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ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट का भवन तैयार मशीनों का इंतजार
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कासगंज के जिला चिकित्सालय में बन कर तैयार ब्लड कंपोनेंट यूनिट ।
- फोटो : KASGANJ
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कासगंज। जिला अस्पताल के लिए स्वीकृत की गई ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट का भवन तो बनकर तैैयार हो गया है, लेकिन अभी तक शासन से मशीनें उपलब्ध नहीं कराई गई हैं। जिससे यूनिट अभी तक शुरू नहीं हो सकी है।
जिला अस्पताल में अभी तक ब्लड बैंक की ही सुविधा है। इसमें ब्लड बैंक में जमा होने वाले रक्त की एक यूनिट एक ही व्यक्ति के काम आ सकती है। ब्लड से प्लेटलेट्स, प्लाज्मा, पीआरबीसी, व क्रॉयोप्रेसीपिटेट कंपोनेंट को अलग करके प्रयोग में लाने के लिए शासन से जिला अस्पताल में इस यूनिट की स्थापना को मंजूरी दी गई। जिला अस्पताल पर संचालित होने वाली ब्लड बैंक के समीप ही इस यूनिट को स्थापित करने के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा जगह चिह्नित की गई।
इसके लिए शासन से 26 लाख रुपये का बजट स्वीकृत कर अवमुक्त किया गया। दिसंबर तक इस कार्य को पूरा करने के निर्देश शासन से दिए गए। विभाग ने इस यूनिट को संचालित करने के लिए तीन माह पहले भवन तैयार कराने के साथ ही बिजली फिटिंग का कार्य भी पूरा करा लिया, लेकिन इस शासन से मशीनों को उपलब्ध कराने की भी कोई व्यवस्था नहीं की गई है। जिससे ब्लड के कंपोनेंट के लिए मरीजों को अभी भी बाहरी जनपदों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
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कंपोनेंट की इन रोगियों को होती है जरूरत
सामान्य खून की कमी वाले मरीजों को पीआरबीसी, जलने के कारण गंभीर हुए मरीजों व कोरोना के मरीजों को प्लाज्मा चढ़ाने की जरूरत होती है। जबकि डेेंगू व अन्य संक्रमण वाले मरीज को प्लेटलेट्स चढ़ाकर बचाया जा सकता है। वहीं क्रॉयोप्रेसीपिटेट का उपयोग हीमोफीलिया या वॉन विलेब्रांड रोग के कारण रक्तस्राव के इलाज के लिए किया जाता है।
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जिला अस्पताल में अभी तक ब्लड बैंक की ही सुविधा है। इसमें ब्लड बैंक में जमा होने वाले रक्त की एक यूनिट एक ही व्यक्ति के काम आ सकती है। ब्लड से प्लेटलेट्स, प्लाज्मा, पीआरबीसी, व क्रॉयोप्रेसीपिटेट कंपोनेंट को अलग करके प्रयोग में लाने के लिए शासन से जिला अस्पताल में इस यूनिट की स्थापना को मंजूरी दी गई। जिला अस्पताल पर संचालित होने वाली ब्लड बैंक के समीप ही इस यूनिट को स्थापित करने के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा जगह चिह्नित की गई।
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इसके लिए शासन से 26 लाख रुपये का बजट स्वीकृत कर अवमुक्त किया गया। दिसंबर तक इस कार्य को पूरा करने के निर्देश शासन से दिए गए। विभाग ने इस यूनिट को संचालित करने के लिए तीन माह पहले भवन तैयार कराने के साथ ही बिजली फिटिंग का कार्य भी पूरा करा लिया, लेकिन इस शासन से मशीनों को उपलब्ध कराने की भी कोई व्यवस्था नहीं की गई है। जिससे ब्लड के कंपोनेंट के लिए मरीजों को अभी भी बाहरी जनपदों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
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सामान्य खून की कमी वाले मरीजों को पीआरबीसी, जलने के कारण गंभीर हुए मरीजों व कोरोना के मरीजों को प्लाज्मा चढ़ाने की जरूरत होती है। जबकि डेेंगू व अन्य संक्रमण वाले मरीज को प्लेटलेट्स चढ़ाकर बचाया जा सकता है। वहीं क्रॉयोप्रेसीपिटेट का उपयोग हीमोफीलिया या वॉन विलेब्रांड रोग के कारण रक्तस्राव के इलाज के लिए किया जाता है।