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जिंदगी के सवेरे के लिए रात काली

Mon, 11 Apr 2016 02:04 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा Updated Mon, 11 Apr 2016 02:04 AM IST
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Black night for morning of life
जिंदगी के सवेरे के लिए रात काली - फोटो : Amar Ujala
शहर का यमुनापार इलाका...कभी उद्योग के लिए पहचाना जाने वाला यह इलाका अब पानी की समस्या के लिए जाना जाता है। लोग बच्चों की शिक्षा से ज्यादा पानी के बंदोबस्त पर खर्च करते हैं। सूरज छिपने से लेकर सवेरे तक का वक्त सिर्फ और सिर्फ पानी भरने की जद्दोजहद में गुजरता है। क्या महिलाएं और क्या बच्चे। हाथों में बाल्टी लिए ही नजर आते हैं। अधिकांश का बचपन एक-एक बूंद सहेजने में ही निकल गया। इस पानी के लिए सालों से कोई पढ़ाई तो कोई कॅरियर तो कोई व्यापार को दांव पर लगा रहा है। दशकों से सुरसा की तरह मुंह फाड़े खड़ी इस समस्या पर रोशनी डालती अमर उजाला की यह रिपोर्ट...
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जल संकट से जूझते लोगों का संघर्ष देखना है तो किसी भोर या शाम को सूरज ढलने के बाद यमुनापार चले जाएं। एक-एक बाल्टी पानी के लिए घंटों की मशक्कत। रुपये देने के बाद भी एक बाल्टी पानी के लिए मरने-मारने पर उतारू लोग। टैंकर के पीछे ड्रम लेकर दौड़ते बच्चे। सुबह-शाम सरकारी नलों की ओर ताकती बोझिल आंखें। यमुनापार का यह दर्द दशकों पुराना है। कई सरकारें बदल गईं, लेकिन पानी की समस्या वहीं की वहीं है।
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यमुनापार के इलाके का भूमिगत पानी भी खारा है। इतना खारा कि इसे पीना तो दूर, इससे न तो नहाया जा सकता है और न ही कपड़े धोये जा सकते हैं। जमीन के अंदर डले लोहे के पाइपों तक को गला देता है। यही वजह है कि पूरा इलाका वाटर वर्क्स या फिर टैंकरों के पानी पर निर्भर है। जल संस्थान का पानी कुछ ही क्षेत्रों में मिलता है। उसका भी समय निश्चित नहीं है। लोग घंटों इंतजार करते हैं। टैंकरों से पानी खरीदना काफी महंगा पड़ता है, जिसे इस इलाके की काफी आबादी वहन नहीं कर सकती। ऐसे में जल संस्थान के नलों से ही आस लगाए रहते हैं। 
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कमाई का बड़ा हिस्सा पानी पर खर्च
सती नगर निवासी सुरेश सिंह प्राइवेट नौकरी करते हैं। वे बताते हैं कि यह मजदूर वर्ग बाहुल्य क्षेत्र है। क्षेत्र की औसत आमदनी लगभग छह पांच हजार रुपये प्रति व्यक्ति प्रति महीना होगी। ऐसे में इन लोगों के लिए बच्चों को शिक्षित और बेहतर जिंदगी देने से ज्यादा जरूरी उन्हें पानी उपलब्ध कराना होता है। एक अनुमान के तहत इतनी आमदनी वाला व्यक्ति कम से कम डेढ़ से दो हजार रुपये प्रति महीने खर्च करता है। ऐसे में ये लोग अपने बच्चों को क्या पढ़ाएंगे-लिखाएंगे।

नौकरी पर जाने में हो जाती है देर
देवराज सिंह फीरोजाबाद में सरकारी विभाग में काम करते हैं। इसके लिए उन्हें सुबह घर से जल्दी निकलना होता है। मगर, पानी की वजह से सप्ताह में कम से कम तीन वह देर पहुंच पाते हैं। जब तक वह टैंकर से पानी लेने जाते हैं तब तक काफी भीड़ हो चुकी होती है। ऐसे में उन्हें कम से कम एक से डेढ़ घंटा इंतजार करना पड़ जाता है। इसकी वजह से वे अक्सर कार्यालय पहुंचने में लेट हो जाते हैं।

छूट रही पढ़ाई
12वीं कक्षा का छात्र सुनील कुमार सुबह-शाम पानी लाने में ही निकल जाती है। वह बताता है कि दो घंटे सुबह और लगभग इतना ही समय शाम को वह पानी का बंदोबस्त करने में गुजार देता है। घर से काफी दूर से पानी लाना पड़ता है। ऐेसे वह साइकिल पर ड्रम रखकर लाता है। इसकी वजह से उसकी पढ़ाई का काफी नुकसान होता है। कभी-कभी तो स्कूल तक छूट जाता है।

