{"_id":"6298fb7e13a9b41d7532c99a","slug":"boy-kidnapping-case-two-founf-not-guilty-kasganj-news-agr5356202157","type":"story","status":"publish","title_hn":"बालक के अपहरण के दो आरोपी कोर्ट ने किए दोष मुक्त","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बालक के अपहरण के दो आरोपी कोर्ट ने किए दोष मुक्त
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कासगंज। अपर जिला और सत्र न्यायाधीश गगन कुमार भारती के न्यायालय ने 14 साल पहले हुए बालक के अपहरण के मामले में दो आरोपियों को दोष मुक्त कर दिया। कोर्ट ने विवेचक को मिथ्या साक्ष्य देने का दोषी मानते हुए आपराधिक प्रकीर्ण वाद पंजीकृत करने के साथ ही विभागीय जांच के आदेेश दिए हैं।
सहावर के ग्राम कोढरा निवासी कृष्ण गोपाल अपने परिवार सहित दिल्ली में रहते हैं। 2008 में वह अपने छोटे भाई दिनेश की शादी में शामिल होने के लिए अपने गांव आए थे। 24 अप्रैल 2008 को सुबह लगभग 7.30 बजे अपने पुत्र योगेश (12), भतीजे चंदन व गौरव के साथ गांव के तालाब की ओर शौच के लिए गए थे। इसी बीच उनके ताऊ का बेटा बदन सिंह वहां आ गया। तभी मोहनपुर की ओर से दो बाइकें आई, जिन पर दो-दो लोग बैठे हुए थे। बाइक सवार लोकेंद्र व उसके साथी ने उनके बेटे को बाइक पर बिठा लिया और अपहरण करके अमांपुर की ओर ले गए। इस मामले में मुकेश, मटरू, राम सेवक, बृहमानंद, जयवीर निवासी कौंढरा, मुनेश पाल सिंह निवासी मिडैल बुजुर्ग के खिलाफ पुलिस को तहरीर दी। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया। पुलिस ने विवेचना के बाद लोकेंद्र, धमेंद्र, मुकेश, मटरू, राम सेवक, ब्रहमानंद, जयवीर, मुनेश पाल, विनोद, रौकी, शीलेंद्र, बब्लू, सुदेश, अर्चना के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया। न्यायालय ने मुनेश पाल व अर्चना की पत्रावली अलग कर दी। वहीं, शेष आरोपियों को 31 जनवरी 2018 को दोष मुक्त कर दिया गया। कोर्ट ने मामले के आरोपी मुनेश पाल व अर्चना पर अपहरण के आरोपों को लेकर मुकदमे के वादी, व अपहृत बालक के बयान व अन्य गवाहों के बयान के आधार पर दोनों आरोपियों को दोष मुक्त कर दिया। कोर्ट ने मुनेश पाल व अर्चना के मामले में विवेचक कृपाशंकर पर मिथ्या साक्ष्य प्रस्तुत करने का दोषी माना। कोर्ट ने विवेचक के खिलाफ आपराधिक प्रकीर्ण वाद पंजीकृत करने, नोटिस जारी करने एवं एसपी को विवेचक के खिलाफ विभागीय जांच कराने के आदेश दिए। जांच छह माह में पूर्ण कर न्यायालय को अवगत कराने और जांच में आरोपी अर्चना के खिलाफ विद्वेषपूर्ण अभियोजन चलाने का दोष सिद्ध होने पर विवेचक के खिलाफ आपराधिक वाद दर्ज करने के भी आदेश दिए।
विज्ञापन
सहावर के ग्राम कोढरा निवासी कृष्ण गोपाल अपने परिवार सहित दिल्ली में रहते हैं। 2008 में वह अपने छोटे भाई दिनेश की शादी में शामिल होने के लिए अपने गांव आए थे। 24 अप्रैल 2008 को सुबह लगभग 7.30 बजे अपने पुत्र योगेश (12), भतीजे चंदन व गौरव के साथ गांव के तालाब की ओर शौच के लिए गए थे। इसी बीच उनके ताऊ का बेटा बदन सिंह वहां आ गया। तभी मोहनपुर की ओर से दो बाइकें आई, जिन पर दो-दो लोग बैठे हुए थे। बाइक सवार लोकेंद्र व उसके साथी ने उनके बेटे को बाइक पर बिठा लिया और अपहरण करके अमांपुर की ओर ले गए। इस मामले में मुकेश, मटरू, राम सेवक, बृहमानंद, जयवीर निवासी कौंढरा, मुनेश पाल सिंह निवासी मिडैल बुजुर्ग के खिलाफ पुलिस को तहरीर दी। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया। पुलिस ने विवेचना के बाद लोकेंद्र, धमेंद्र, मुकेश, मटरू, राम सेवक, ब्रहमानंद, जयवीर, मुनेश पाल, विनोद, रौकी, शीलेंद्र, बब्लू, सुदेश, अर्चना के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया। न्यायालय ने मुनेश पाल व अर्चना की पत्रावली अलग कर दी। वहीं, शेष आरोपियों को 31 जनवरी 2018 को दोष मुक्त कर दिया गया। कोर्ट ने मामले के आरोपी मुनेश पाल व अर्चना पर अपहरण के आरोपों को लेकर मुकदमे के वादी, व अपहृत बालक के बयान व अन्य गवाहों के बयान के आधार पर दोनों आरोपियों को दोष मुक्त कर दिया। कोर्ट ने मुनेश पाल व अर्चना के मामले में विवेचक कृपाशंकर पर मिथ्या साक्ष्य प्रस्तुत करने का दोषी माना। कोर्ट ने विवेचक के खिलाफ आपराधिक प्रकीर्ण वाद पंजीकृत करने, नोटिस जारी करने एवं एसपी को विवेचक के खिलाफ विभागीय जांच कराने के आदेश दिए। जांच छह माह में पूर्ण कर न्यायालय को अवगत कराने और जांच में आरोपी अर्चना के खिलाफ विद्वेषपूर्ण अभियोजन चलाने का दोष सिद्ध होने पर विवेचक के खिलाफ आपराधिक वाद दर्ज करने के भी आदेश दिए।
विज्ञापन