी हरीपर्वत भी पहुंचे। उन्होंने आश्वासन देकर पोस्टमार्टम की कार्रवाई कराई।
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पंचनामा में बाहरी लोगों के हस्ताक्षर पर भड़के
पंचनामा पर देवेंद्र के हस्ताक्षर के अलावा अन्य के हस्ताक्षर देखकर समाज के लोग भड़क गए। परिजन का कहना था कि पुलिस ने पहले ही पंचनामा के कागज पर 4 लोगों के हस्ताक्षर करा रखे थे। जिन लोगाें के नाम थे, उन्हें वो जानते नहीं थे। उनका कहना था कि जब परिवार में ही लोग हैं तो बाहरी व्यक्तियों के हस्ताक्षर क्यों कराए गए। इसके पीछे पुलिसकर्मियों की साजिश है। इस पर उनकी तकरार होने लगी। बाद में पुत्रवधू के नाम से तहरीर ली गई।