फल-फूल रहा पानी का धंधा
यमुनापार क्षेत्र में टैंकरों से पानी की सप्लाई का धंधा खूब फल-फूल रहा है। इस क्षेत्र की 80 फीसदी आबादी इन्हीं पर निर्भर है। मगर, इन पर काफी मारामारी रहती है। तड़के साढ़े तीन बजे से ही ये टैंकर पहुंचना शुरू हो जाते हैं। जब तक सूरज उगता है, तब तक ये अपना धंधा करके निकल लौट जाते हैं। डिमांड को देखते हुए इन्होंने अपने रेट भी बढ़ा दिए हैं। पहले 20 रुपये में भरने वाले ड्रम की कीमत 25 रुपये कर दी है। 


समय बदला, लेकिन समस्या नहीं
76 वर्षीय सेवानिवृत्त शिक्षक गौरीशंकर चौहान पिछले 35 वर्ष से सती नगर में रह रहे हैं। तब से वे पानी की समस्या का सामना कर रहे हैं। बताते हैं कि उनके घर में जल संस्थान की पाइप लाइन का कनेक्शन तो है लेकिन पानी नहीं आता। हालांकि वह इसका बिल नियमित भरते हैं। इसके बावजूद उनके यहां पानी नहीं आता।

पानी के लिए बह चुका है खून भी
क्षेत्र में पानी की समस्या इतनी विकराल हो चुकी है कि कई बार यहां एक बाल्टी पानी के लिए हत्याएं तक हो चुकी हैं। वर्ष 2014 की भीषण गर्मी में टैंकर से पानी लेने पर इतना विवाद हुआ कि दो युवक एक-दूसरे के खून के प्यासे हो गए। झगड़ा में एक की मौत हो गई। इससे पहले एक और युवक को नल से पानी लेने को लेकर हुए झगड़े में अपनी जान से हाथ धोना पड़ा।

यहां है अधिक समस्या 
सती नगर, श्याम नगर, गुलाब नगर, सुदामापुरी, नराइच, नगला मोहनलाल, नगला रामबल, कालिंदी विहार।

जल संस्थान यमुनापार क्षेत्र में पानी उपलब्ध कराने की पूरी कोशिश करता है। हाल ही में ट्यूबवेलों से नराइच और कालिंदी विहार में टंकी भरने की व्यवस्था की गई है। इससे भी पानी की सप्लाई की जा रही है।
- मंजू गुप्ता, महाप्रबंधक, जल संस्थान 

नशे में जलकल कर्मी पेयजल सप्लाई भूला
लोहामंडी क्षेत्र में कई दिनों से सुबह के समय पानी सप्लाई न हो पाने का कारण सामने आ गया है। जोनल पंपिंग स्टेशन (जेडपीएस) पर रविवार सुबह लगभग सवा पांच बजे क्षेत्रीय लोगों के साथ पहुंचे पार्षद हेमंत प्रजापति ने पंप ऑपरेटर को नशे में धुत पाया। नशे में होने के कारण वह पंप चलाना ही भूल गया था। जलकल की महाप्रबंधक मंजू गुप्ता ने ऑपरेटर को निलंबित कर दिया, साथ ही अधिशासी अभियंता और सहायक अभियंता सहित एक अन्य कर्मचारी का वेतन काटने का आदेश भी दिया है।

बता दें कि पानी की समस्या से परेशान लोगों ने ऑपरेटर के हर वक्त नशे में होने की शिकायत की थी। पार्षद हेमंत प्रजापति ने खुद मौके पर जाकर देखा। महाप्रबंधक ने सहायक अभियंता से इसकी जांच कराई। आपरेटर हरिओम दोषी पाया गया, उसे निलंबित कर दिया गया। बताया जा रहा है कि पंपिंग स्टेशन परिसर में लगभग दर्जनभर बाहरी वाहन भी खड़े थे। इसके अलावा सुपरविजन में लापरवाही पर अधिशासी अभियंता वीके गुप्ता, सहायक अभियंता राजेंद्र कुमार व सुमित पचौरी का एक दिन का वेतन काटने के आदेश दिए हैं। वहीं, सुभाष पार्क स्थित पंपिंग स्टेशन पर तैनात पंप चालक मुन्नालाल को भी निलंबित कर दिया गया है। 
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