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नगरवन से दूर होगा कालीनदी का प्रदूषण, नदी किनारे रोपित होंगे जलशोधन को पौधे

Mon, 07 Sep 2020 10:42 PM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Mon, 07 Sep 2020 10:42 PM IST
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कासगंज। शहर के नजदीक नदरई में झाल का पुल ब्रिटिश काल से ही आकर्षण का केंद्र है। लेकिन प्रदूषित काली की वजह से लोग वहां जाने से कतराते हैं। इस समस्या से निजात दिलाने के लिए वन विभाग ने तैयारी कर ली है। अब काली नदी के किनारे नगरवन विकसित किया जाएगा। जहां जलशोधन पौधे रोपित किए जाएंगे।
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ब्रिटिशकालीन झाल का पुल इंजीनियरिंग की अद्भुत मिसाल है। इस पुल के नीचे से काली नदी निकलती है, तो पुल के ऊपर से हजारा नहर का बहाव होता है। अब वन विभाग ने प्रदूषित काली नदी के जलशोधन के लिए नगर वन विकसित करने का प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेज दिया है। जिसकी स्वीकृति के बाद नदी किनारे ऐसे पौधे लगाए जाएंगे, जो जल शोधन करने में सक्षम होंगे।
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इसी के साथ ही झाल के पुल इलाके का दृश्य मनोरम बनाने का भी ध्यान रखा गया है। वन क्षेत्र बढ़ाने के लिए जिले में पिछले दो वर्षों से लगातार कवायद हो रही है। पहले गंगावन इसके बाद भागीरथी वन विकसित हुआ। अब 50 हेक्टेयर क्षेत्र में पौधे रोपित कर झाल के पुल के इलाके को हरा-भरा बनाया जाएगा और नदी को प्रदूषित होने से बचाया जाएगा। नदी और नहर के किनारे सिंचाई विभाग की जमीन को पौधरोपण के लिए लिया जाएगा। जिसके लिए सिंचाई विभाग ने भी अपनी सहमति दे दी है।
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1885 में बना था झाल का पुल
ब्रिटिश काल के समय झाल के पुल का निर्माण किया गया था। इसे 1885 से 1889 के बीच बनाया गया था। जिसे आयरलैंड की कॉर्क यूनिवर्सिटी के सहयोग से कार्यकारी अभियंता विलियम गुड ने डिजाइन किया था। 1300 फुट से अधिक लंबे इस पुल का निर्माण 4 साल में हुआ था। 16 जनवरी 1892 में अमेरिका कैलिफोर्निया के अखबार पैसेफिक रुलर प्रेस ने मुख्य पृष्ठ पर छापे लेख में झाल के पुल को इंजीनियरिंग का बेजोड़ नमूना बताया था। यह पुल काली नदी के ऊपर बनाकर नहर को प्रवाहित किया गया है।
इन पौधों की प्रजातियां करेंगी पानी को शोधित
वॉटर मिंट, सॉफ्टरस, वॉटर लिलिज प्लांट्स: पानी में ऐसे रसायन जो क्षमता से अधिक हैं। जो पानी को नुकसान पहुंचाते हैं। यह पौधे उससे बचाते हैं।
ऑक्सी जेनेटिंग पांड प्लांट: हार्म वॉर्ट एवं वॉटर थाइन इनके वैज्ञानिक नाम हैं। यह पानी में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ाएंगे। इस तरह के पौधों की कई अलग-अलग नाम से प्रजातियां होती हैं। फ्लोटिल पांड प्लांट (वॉटर लैट्युस, डक वीड, फैरीमॉस, प्लोटिल फेल्म्स): यह ऐसी प्रजाति हैं, जो पानी में तैरती हैं और पानी को शोधित करती हैं। विषैले तत्व खत्म करती है।

फैक्ट फाइल-
- 1.17 लाख पौधे गंगावन में लहलहा रहे हैं।
- 3.51 लाख पौधे भागीरथी वन में लगे हैं।
- 50 हेक्टेयर क्षेत्र में नगरवन बनाने की है तैयारी।
झाल के पुल पर हजारा नहर और काली नदी के किनारे की भूमि पर पौधरोपण किया जाएगा। इसमें ऐसे पौधे भी रोपित होंगे, जिनसे जल शोधित होता है। इसकी पूरी कार्य योजना तैयार कर ली है। इससे झाल के पुल इलाके का नगरवन से सुंदरीकरण भी होगा। योजना का प्रस्ताव शासन को भेजा है। - दिवाकर वशिष्ठ, डीएफओ।
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