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मां गौरी टाउन पर चला बुल्डोजर
ब्यूरो, अमर उजाला अागरा
Updated Sat, 19 Sep 2015 01:58 AM IST
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यमुना के डूब क्षेत्र में पहले चरण की कार्रवाई के दौरान एडीए ने खासपुर (दयालबाग) स्थित मां गौरी टाउन कालोनी के छह खाली मकान और गेस्ट हाउस को ध्वस्त कर दिया। इससे कालोनी में हड़कंप मच गया। अपने घरों पर संकट देख लोग बाहर निकल आए।
कमिश्नर के यहां अपील खारिज होने के बाद शुक्रवार दोपहर लगभग तीन बजे पुलिस बल के साथ पहुंचीं सिटी मजिस्ट्रेट रेखा एस चौहान और उप सचिव सुनीता यादव की मौजूदगी में कालोनी की अंतिम पंक्ति में बने छह खाली मकान ध्वस्त किए गए। इससे पहले बुल्डोजर की मदद से एडीए ने गेस्ट हाउस को जमींदोज कर दिया। कार्रवाई के दौरान लोग घरों से बाहर निकल आए। कुछ लोगों ने अपने मकानों पर संकट मंडराता देख अधिकारियों को घेरने की कोशिश की, लेकिन पुलिस बल के सामने उनके एक न चली। लगभग तीन घंटे तक ध्वस्तीकरण अभियान चला।
बता दें कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की सख्ती को देखते हुए तीन महीने पहले भी एडीए की टीम इस कालोनी को ढहाने पहुंची थी। मगर, लोगों ने कुछ दिन की मोहलत मांगी थी। इसके बाद कुछ लोगों ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर कार्रवाई रोकने की मांग की। इस पर हाईकोर्ट ने कमिश्नर पर फैसला छोड़ दिया था। पिछले दिनों कमिश्नर प्रदीप भटनागर ने लोगों की अपील खारिज कर दी और कालोनी को अवैध घोषित कर दिया था।
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ताश के पत्तों की तरह बिखर गए मकान
बिल्डर ने इन मकानों के निर्माण में घटिया निर्माण सामग्री का प्रयोग किया था। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि बुल्डोजर का पंजा मकान की छत या दीवार पर रखते ही वह ध्वस्त हो रहा था। बुल्डोजर को लिंटर को गिराने के लिए भी ज्यादा ऊर्जा की जरूरत नहीं पड़ी। एक ही झटके में मकानों की दीवारों धराशाई होती गईं। कालोनी के लोग भी यह देखकर हैरान थे कि बिल्डर ने इन मकानों के निर्माण में कितनी घटिया सामग्री का प्रयोग किया है। अगर, भविष्य में कभी बाढ़ आती तो इस कालोनी के मकानों की दीवारों शायद ही लहरों का कहर झेल पातीं।
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कमिश्नर के यहां अपील खारिज होने के बाद शुक्रवार दोपहर लगभग तीन बजे पुलिस बल के साथ पहुंचीं सिटी मजिस्ट्रेट रेखा एस चौहान और उप सचिव सुनीता यादव की मौजूदगी में कालोनी की अंतिम पंक्ति में बने छह खाली मकान ध्वस्त किए गए। इससे पहले बुल्डोजर की मदद से एडीए ने गेस्ट हाउस को जमींदोज कर दिया। कार्रवाई के दौरान लोग घरों से बाहर निकल आए। कुछ लोगों ने अपने मकानों पर संकट मंडराता देख अधिकारियों को घेरने की कोशिश की, लेकिन पुलिस बल के सामने उनके एक न चली। लगभग तीन घंटे तक ध्वस्तीकरण अभियान चला।
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बता दें कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की सख्ती को देखते हुए तीन महीने पहले भी एडीए की टीम इस कालोनी को ढहाने पहुंची थी। मगर, लोगों ने कुछ दिन की मोहलत मांगी थी। इसके बाद कुछ लोगों ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर कार्रवाई रोकने की मांग की। इस पर हाईकोर्ट ने कमिश्नर पर फैसला छोड़ दिया था। पिछले दिनों कमिश्नर प्रदीप भटनागर ने लोगों की अपील खारिज कर दी और कालोनी को अवैध घोषित कर दिया था।
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ताश के पत्तों की तरह बिखर गए मकान
बिल्डर ने इन मकानों के निर्माण में घटिया निर्माण सामग्री का प्रयोग किया था। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि बुल्डोजर का पंजा मकान की छत या दीवार पर रखते ही वह ध्वस्त हो रहा था। बुल्डोजर को लिंटर को गिराने के लिए भी ज्यादा ऊर्जा की जरूरत नहीं पड़ी। एक ही झटके में मकानों की दीवारों धराशाई होती गईं। कालोनी के लोग भी यह देखकर हैरान थे कि बिल्डर ने इन मकानों के निर्माण में कितनी घटिया सामग्री का प्रयोग किया है। अगर, भविष्य में कभी बाढ़ आती तो इस कालोनी के मकानों की दीवारों शायद ही लहरों का कहर झेल पातीं।