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Agra News: भगदड़ में मृत महिला की बेटी को हर्जाना न देने पर शाखा प्रबंधक का वेतन रोका
Thu, 14 Aug 2025 12:42 AM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
Updated Thu, 14 Aug 2025 12:42 AM IST
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मैनपुरी। वर्ष 2012 में मथुरा के बरसाना में हुई भगदड़ में जान गंवाने वाली महिला के परिवार को हर्जाना राशि का भुगतान न करने पर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने नेशनल इंश्योरेंस कंपनी की स्टेशन रोड स्थित शाखा प्रबंधक का अगस्त माह का वेतन रोकने का आदेश दिया है। यह आदेश 19 मई 2016 को दिए गए आयोग के फैसले का पूरी तरह से पालन न करने पर लिया गया है। बीमा कंपनी के मुख्य महाप्रबंधक को पत्र भी लिखा है। इस मामले की अगली सुनवाई 3 सितंबर को होगी।
मोहल्ला पुरोहिताना की निवासी सीता की मां कुसुमलता देवी की 21 सितंबर 2012 को बरसाना, मथुरा में हुई भगदड़ में मृत्यु हो गई थी। सीता के अनुसार उनकी मां के नाम पर नेशनल इंश्योरेंस कंपनी में बीमा था। मां की मृत्यु के बाद बीमा राशि के भुगतान का दावा किया। कंपनी ने भुगतान नहीं किया। इसके बाद उन्होंने 22 अप्रैल 2014 को नेशनल इंश्योरेंस कंपनी की स्टेशन रोड शाखा के प्रबंधक के खिलाफ जिला उपभोक्ता आयोग में याचिका दायर की थी।
आयोग ने 19 मई 2016 को बीमा कंपनी को 3,20,000 की बीमा राशि को 9 प्रतिशत ब्याज के साथ और मानसिक कष्ट के लिए सात हजार रुपये और वाद व्यय के रूप में पांच हजार रुपये का भुगतान एक माह के भीतर करने का आदेश दिया था। बीमा कंपनी ने 3,82,435 की बीमा राशि का भुगतान तो कर दिया। मगर, हर्जाने और वाद व्यय के 12 हजार रुपये का भुगतान नहीं किया। सीता ने कंपनी में शिकायत की, फिर भी कोई कार्रवाई नहीं की। लगातार अनदेखी के बाद अब यह बकाया राशि बढ़कर 22,707 हो गई है। सीता के अनुसार उन्होंने फिर से जिला उपभोक्ता प्रतितोष आयोग में याचिका दाखिल की। आयोग के अध्यक्ष शशिभूषण पांडेय, सदस्य नीतिका दास और नंद कुमार की तीन सदस्यीय पीठ ने मामले में सुनवाई की। आयोग ने सख्त कदम उठाते हुए शाखा प्रबंधक का अगस्त माह का वेतन रोकने का आदेश दिया है।
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मोहल्ला पुरोहिताना की निवासी सीता की मां कुसुमलता देवी की 21 सितंबर 2012 को बरसाना, मथुरा में हुई भगदड़ में मृत्यु हो गई थी। सीता के अनुसार उनकी मां के नाम पर नेशनल इंश्योरेंस कंपनी में बीमा था। मां की मृत्यु के बाद बीमा राशि के भुगतान का दावा किया। कंपनी ने भुगतान नहीं किया। इसके बाद उन्होंने 22 अप्रैल 2014 को नेशनल इंश्योरेंस कंपनी की स्टेशन रोड शाखा के प्रबंधक के खिलाफ जिला उपभोक्ता आयोग में याचिका दायर की थी।
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आयोग ने 19 मई 2016 को बीमा कंपनी को 3,20,000 की बीमा राशि को 9 प्रतिशत ब्याज के साथ और मानसिक कष्ट के लिए सात हजार रुपये और वाद व्यय के रूप में पांच हजार रुपये का भुगतान एक माह के भीतर करने का आदेश दिया था। बीमा कंपनी ने 3,82,435 की बीमा राशि का भुगतान तो कर दिया। मगर, हर्जाने और वाद व्यय के 12 हजार रुपये का भुगतान नहीं किया। सीता ने कंपनी में शिकायत की, फिर भी कोई कार्रवाई नहीं की। लगातार अनदेखी के बाद अब यह बकाया राशि बढ़कर 22,707 हो गई है। सीता के अनुसार उन्होंने फिर से जिला उपभोक्ता प्रतितोष आयोग में याचिका दाखिल की। आयोग के अध्यक्ष शशिभूषण पांडेय, सदस्य नीतिका दास और नंद कुमार की तीन सदस्यीय पीठ ने मामले में सुनवाई की। आयोग ने सख्त कदम उठाते हुए शाखा प्रबंधक का अगस्त माह का वेतन रोकने का आदेश दिया है।
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