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लोकसभा चुनाव में ब्रज के विधायकों की 'अग्निपरीक्षा'
Tue, 02 Apr 2019 02:57 PM IST
मुकेश कुमार
चंद्रमोहन शर्मा, अमर उजाला, आगरा
चंद्रमोहन शर्मा, अमर उजाला, आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Tue, 02 Apr 2019 02:57 PM IST
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लोकसभा चुनाव
- फोटो : अमर उजाला
चुनाव लोकसभा का है, लेकिन इम्तिहान विधायकों का भी है। 2019 की यह लड़ाई 2017 के आंकड़ों पर जो लड़ी जा रही है। सबसे ताजा नतीजे यही है नेताओं के पास। इनसे ही पता चलता है कि कौन सा दल किस बूथ पर कमजोर है और किस पर मजबूत। इन आंकड़ों से ही यह किला फतह करने की रणनीति तैयार की जा रही है। ब्रज में भाजपा विधायकों की पकड़ भी देखी जाएगी।
इस चुनाव से यह भी पता चलेगा कि विधायकों का कामकाज जनता को पसंद आ रहा है या नहीं। अगर किसी विधायक से नाराजगी होती तो उसके दल के उम्मीदवार को इसका नुकसान उठाना पड़ सकता है। ब्रज की छह लोकसभा सीटों आगरा, सीकरी, मथुरा, फिरोजाबाद, एटा और मैनपुरी में 30 विधान सभा क्षेत्र में हैं। इनमें से 25 भाजपा के पास हैं। आगरा और सीकरी लोकसभा क्षेत्र में कुल मिलाकर दस विधान सभा क्षेत्र हैं। दस के दस पर भाजपा का कब्जा है।
2017 में हारे पूर्व विधायकों को साबित करना है कि उनकी पकड़ क्षेत्र में बनी हुई है। धर्मपाल सिंह, ठाकुर सूरज पाल, भगवान सिंह कुशवाहा बसपा से कांग्रेस में चले गए। कांग्रेस को इनसे बड़ी उम्मीदें हैं। गुटियारी लाल दुबेश बसपा से भाजपा में आए हैं।
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इस चुनाव से यह भी पता चलेगा कि विधायकों का कामकाज जनता को पसंद आ रहा है या नहीं। अगर किसी विधायक से नाराजगी होती तो उसके दल के उम्मीदवार को इसका नुकसान उठाना पड़ सकता है। ब्रज की छह लोकसभा सीटों आगरा, सीकरी, मथुरा, फिरोजाबाद, एटा और मैनपुरी में 30 विधान सभा क्षेत्र में हैं। इनमें से 25 भाजपा के पास हैं। आगरा और सीकरी लोकसभा क्षेत्र में कुल मिलाकर दस विधान सभा क्षेत्र हैं। दस के दस पर भाजपा का कब्जा है।
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2017 में हारे पूर्व विधायकों को साबित करना है कि उनकी पकड़ क्षेत्र में बनी हुई है। धर्मपाल सिंह, ठाकुर सूरज पाल, भगवान सिंह कुशवाहा बसपा से कांग्रेस में चले गए। कांग्रेस को इनसे बड़ी उम्मीदें हैं। गुटियारी लाल दुबेश बसपा से भाजपा में आए हैं।
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जो भाजपा विधान अपने क्षेत्र में उम्मीदवार को बढ़त दिला देंगे, उन्हें मंत्री पद मिल सकता है। ताजनगरी में नौ के नौ भाजपा विधायक हैं लेकिन, एक भी मंत्री नहीं है। कई बार विधायकों के नाम मंत्री पद की दौड़ में चल चुका है। अगर जिले से किसी को मंत्री बनाया जाता है तो जाहिर सी बात है कि चुनाव में उसके कामों को भी देखा जाएगा।
अगर किसी विधान सभा क्षेत्र में भाजपा उम्मीदवार पिछड़ गया तो उसके विधायक के सामने 2022 में टिकट का संकट आ सकता है। कारण यह है कि भाजपा में दूसरे दलों से कई पूर्व विधायक शामिल हुए हैं। अगर भाजपा विधायकों की पकड़ कमजोर साबित हुई तो ये पूर्व विधायक भी टिकट की दौड़ में शामिल हो जाएंगे।
आगरा में उत्तर सीट से जगन प्रसाद गर्ग 86320 वोटों से जीते। ग्रामीण से हेमलता 65296, दक्षिण से योगेंद्र 54,225, फतेहाबाद से जितेंद्र वर्मा 34,364, छावनी से जीएस धर्मेश 46,325, खेरागढ़ से महेश गर्ग 31,999, बाह से पक्षालिका सिंह 23,140 वोटों से जीतीं। अगर लोकसभा चुनाव में इनके क्षेत्र में बढ़त कम हुई तो इन पर सवाल उठेंगे।
अगर किसी विधान सभा क्षेत्र में भाजपा उम्मीदवार पिछड़ गया तो उसके विधायक के सामने 2022 में टिकट का संकट आ सकता है। कारण यह है कि भाजपा में दूसरे दलों से कई पूर्व विधायक शामिल हुए हैं। अगर भाजपा विधायकों की पकड़ कमजोर साबित हुई तो ये पूर्व विधायक भी टिकट की दौड़ में शामिल हो जाएंगे।
आगरा में उत्तर सीट से जगन प्रसाद गर्ग 86320 वोटों से जीते। ग्रामीण से हेमलता 65296, दक्षिण से योगेंद्र 54,225, फतेहाबाद से जितेंद्र वर्मा 34,364, छावनी से जीएस धर्मेश 46,325, खेरागढ़ से महेश गर्ग 31,999, बाह से पक्षालिका सिंह 23,140 वोटों से जीतीं। अगर लोकसभा चुनाव में इनके क्षेत्र में बढ़त कम हुई तो इन पर सवाल उठेंगे।