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बिजनेस आइडिया: पेठा के कचरे से बन रहीं लेडीज सैंडल और पर्स, तरीका जानकर रह जाएंगे हैरान
Thu, 05 Nov 2026 12:33 PM IST
Dhirendra Singh
सलोनी पांडे, संवाद न्यूज, आगरा
सलोनी पांडे, संवाद न्यूज, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Thu, 05 Nov 2026 12:33 PM IST
सार
आगरा के मशहूर पेठे का कचरा अब फैशन की दुनिया में काम आएगा। दयालबाग शिक्षण संस्थान के शोधार्थियों ने सफेद कद्दू के अपशिष्ट से ऐसी शीट तैयार करने की तकनीक विकसित की है, जिसका इस्तेमाल लेडीज सैंडल, पर्स और फुटवियर के मिड-सोल व इनसोल बनाने में किया जा सकता है।
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पेठा वेस्टेज से बन डालीं लेडीज सैंडल और पर्स
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
आगरा का पेठा अब सिर्फ मिठास के लिए नहीं बल्कि बिना लेदर फुटवियर बनाने के लिए जाना-पहचाना जाएगा। चौंकिए नहीं, दरअसल पेठा बनाने में इस्तेमाल होने वाले सफेद कद्दू का करीब 60 प्रतिशत हिस्सा कचरे में चला जाता है। अब यही कचरा महिलाओं के सैंडल और पर्स बनाने के काम आ रहा है। दयालबाग शिक्षण संस्थान के शोधार्थियों ने इसे संभव कर दिखाया है।
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इस शोध को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली है। जर्मन-ब्रिटिश अकादमिक एवं वैज्ञानिक प्रकाशन कंपनी स्प्रिंगर नेचर ने इसे प्रकाशित किया है। फुटवियर के मिड-सोल और इनसोल बनाने की इस तकनीक को भारत सरकार से पेटेंट भी मिल चुका है। शोधार्थियों ने प्लास्टिक की बेकार थैलियों से भी जूतों का इनसोल तैयार किया है। दयालबाग एजुकेशनल इंस्टीट्यूट के इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष (फुटवियर टेक्नोलॉजी) डॉ. डीके चतुर्वेदी ने शोधार्थियों के साथ मिलकर यह प्रयोग किया है।
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डॉ. चतुर्वेदी ने बताया कि पेठा बनाने में फल का करीब 40 प्रतिशत हिस्सा ही इस्तेमाल होता है। शेष अपशिष्ट बच जाता है। इस कचरे का निस्तारण भी चुनौती है। इसी समस्या को देखते हुए शोध में इस अपशिष्ट को फुटवियर जैसी उपयोगी सामग्री में बदलने की तकनीक विकसित की गई। इससे फुटवियर के दूसरे हिस्से भी तैयार किए जा सकते हैं। शोध में पेठे को सुखाने के दौरान निकलने वाले पानी को भी एकत्र किया गया। शोधार्थी सचिन दिवाकर ने बताया कि इस पानी को डिस्टिल्ड वॉटर के रूप में उपयोग किया जा सकता है। इसके अलावा खेती और बैटरी चार्जिंग में इसके संभावित इस्तेमाल पर भी काम किया गया है।
प्लास्टिक की थैलियों से जूतों का इनसोल
संस्थान में प्लास्टिक कचरे के इस्तेमाल पर भी शोध किया गया है। इसमें इस्तेमाल की जा चुकी प्लास्टिक की थैलियों को मशीन से दबाकर शीट तैयार की गई। इसका इस्तेमाल जूतों के अंदर लगाए जाने वाले इनसोल में किया गया। इसके लिए भी भारत सरकार से पेटेंट मिला है। प्लास्टिक अपशिष्ट से फुटवियर सामग्री तैयार करने से संबंधित एक अन्य शोध को भी पेटेंट मिला है।
संस्थान में प्लास्टिक कचरे के इस्तेमाल पर भी शोध किया गया है। इसमें इस्तेमाल की जा चुकी प्लास्टिक की थैलियों को मशीन से दबाकर शीट तैयार की गई। इसका इस्तेमाल जूतों के अंदर लगाए जाने वाले इनसोल में किया गया। इसके लिए भी भारत सरकार से पेटेंट मिला है। प्लास्टिक अपशिष्ट से फुटवियर सामग्री तैयार करने से संबंधित एक अन्य शोध को भी पेटेंट मिला है।
ऐसे तैयार होती है विशेष शीट
- पेठे और सफेद कद्दू के छिलके, गूदे और रेशेदार अवशेष एकत्र कर अशुद्धियां अलग की जाती हैं।
- अवशेष को साफ पानी से धोकर गंदगी और अन्य अशुद्धियां हटाई जाती हैं।
- साफ किए गए अवशेष को धूप या नियंत्रित तापमान पर सुखाकर उनकी नमी कम की जाती है।
- सूखे अवशेष को मशीन से पीसकर बारीक पाउडर बनाया जाता है। इसके बाद पाउडर को छाना जाता है।
- सामग्री को आपस में जोड़ने के लिए लेटेक्स एक तरह का गाढ़ा चिपचिपा लिक्विड घोल तैयार किया जाता है।
- कद्दू के पाउडर को उस घोल के साथ मिलाकर एकसार मिश्रण तैयार किया जाता है।
- मिश्रण को समतल सांचे में डालकर उसमें एगेव पौधे की पत्तियों से निकाले गए रेशे मिलाए जाते हैं। इसके बाद सतह को समतल कर शीट का आकार दिया जाता है।
- तैयार शीट को सुखाकर सांचे से निकाला जाता है। किनारों की कटाई और सतह की फिनिशिंग के बाद इसे उपयोग के लिए तैयार किया जाता है।
- जरूरत के अनुसार विशेष परत चढ़ाकर इसे सुनहरी या चांदी जैसी चमक भी दी जा सकती है।
- पेठे और सफेद कद्दू के छिलके, गूदे और रेशेदार अवशेष एकत्र कर अशुद्धियां अलग की जाती हैं।
- अवशेष को साफ पानी से धोकर गंदगी और अन्य अशुद्धियां हटाई जाती हैं।
- साफ किए गए अवशेष को धूप या नियंत्रित तापमान पर सुखाकर उनकी नमी कम की जाती है।
- सूखे अवशेष को मशीन से पीसकर बारीक पाउडर बनाया जाता है। इसके बाद पाउडर को छाना जाता है।
- सामग्री को आपस में जोड़ने के लिए लेटेक्स एक तरह का गाढ़ा चिपचिपा लिक्विड घोल तैयार किया जाता है।
- कद्दू के पाउडर को उस घोल के साथ मिलाकर एकसार मिश्रण तैयार किया जाता है।
- मिश्रण को समतल सांचे में डालकर उसमें एगेव पौधे की पत्तियों से निकाले गए रेशे मिलाए जाते हैं। इसके बाद सतह को समतल कर शीट का आकार दिया जाता है।
- तैयार शीट को सुखाकर सांचे से निकाला जाता है। किनारों की कटाई और सतह की फिनिशिंग के बाद इसे उपयोग के लिए तैयार किया जाता है।
- जरूरत के अनुसार विशेष परत चढ़ाकर इसे सुनहरी या चांदी जैसी चमक भी दी जा सकती है।