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UP News: लाशें इतनी कि आंसू पड़ गए कम, कब्रें खोदने के लिए मंगानी पड़ी जेसीबी; चीखों के बीच हुए सुपुर्द-ए-खाक

Sat, 07 Sep 2024 05:14 PM IST
भूपेन्द्र सिंह अमर उजाला नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला नेटवर्क, आगरा Published by: भूपेन्द्र सिंह Updated Sat, 07 Sep 2024 05:14 PM IST
सार

गांव इतनी लाशें पहुंची कि रोने के लिए लोगों के आंसू कम पड़ गए। रोते-रोते आंखें पथरा गईं। कब्रें खोदने के लिए जेसीबी मंगानी पड़ी। UP News: लाशें इतनी कि आंसू पड़ गए कम, कब्रें खोदने के लिए मंगानी पड़ी जेसीबी; चीखों के बीच सुपुर्द-ए-खाक किया गया। 

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bodies were cremated in Saimra village of Agra After 16 people died in accident
शव दफनाने के लिए कब्रिस्तान जाते लोग। - फोटो : संवाद

विस्तार

एक हादसे ने पांच परिवारों को उजाड़ दिया। मौत ऐसे आई, कि लोगों के दिल दहल गए। हाथरस में दो महीने में दूसरे हादसे ने लाशों के ढेर लगा दिए। इससे पहले बीती दो जुलाई को भोले बाबा के सत्संग के समापन पर हुई भगदड़ में 121 लोगों की जान चली गई थी। अब छह सितंबर को जनरथ बस ने पिकअप वाहन में टक्कर मार दी। 

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पिकअप में 35 लोग सवार थे। इसमें 16 की मौत हो गई। इनमें 12 एक ही परिवार के थे। पांच भाइयों का परिवार एक झटके में काल के गाल में समा गया। लाशें देख परिवार व गांव के लोग चीत्कार उठे। रोने  के लिए आंसू कम पड़ गए। रोते-रोते आंखें पथरा गईं। कब्रें खोदने के लिए जेसीबी मंगानी पड़ी। चीख पुकार के बीच शनिवार यानि आज दोपहर को सभी शवों का सुपुर्द-ए-खाक किया गया। 

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आगरा के खंदौली थाना क्षेत्र के सैमरा गांव निवासी बेदरिया की बेटी की दादी सास को मौत हो गई थी। उनकी चालीसा का कार्यक्रम था। घर व रिश्तेदारी के लोग हाथरस जिले के असगरी सासनी के गांव मुकुंदखेड़ा जा रहे थे। रास्ते में हादसे का शिकार हो गया। खबर मिली तो गांव की तेली बस्ती में चीख-पुकार मच गई। जिसे भी दुर्घटना के बारे में मालूम पड़ा, वह बेदरिया के मकान की तरफ दौड़ पड़ा। हादसे में बेदरिया, लतीफ, मुन्ना, चुन्नासी और शान मोहम्मद के परिवार के सदस्यों की मौत हुई है। इसमें मासूम बच्चे भी शामिल हैं। 
 

देर रात तक प्रशासन और पुलिस विभाग के लोग हाथरस से शव एंबुलेंस से लाने में लगे रहे। रात के सन्नाटे में बेदरिया के मकान वाली गली में सिर्फ महिला, पुरुष और बच्चों के चीखने की आवाजें सुनाई देतीं रही। हर किसी की जुबान पर इसी घटना की चर्चा रही। बस्ती में शव लाने से पहले पुलिसकर्मियों को स्थान खोजने की कवायद करनी पड़ी। यहां 16 शव आने थे। बस्ती में पहले पंचायत घर की जमीन को देखा गया। इसके बाद बस्ती के स्कूल पर शव एकत्रित करने का निर्णय लिया गया। 
 
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पुलिस ने स्कूल के अंदर शव रखवाने का प्रयास किया, लेकिन गेट का ताला नहीं खुला। इस वजह से स्कूल परिसर के बाहर तंबू लगाकर शव रखे गए। एक दर्जन से अधिक शव एक साथ कब्रिस्तान तक ले जाना भी प्रशासन के सामने चुनौती बना रहा। इसके लिए पहले से कब्रिस्तान में तैयारी की गई। लोगों की हिम्मत नहीं हो पा रह थी कि कब्रें खोद सकें। हाथ कांप रहे थे। इस पर जेसीबी मंगाकर कब्रें तैयार कराई गईं। 
 

मृतक परिवार के सदस्य सोनू ने बताया कि पहली बार कब्रिस्तान में एक साथ इतने शव दफनाए गए। इससे पहले कभी भी इतने शव एक साथ कब्रिस्तान नहीं ले जाए गए। अंतिम संस्कार होने तक क्षेत्रभर के लोग गांव में जमा रहे। सभी की आखें गीली दिखीं। अब इसे लापरवाही कहें या फिर मजबूरी कहना मुश्किल है। लेकिन इस तरह के हादसों से सबक लेने की जरूरत है। आप सभी लोग ट्रैक्टर और मालमवाहक गाड़ियों में सफर करने से बचें।

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