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चीन की चुनौती से लड़ पाएगा आगरा का जूता, आयात शुल्क बढ़ाने से महंगा होगा विदेशी जूता
Sun, 02 Feb 2020 12:02 AM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Sun, 02 Feb 2020 12:02 AM IST
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- फोटो : social media
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दुनिया के बाजारों में आगरा का जूता चमक रहा है, लेकिन घरेलू जूता बाजार में सस्ते चाइनीज जूतों ने सबसे ज्यादा नुकसान आगरा के जूता उत्पादकों को पहुंचाया। शनिवार को पेश किए गए आम बजट में जूतों पर आयात शुल्क 25 से बढ़ाकर 35 फीसदी कर दिया गया। इससे आगरा की गली गली में बन रहा जूता चाइनीज जूतों की चुनौती से मुकाबला कर पाएगा।
चाइनीज समेत विदेशी जूतों पर आयात शुल्क बढ़ने से यह महंगे हो जाएंगे, जिससे आगरा में बनने वाले जूते देश भर के बाजार में उनसे कीमत में मुकाबला कर पाएंगे। देश के 65 फीसदी घरेलू जूता बाजार पर आगरा का कब्जा है यानी दो तिहाई लोग आगरा में बना जूता पहनते हैं। 8500 इकाइयों में साढ़े तीन लाख से ज्यादा लोगों को रोजगार मिल रहा है।
चीन के सस्ते, लेकिन घटिया क्वालिटी के जूतों ने आगरा को जोर का झटका दिया। सस्ते होने के कारण बड़ा वर्ग चीन के स्टाइलिश, लेकिन सिंथेटिक लेदर के बने जूतों का उपयोग करने लगा। इनके आयात पर प्रतिबंध की मांग उठी तो बजट में वित्त मंत्री ने आयात महंगा कर दिया। आगरा में बनने वाले और विदेशी जूतों के बीच प्रति जोड़ी 25 से 50 रुपये का ही अंतर था, जो आयात शुल्क बढ़ाने से खत्म हो जाएगा। इसका फायदा जूता उत्पादकों को सीधे तौर पर मिलेगा।
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चाइनीज समेत विदेशी जूतों पर आयात शुल्क बढ़ने से यह महंगे हो जाएंगे, जिससे आगरा में बनने वाले जूते देश भर के बाजार में उनसे कीमत में मुकाबला कर पाएंगे। देश के 65 फीसदी घरेलू जूता बाजार पर आगरा का कब्जा है यानी दो तिहाई लोग आगरा में बना जूता पहनते हैं। 8500 इकाइयों में साढ़े तीन लाख से ज्यादा लोगों को रोजगार मिल रहा है।
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चीन के सस्ते, लेकिन घटिया क्वालिटी के जूतों ने आगरा को जोर का झटका दिया। सस्ते होने के कारण बड़ा वर्ग चीन के स्टाइलिश, लेकिन सिंथेटिक लेदर के बने जूतों का उपयोग करने लगा। इनके आयात पर प्रतिबंध की मांग उठी तो बजट में वित्त मंत्री ने आयात महंगा कर दिया। आगरा में बनने वाले और विदेशी जूतों के बीच प्रति जोड़ी 25 से 50 रुपये का ही अंतर था, जो आयात शुल्क बढ़ाने से खत्म हो जाएगा। इसका फायदा जूता उत्पादकों को सीधे तौर पर मिलेगा।
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बेहद संतुलित और घरेलू उत्पादकों को ताकत देने वाला बजट है। टैक्स ऑडिट की सीमा एक करोड़ से बढ़ाने और आयात शुल्क बढ़ाने के कदमों का अच्छा असर उद्योगों पर पड़ने वाला है -पूरन डावर अध्यक्ष, एफमेक
हम कम कीमत के कारण चाइनीज जूतों से मुकाबला नहीं कर पा रहे थे। आयात शुल्क बढ़ाने के कदम से सबसे बड़ा फायदा आगरा को ही होगा। घरेलू जूता कारोबार इससे बढ़ेगा, हमारी हिस्सेदारी और बढ़ेगी - जितेंद्र त्रिलोकानी, वरिष्ठ उपाध्यक्ष, आगरा शू मैन्यू. एसोसिएशन
आयात शुल्क बढ़ाने से घरेलू जूता उद्योग उड़ान भर पाएगा, लेकिन निर्यातकों को फुटवियर कंपोनेंट महंगे मिलेंगे। हालांकि जूता उद्योग के लिए कुल मिलाकर बजट ठीक है -प्रदीप वासन, सदस्य, एफमेक
जूते के लिए इंसेटिव और अन्य रियायतों की उम्मीद थी। हालांकि आयात शुल्क बढ़ाने का कदम अच्छा है। घरेलू जूता कारोबारियों को इसका बड़ा फायदा पहुंचने वाला है - दिलीप मित्तल, सोल निर्माता
फुटवियर कंपोनेंट पर 15 से बढ़ाकर 20 फीसदी आयात शुल्क कर दिया गया। इससे हमारी उत्पादन लागत बढ़ जाएगी। क्वालिटी कंपोनेंट तो आयात ही करना पड़ रहा है। मेरे हिसाब से निराशाजनक बजट है - नजीर अहमद, जूता निर्यातक
हम कम कीमत के कारण चाइनीज जूतों से मुकाबला नहीं कर पा रहे थे। आयात शुल्क बढ़ाने के कदम से सबसे बड़ा फायदा आगरा को ही होगा। घरेलू जूता कारोबार इससे बढ़ेगा, हमारी हिस्सेदारी और बढ़ेगी - जितेंद्र त्रिलोकानी, वरिष्ठ उपाध्यक्ष, आगरा शू मैन्यू. एसोसिएशन
आयात शुल्क बढ़ाने से घरेलू जूता उद्योग उड़ान भर पाएगा, लेकिन निर्यातकों को फुटवियर कंपोनेंट महंगे मिलेंगे। हालांकि जूता उद्योग के लिए कुल मिलाकर बजट ठीक है -प्रदीप वासन, सदस्य, एफमेक
जूते के लिए इंसेटिव और अन्य रियायतों की उम्मीद थी। हालांकि आयात शुल्क बढ़ाने का कदम अच्छा है। घरेलू जूता कारोबारियों को इसका बड़ा फायदा पहुंचने वाला है - दिलीप मित्तल, सोल निर्माता
फुटवियर कंपोनेंट पर 15 से बढ़ाकर 20 फीसदी आयात शुल्क कर दिया गया। इससे हमारी उत्पादन लागत बढ़ जाएगी। क्वालिटी कंपोनेंट तो आयात ही करना पड़ रहा है। मेरे हिसाब से निराशाजनक बजट है - नजीर अहमद, जूता निर्यातक